सरकार इन गांव गरीब के नौनिहालों के हाथों से किताबें कॉपी पेन पेंसिल मत छुड़ाइए।
इन गरीब गुरबों दबे कुचले नौनिहालों को भी पढ़ लेने दीजिए।
इनकी जिंदगी अभिशाप मत बनाइए।
Save Primary school for public welfare
साथियों हाथ बढ़ाना है
अब स्कूल बचाना है!
#SaveVillageSchools
जब बच्चा अपने गांव के स्कूल में 1 किलोमीटर या 2 किलोमीटर की परिधि में स्कूल नहीं जा पाता तो ज़रा सोचो 5 किलोमीटर दूर कैसे स्कूल जाएगा ।
#SaveVillageSchools
बच्चों को उनकी शिक्षा के मुख्य धारा से वंचित मत करो 🥺🙏
योगी जी जितने भी आपके शिक्षा से जुड़े आला अधिकारी है जो आपको एडवाइजरी देते है ,उनके कितने बच्चे सरकारी स्कूलों में अध्ययन कर रहे है।
गरीब बच्चों की हालात को समझे सरकार स्कूल को मर्ज करने से बचे
#SaveVillageSchools
क्या सच में जापान को पीछे छोड़कर भारत 4th सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है❓
जापान में केवल 1 बच्ची को स्कूल ले जाने-आने के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही।
दूसरी तरफ हमारे गांव की बेटी है जिसका स्कूल बंद किया जा रहा क्योंकि उसके स्कूल में बस 20 बच्चे पढ़ते है।
#SaveVillageSchools
बंद कर दो स्कूल,ये गांव के दलित,पिछड़े
फ्री में शिक्षा चाहते हैं,
ये पढ़कर राजा बनना चाहते हैं,
अरे इन्हें गरीब रह��र मनरेगा में
मजदूरी करके ही मरना है।
इनकी शिक्षा का सरकार ने ठेका ले रखा है।
ये त्रेता युग वाला राज्य है
स्कूल नहीं सिर्फ जगह मंदिर बनेंगे।
#savevillageschools
सर्व शिक्षा अभियान पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी बाजपेई जी के नेतृत्व वाली सरकार ने पारित किया था सरकार की सोच थी कि 6-14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाए ।इस अभियान के अंतर्गत सरकार ने प्रत्येक गाँव व मजरे में प्राथमिक विद्यालय व प्रत्येक किमी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थ��पना हेतु भवन सहित तमाम संसाधन उपलब्ध कराए
परंतु आज कम/अपर्याप्त छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को समाप्त करके अन्य विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई है
परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत जनसंख्या वृद्धि की दर घट रही है दूसरी तरफ़ विभाग ने तमाम अधो मानक विद्यालयों को मान्यता प्रदान कर रखी है तमाम ग़ैर मान्यता के विद्यालय अधिकारियों की मिलीभगत से आज भ��� संचालित हो रहे है ऐसे में नामांकन कम होना स्वाभाविक है
��रकार ने विधान सभा में सदैव माना है कि छात्र व शिक्षक अनुपात उत्तर प्रदेश में मानक के अनुसार सही है तो फिर विद्यालयों को बंद करने की जरूरत क्या है और यदि सरकार को लगता है कि शिक्षकों की आवश्यकता है तो उसकी कमी नई भर्ती करके करनी चाहिए न कि विद्यालय बंद करके ।
इससे गाँव देहात के तमाम बच्चों से शिक्षा दूर हो जाएगी
लगभग २० हज़ार विद्यालयों का मर्जर पूर्व में करके शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर समाप्त कर दिए गए ।वर्ष 2015 से आज तक किसी भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हुई ।इस आदेश से शिक्षकों के हजारों पद समाप्त हो जायेंगे
जिससे कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति नहीं होगी
जो डी एल एड या बीटीसी पास युवक युवतियाँ शिक्षक बनने की उम्मीद में हैं वे शिक्षक नहीं बन पाएंगे
माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि इस आदेश को निरस्त करने की कृपा करें।
वैसे भी किसी राज्य में शराब की दुकानों की संख्या में वृद्��ि तथा विद्यालयों की संख्या में कमी की नीति आलोचना का कारण बनेगी
जब ग्रामीणों को पता चलेगा कि उनके गाँव का विद्यालय दूसरे गाँव में शिफ्ट किया जा रहा है तो जन आक्रोश लाजिमी होगा ।
उत्तर प्रदेश में अगर गांव का बच्चा पढ़ लिख गया तो मुफ्त का राशन कौन उठाएगा कौन इस सरकार का एहसान लेगा।
ये सरकार सिर्फ अपनी कमियां छुपाने के लिए स्कूल बंद कर रही
नह���ं चाहिए इसी सरकार जी पिछड़ों पर जुल्म करे
#SaveVillageSchools
योगी जी बच्चों ��े उनका हक मत छीनो🙏🙏
मर्ज करना ही है तो शराब की दुकानों को मर्ज करो जिनसे प्रायः दिन घर की मां बहने पीड़ित हो रही हैं।
#SaveVillageSchools #YogiAdityanath
लगता है सरकार अब शिक्षा नहीं, सिर्फ चुनावी गणित सिखाना चाहती है।
गरीब के बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो सवाल भी नहीं पूछेंगे — यही तो ���ाहिए सत्ता को!"
"पर याद रखना अभाव में पले हुए बच्चे विद्रोही होते हैं —वो या तो कलम थामते हैं या इंकलाब!"
#शिक्षा_बचाओ #सरकारी_स्कूल #गरीब_का_हक़