दुनिया में इंसानों की जितनी हानि धर्म ने की है उतनी शायद किसी ने की होगी.
मुस्लिम और यहूदी का झगड़ा का लंबा इतिहास है. एक दूसरे का जानी दुश्मन है.
लेकिन दूसरे के देश में जाके मौत का खेल क्यों खेल रहो है.
वोट चोरी वाला फॉर्मूला बिहार की जनता ने रिजेक्ट कर दिया है.
जनता कब तक एक ही चूरन चाटे गी.
वोट चोर EVM से हो रही है. कांग्रेस को EVM को हटाने का आंदोलन करना चाहिए.
सातवीं सदी में ह्वेनसांग ने कश्मीर का दौरा किया था. लिखा है कि इस राज्य में 100 संघाराम और 5000 भिक्खु हैं. सम्राट असोक के बनवाए हुए 4 स्तूप हैं.
प्रत्येक स्तूप में तथागत बुद्ध के शरीर-धातु विराजमान है. तथागत बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद सम्राट असोक और महाराजा कनिष्क ने कश्मीर राज्य में अनेक बौद्ध संरचनाओं का निर्माण करवाया. बरसों से कश्मीर की बौद्ध विरासत धरती में समाई हुई थी.
अब धरती फाड़कर ये विरासतें बाहर आ रही हैं. दिसंबर, 2025 के प्रथम सप्ताह में बारामूला के ज़ेहनपोरा में दो हजार साल पुरानी कुषाणकालीन बौद्ध बस्ती के अवशेष मिले हैं. खुदाई में स्तूप, मिट्टी के बर्तन, तांबे की कलाकृतियां और प्राचीन बौद्ध संरचनाएं मिली हैं. प्राचीन कश्मीर में बौद्ध संस्कृति को समझने के लिए ये मह��्वपूर्ण हैं.
ज़ेहनपोरा क्या है? पोरा अर्थात पुर और जो पुर है, वह बस्ती का द्योतक है जैसे नागपुर, कानपुर आदि. ज़ेहन मूल रूप से " झान " [ ध्यान ] का रूपांतरण है, जो बुद्धिज्म का तकनीकी शब्द है. यही झान जापान में " जेन " है और यही झान अरबी में " ज़ेहन " है. निष्कर्ष यह कि ज़ेहनपोरा मूलतः बौद्धों का झान [ ध्यान/ज़ेहन ] करने की बस्ती थी.
- धम्म न्यूज
@KraantiKumar जी आ��ने बिल्कुल सही कहा.
ब्राहुई भाषा आज भी बलोचिस्तान के मध्य भाग में बोली जाती है. और यह एकमात्र जीवित द्रविड़ भाषा है जो दक्षिण भारत से बाहर है.
यह सिंधु घाटी सभ्यता के द्रविड़ भाषी होने का एक मजबूत संकेत है.
अभी बनास नदी का मामला क्या है ? क्यों बनास नदी ट्रेड कर रही है ?
बनास नदी राजस्थान कि एक प्रमुख नदी है। जो गुजरात के कच्छ के रण में सम्मलित हो जाती है।
भीलवाड़ा के चांदगढ़ में अवैध बज���ी खनन हो रहा है। माफिया नदी को 10 मीटर तक खोद रहे हैं।
इससे पानी सूख रहा है, खेती बर्बाद हो रही है, बाढ़ ��ा डर है।
ग्रामीण 17 दिन से धरने पर हैं। महिलाएं, किसान, युवा सब शामिल हैं।
नारा है: “बनास बचेगी तो गांव बचेगा
”हनुमान बेनीवाल ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है ।
आज शाम 6 बजे से #बनास_बचाओ_आंदोलन X पर ट्रेंड कर रहा है।
लोग सीएम, प्रशासन को टैग कर कार्रवाई मांग कर रहे हैं।
प्रमुख मांग : खनन रोको, माफिया पर FIR, प्रदूषित पानी पर रोक
बनास नदी बचाओ 🙏
#बनास_बचाओ_आंदोलन
कम बोलना, ज़्यादा करके दिखाना यह तेलंगाना के DNA में.
यहाँ पॉलिटिक्स से ज़्यादा पॉलिसी पर फोकस है. उतर प्रदेश बिहार जैसे राज्यों को कुछ सीखना चाहिए.
तेलंगाना आज जो कर रहा है, वो बाकी राज्य कल कॉपी करने की कोशिश करेंगे।
में तो कहता हु अभी से कॉपी करने लगे तो आने वाले 10-15 साल में यूपी बिहार में पूरा बदलाव दिखेगा.
चंगेज खान का मंगोलिया बौद्ध मय कैसे हुआ..
आज मंगोलिया विश्व के उन गिने-चुने देशों में से है जहाँ बौद्ध धर्म वास्तव में रा��्ट्रीय पहचान का हिस्सा है.
13 वीं सदी में चंगेज खान के पोते खुबलाई खान ने तिब्बती बौद्ध लामा फग्पा को अपना राजगुरु बनाया.
यहीं से मंगोल-तिब्बती बौद्ध संबं��� की शुरुवात हुई.
दलाई लामा की उपाधि की शुरुवात भी मंगोलिया से हुई.
16 से 19 वीं सदी तक पूरा मंगोलिया बौद्ध बन चुका था.
1925 से 1990 तक कम्युनिस्ट शासन नरसंहार ने बौद्ध धम्म को खत्म कर दिया. मठ नष्ट कर दिए, हजारों लामा मारे गए या जेल भेजे गए.
लेकिन सूरज को कोई छुपा सकता है, क्या?
1990 में लोकतंत्र आने के बाद बौद्ध धम्म का जबरदस्त पुनर्जन्म हुआ.
आज मंगोलिया में जहा देखो वहां सै मठ बन चुके हैं. हर कोई बौद्ध ह���.
रहस्यमय पिरामिड का नाम आते ही सबसे पहले मिस्र का नाम दिमाग में आता है.
हालाँकि, आपको आश्चर्य होगा कि सूडान में मिस्र से भी ज्यादा पिरामिड बने हुए हैं.
सूडान में नील नदी के किनारे नूबिया क्षेत्र में 200 से भी अधिक पिरामिड हैं.
जबकि मिस्र में उनकी संख्या 118 है.
8वीं शताब्दी में यहाँ शासन करने वाले कुश साम्राज्य ने इन पिरामिडों का निर्माण करवाया था.
ये मिस्र के पिरामिडों की तुलना में छोटे हैं, लेकिन इनके कोण कहीं अधिक तीक्ष्ण (नुकीले) हैं.
यूनेस्को ने मेरोए के पिरामिडों सहित पूरे नूबिया क्षेत्र को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है.
यूनेस्को संस्था ने सूडान के गृह युद्ध में इस क्षेत्र को निशाना न बनाने की अपील की थी.
यह प्रधानमंत्री का नमन नहीं है.
यह पूरे बीजेपी का नमन है, RSS का नमन है.
पूरे राष्ट्र का नमन है.
भारत में किसीको भी नमन करने में संकोच नहीं करना चाहिए..
बाबा साहेब सबके है, सबके लिए काम किया था.
बाबा साहेब को नमन..🙏🙏
#BabasahebAmbedkar
कल डॉ०बाबा साहेब का महापरिनिर्वाण दिन है.
उसके दो दिन पहले आदरणीय बहन मायावती जी ने ऐलान किया इससे बहनजी को मानने वाले स्तब्ध रह गए है. उन्होंने कहा अब वो बड़े स्मारक पर होने वाली जयंती या पुण्यतिथि के कार्यकमों हिस्सा नहीं लेंगी.
कारण बताया कि उनके जाने से बहुत भीड़ आ जाती है. जिससे आम लोगों को परेशानी होती है.उनकी सुरक्षा का भारी इतंजाम करना पड़��ा है.
अब वो महापुरूषों की जयंती और पुण्यतिथि श्रद्धा-सुमन अर्पित करने का कार्यकम अपने घर या कार्यालय में करेंगी.
बहनजी का फैसला जनता के प्रति संवेदनशीलता दिखाता है.
जो लोग कह रहे हैं “बहनजी हार मान गईं”, वो भूल रहे हैं कि 2012 के बाद से BSP ने एक भी बड़ा जलसा नहीं किया था – फिर भी 2017, 2019, 2022 में 10-12-19% वोट बरकरार रखा.
यानी भीड़ के बिना भी बहनजी का एक कोर वोट है.
अब मायावती जी उस कोर वोट को और मज़बूत, और खामोश तरीके से ऑर्गनाइज़ करना चाहती हैं.
@vkjatav84 @SurajKrBauddh @Bsp4u
#BabaSaheb
भारत बे स्वाद बन गया था.
जहां देखो छुआछूत, जातिवाद, अस्��ृश्यता अपने चरम पर थी.
अछूतों, शूद्रों का मंदिर में प्रवेश नहीं, कुएँ से पानी नहीं, स्कूल नहीं, सम्मानजनक जीवन नहीं.
हिंदू धर्म के रूढ़िवादी वादी लोग इस घिनौनी व्यवस्था में सुधारा के नाम पर खाना पूर्ति कर रहे थे. समाज में कोई खास बदलाव नहीं आ रहा था.
मनुस्मृति, शास्त्रों आधार बनाकर जाति-व्यवस्था को धर्म का हिस्सा बताया जाता था.
फिर बाबा साहेब कि एंट्री होती है.
सिस्टम की जड़े हिला देते है.
��ारत को संविधान देकर बराबरी लागू करवाते है.
गैर बराबरी वाला हिंदू धर्म छोड़कर ब���द्ध धम्म की दीक्षा ली. लाखों लोगों ने धम्म अपनाया.
यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक धर्म परिवर्तन था.
आज उनके परिनिर्वाण दिवस पर महामानव डॉ बाबा साहेब अंबेडकर को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हु.🙏🏼
#BabasahebAmbedkar
#भारत_रत्न #बाबासाहेब_आंबेडकर