भाई हमारे नेता बधुआ मज़दूर हैं वो पैंतीस कॉम के नेता हैं गुर्जरों को छोड़कर.... ध्यान रखना जो कॉम का नहीं वो काम का नहीं... सत्ताधारी दल के नेता नहीं बोले तो समझ आता है विपक्ष के नेता पता नहीं किसका डर सता रहा है।
@himmatsinghgur_
यदि आत्मसमर्पण करने और कानून पर भरोसा करने वालों की भी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो अपराध की दुनिया छोड़कर सुधार की राह चुनने का संदेश कैसे जाएगा ?
दारिया एनकाउंटर हो या आनंदपाल का एनकाउंटर उनके समाजों ने ताल ठोकी और उच्च स्तरीय जांच करवा कर अपराधियों को सजा दिलवाई।
लेकिन गुर्जर समाज के एक भी नेता ने जगन गुर्जर की हत्या के लिए सीबीआई जांच की बात नहीं की यह नेताओं की और सामाजिक संगठनों की उदासीनता है।
इस तरह से सरकारी कस्टडी में किसी की हत्या कर देना लोकतंत्र का गला घोंटने के समान है।
चंबल के बाग़ी जगन गुर्जर ने आत्मसमर्पण कर जेल जाने का रास्ता इसलिए चुना था कि वह मुख्यधारा में लौट सके।
लेकिन अजमेर जेल में जिस तरह उनकी हत्या हुई , वह न्याय व्यवस्था और जेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
#jagansinghgurjar
@rockfin_@IncSanjanajatav मेंढक के भेष में गुर्जर समाज का फ़र्जी अकाउंट..... ग़लत को ग़लत लिखने का अधिकार जनता ने दिया संजना जी को.... दल्ले क्यों पायलट को नीचा दिखा रहा है।
जगन गुर्जर हत्याकांड: - #अजमेर
दुर्भाग्य है जिस समाज के लिए मुख्यमंत्री को उड़ने की धमकी दी वही समाज उनके साथ नहीं है
गुर्जर नेता हो गये गायब है
जगन गुर्जर की न्याय के लिए हनुमान बेनीवाल से निवेदन करने की बात आ गई है
@PRAHALADKHATAN@AjmerpoliceR@RajCMO@hanumanbeniwal
@manojkmmeena फैसला हो गया अब इन बातों में कोई दम नहीं है सब चंगा है फ़ालतू बकवासबाजी में कुछ नहीं रखा.... वैसे कल पता लग गया था तस्कदर का.... जीभ बाहर आ गई थी।।
@AjeetMeena0113@ashokgehlot51@RahulGandhi सही है भाई.... डोटासरा और गहलोत साहब की तरह डॉक्टर पर पायलट ने कोई बीज प्रकरण आरोप का ट्वीट नहीं किया है इसी कारण आपको ये ट्वीट करना पड़ा है।
@Parihar_India@bijendra_gujjar जेल तो पीएम सीएम भी जाते हैं सर.... लेकिन कानून के हिसाब से ही सजा मिलेगी न... या पुलिस की सरपरस्ती में कानून की बिना परवाह किए किसी की जान ले लोगे... फ़िर ये कोर्ट वगैरह किस के लिए है।
देखो बेरोजगार पुवा नेताजी.... इसमें दोराय नहीं हैं कि पांचना बांध की समस्या का समाधान तो होगा लेकिन तय समय सीमा में नहीं होगा... इतने सालों की समस्या मिनटों में सॉल्व नहीं होती है... दोनों पक्षों में तुम्हारे जैसे पुवाओ ने जातीय नफ़रत v ज़हर जो घोला है उसको पिघलने में समय लगेगा।
काश ये जगन... जाट या राजपूत समाज से होता तो सरकार का डंका बजा देते.... उन्होंने सीकर और नागौर में सरकार की चूल्हे हिला दी थी लेकिन गुर्जर भोला भोला समाज है पुलिस के नाक के नीचे हत्या कैसे बर्दास्त हो... गोपाल भाई समाज के लिए आगे आए... धन्यवाद 🙏