अगर 100 पदों की वैकेंसी है, तो समान अवसर का मतलब ही यही है कि सभी अभ्यर्थियों को उन सभी पदों पर प्रतिस्पर्धा करने का समान अवसर मिले, न कि सिर्फ 40 पदों पर।
आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ओपन मेरिट में चयनित होते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि उन्हें अलग से किसी कैटेगरी की ज़रूरत नहीं है, मेरिट में कोई वर्ग किसी से अब कमतर नहीं रहा ।
मेरिट कोई सदियों से विरासत में मिलने वाली चीज़ नहीं है।
अगर मेरे परदादा को पढ़ाई का मौका नहीं मिला, तो इसका मतलब यह नहीं कि मैं भी पढ़ाई नहीं कर पाऊँगा।
मेरी मेरिट इस बात पर निर्भर करेगी कि मुझे शिक्षा ग्रहण करने का कितना अवसर मिला।
अब चूँकि मेरिट इस बात पर निर्भर करती है कि उस व्यक्ति विशेष को शिक्षा का कैसा अवसर मिला, इसलिए आरक्षण भी उसे ही दिया जाना चाहिए, जिसे समान अवसर अभी नहीं मिल रहा है।
यहाँ पर एक पीढ़ी का प्रारंभिक बिंदु उस पीढ़ी के जन्म से है, न कि एक हज़ार साल के इतिहास से।
इस देश में मेरिट और आरक्षण को बिल्कुल किसी वैकल्पिक बहस की तरह नहीं, बल्कि एक अनिवार्य पाठ की तरह पढ़ाया जाना चाहिए।
यह बताया जाना चाहिए कि समान अवसर क्या है और कैसे ऐतिहासिक अन्याय के नाम पर, जो वर्ग वास्तव में आरक्षण का हकदार है, उसे उसका लाभ न देकर एक वर्चस्वशाली समूह आरक्षण का लाभ ले रहा है।
और वर्चस्वशाली समूह वह है, जो हर तरह से संपन्न होकर भी सदियों की कहानी के नाम पर वंचितों के आरक्षण के अधिकार को ले रहा है।
अब एक ही बात बचती है कि व्यक्ति चाहे IAS या IPS ही क्यों न बन जाए, उसे जातिगत दंश झेलना पड़ता है।
तो इसका मतलब फिर यही हुआ न कि जातिगत विद्वेष हटाने के लिए आरक्षण एक सही हथियार नहीं है???
@BasicshikshakC Ye 2021 ki cut off hai
Nai cut off nhi janta koi
Aise me Bharm hoga
Ho sake to delete kar dijiye kyoki aape dura shi jankari post ki jati hai
लोकतंत्र में कानून पर सवाल उठाना अपराध नहीं है ।
यदि किसी कानून के संभावित दुरुपयोग पर कोई नागरिक अपनी राय रखता है, तो उसका उत्तर विचार और बहस से दिया जाना चाहिए—न कि वर्षों पुराने ट्वीट्स खंगालकर कार्रवाई की धमकी से।
किसी भी कानून की आलोचना और उसके दुरुपयोग पर चर्चा करना संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
मैं @talk2anuradha जी आपके साथ हूँ, घबराने की आवश्यकता नहीं है। इस देश की हर अदालत में, मैं पूरी ताकत से इस कार्यवाही का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।
नाम : ममता मिश्रा
अपराध : नीलम वर्मा के बच्चों को पढ़ाना
नतीजा : SCST Act में मुकदमा दर्ज
नीलम वर्मा अपने साथियों के साथ 3 घंटे से मिश्रा मैडम को परेशान कर रही थी..., मिश्रा मैडम को उकसा रही थी, भद्दी भद्दी गालियां दे रही थी..., और वीडियो भी बना रही थी, लेकिन नीलम वर्मा ने 3 घंटे के वीडियो में से सिर्फ 30 सेकंड का वीडियो वायरल किया..., अब क्योंकि प्रिंसिपल ब्राह्मण है और शिकायतकर्ता SC तो बीजेपी को इसमें ऑपर्च्युनिटी दिखाई दी, दलित वोट बैंक साधने के लिए...., RSS के ABVP के लड़के सैकड़ों के संख्या में टूट पड़े..., साफ समझ आ रहा है पूरा मामला सुनियोजित ढंग से सेट किया गया है..., बाकी दामोदर और भीम आर्मी (बीजेपी की दलित इकाई..) पहले ही कह चुके हैं ब्राह्मणों को भारत से खदेड़ कर दम लेंगे..., तो ब्राह्मणों अपना बोरिया बिस्तर लपेट लो ...
@pathakalok68 Nhi kyoki mere sath 12 gante kaam karne vale mere friends ke chhote bhai ka chyan huva hai behad garib parivar se hai mata ji unki aasha bahu ke pad par hai
@fearless0soul@Addict_1008 विवाहमें लाए हुए समान का पूर्ण अधिकार लड़की का होता है कम समय में यदि ग्रह विच्छेदन हो जाएतो चम्मच तक को भी नहीं छोड़ती रही बात कैश की तो पैर की बिछिया से लेकर गले का हार सब लड़के वाले उसी से बनाते है जिस पर भी पूर्ण अधिकार लड़की का होता है फिर भी हर लड़की दहेज का आरोप लगाती हैं
भारत का संविधान एक आतंकवादी को भी जांच करके मुजरिम घोषित करता है , उसको भी मानवाधिकार मिलता है । कसाब की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है ऐसा भी तर्क दिया गया था, कि उसका brainwash किया गया ।
असंख्य दुर्दांत आक्रांताओं से हजारों सालों से देश की संस्कृति, धरोहर , सीमा की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वालो की अजन्मी संताने भी शिक्षा के मंदिर में पहले से ही दोषी घोषित कर दी गई ।
विष्णु तिवारी का उदाहरण है इस राष्ट्र में , कैसे कानूनों का दुरुपयोग करके , बिना जाँच किए बीस साल की सजा दी गई । आज तक फ़र्ज़ी मुक़दमा करने वाले को जेल नहीं हुई जिसने एक परिवार का जीवन ख़राब कर दिया । फर्जी मुक़दमा करने वालो की फोटो , वीडियो , नाम , पता लोगो को नहीं मालूम , जिससे सर्वसमाज सावधान हो जाए ।
उगाही करने का जरिया बन चुके काले कानून से हमारी संतानों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
अब प्रतिभा और योग्यता को शिक्षा के मंदिर में सुनियोजित तरीक़े से दमन की तैयारी है। हम अपने बच्चों की इस काले क़ानून से LYNCHING नहीं होने देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए ।
#UGC_RollBack
जो गेस्ट हाउस कांड हुआ था उसमें आपके साथ बदतमीजी करने वाले सब सामान्य वर्ग के थे..?
बचाने वाले क्या आपकी जाति के थे..?
बहन जी कोई जाति शोषक नहीं होती बल्कि कुछ लोगों की मानसिकता शोषक वाली होती है और वह किसी भी जाति में हो सकते हैं।
#UGC_RollBack
अगर किसी बाग में एक पौधा छोटा रह गया।
तो इसका मतलब ये तो नहीं कि समानता के नाम पर बाकी पौधों को ऊपर से काट दिया जाए?
प्रधानमंत्री मोदी जी UGC कानून वापस लिजिए।
- मनोज मुंतशिर शुक्ला
Jis desh me pradhanmantri OBC caste se aate ho, President ST caste se aati ho, wahan @Kanchanyadav000 jaiso ki soch se hi daara hua hai general caste ka samaj
#UGC_RollBack#Rollback_UGC#UGC
ये तो निर्लज्जता की पराकाष्ठा कर रहे हैं @nishikant_dubey दूबे जी।
10% EWS आरक्षण का झुनझुना दिखाकर हमारे आत्म-सम्मान को क्रय कर लिया है क्या? हमारे बच्चों की बलि लेना चाहते हो अपनी घटिया राजनीति के लिए?
चुल्लू भर पानी में डूब मरो।
17 Jan 2016- रोहित वेमुला का सुसाइड, जातीय उत्पीड़न के आरोप ( पूरे देश की खबर बनी, नेताओं का ताँता उनके परिवार वालों से मिलने में लग गया, UGC ने तो नया नियम ही बना दिया )
26 Feb 2016- लखनऊ में इंजीनियरिंग के छात्र लवकेश मिश्रा ने सुसाइड किया, चिट्ठी में HOD पर आरोप लगाया, ना कहीं खबर बनी ना कोई नेता उनके दरवाज़े तक गया. कोई नाम भी नहीं जानता होगा.
सच ये है कि इस देश में जाति हमें हर रोज मारती है फर्क बस इतना है कि राजनीति ने एक वर्ग के छात्रों को हाशिये पर फेंक दिया है. क्योंकि उनके जीने और मरने से सियासतदानों को कोई फर्क नहीं पड़ता.उनके संघर्ष से वोट नहीं मिलते.
इस हमाम में सब एक जैसे हैं…
अंधियारों की आंखों में जो भोर के सूरज खटके होंगे,,
उनके मानपत्र के शीशे चोटिल होंगे,चटके होंगे,,
सीना ताने झूठ किसी के भरी अदालत में घूमेंगे।
सहमे सहमे सत्य, हमारे बस फांसी पर लटके होंगे
#UGC_RollBack
दुबे जी का नया ट्वीट आया है। इस बार भी EWS आरक्षण लिखना नहीं भूले हैं! कंचना यादव ने आपके समर्थन में बोला है ! उनकी दलील आपसे अच्छी है! एक बार इसे रीट्वीट कर देते @nishikant_dubey जी।