Students crossing rivers to reach school. Children studying in classrooms without roofs.
Watch what the BBC found when they reached my village, Hingoli district in Maharashtra.
“समानता तो समान लोगों के बीच होती है। असमान लोगों को समानता की स्थिति में लाने के लिए समान नहीं, बल्कि असमान नियम बनाने पड़ते हैं।”
यही आरक्षण का मूल है। SC-ST और OBC को मिला आरक्षण गरीबी हटाने की योजना नहीं, बल्कि सदियों की सामाजिक वंचना, भेदभाव और पर्याप्त प्रतिनिधित्व के अभाव का संवैधानिक जवाब है।
एक बच्चा अच्छे स्कूल, कोचिंग, किताबों और तमाम संसाधनों के साथ दौड़ शुरू करता है। दूसरी तरफ़ दलित-पिछड़े परिवार का बच्चा है, जिसके माँ-बाप कभी पेट काटकर, कभी अपनी जरूरतें टालकर उसे पढ़ाते हैं। वह अक्सर संसाधनों और शिक्षकों की कमी से जूझते सरकारी स्कूल से निकलता है। फिर दोनों को एक ही मैदान में खड़ा करके कहा जाता है - “अब मेरिट साबित करो!”
और तमाम बाधाएँ पार करके जब वंचित समाज के बच्चे उच्च शिक्षा और नौकरियों की दहलीज तक पहुँचते हैं, तब भी भेदभाव उनका पीछा नहीं छोड़ता। आरक्षित पद खाली छोड़ दिए जाते हैं और योग्य अभ्यर्थियों को NFS - “Not Found Suitable” बताकर बाहर कर दिया जाता है। जातिवाद खत्म नहीं हुआ, उसने बस अपना तरीका और रूप बदल लिया है।
जातिवाद खत्म नहीं हुआ है; कई जगह उसने अपना रूप बदल लिया है।
इसलिए लड़ाई सिर्फ आरक्षण बचाने की नहीं, हर बच्चे के लिए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित प्रतिनिधित्व और सम्मानजनक अवसर सुनिश्चित करने की भी है।
आरक्षण खैरात नहीं है। यह उस बच्चे को बराबरी की तरफ़ ले जाने वाला संवैधानिक सहारा है, जिसकी दौड़ दूसरों से कई कदम पीछे शुरू कराई गई।
बाक़ी आप भी देखिए पत्रकार @vineetspeaks की ये ग्राउंड रिपोर्ट।
लो अब ‘सोशलमीडिया बंदी’ आ गई!
सोशल मीडियावालों को सरकारी स्कूलों में जाने से रोकना बताता है कि सरकारी स्कूलों के हालात सच में बदहाली की दुखभरी कहानी कह रहे हैं। स्कूलों में क्लासरूम, बोर्ड, पंखे-बिजली, पीने के पानी, दोपहर के खाने, टॉयलेट, लैब, कॉपी-किताब, यूनिफ़ॉर्म से लेकर कई विषय के टीचर्स की बेहद कमी है।
सोशल मीडिया को तो सरकार रोक लेगी लेकिन जेन अल्फा का क्या करेगी?
Getting paid only ₹2,000 a month for cooking, washing utensils & cleaning the school.
The govt school staff are being exploited. They deserve better pay.
लात से मरवाने वाले सरकार से छात्र क्या है उम्मीद कर सकते हैं,
फिलहाल चिंता मत करिए,
अगले वर्ष आपको भी इन्हीं से वोट मांगने आना है,
फिर जनता आपके गांव में घुसने नहीं देगी।
इन पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड करना चाहिए।
🥵 गर्मी में बच्चों को पंखा तक न चलाने देना और सवाल उठाने पर “नाम काटने” की धमकी देना बेहद गंभीर मामला हो सकता है। हर बच्चे को सुरक्षित और सम्मानजनक शिक्षा का अधिकार है। ऐसी स्थिति में अभिभावक लिखित शिकायत करें, सबूत सुरक्षित रखें और शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग करें। 📚⚖️
#GovernmentSchool #StudentRights #Education #TeacherComplaint #ViralVideo #cjp
@CJPRaj19 @CJP_for_India@Cockroachisback@CJP_2029
करोड़ों रुपये की सैलरी लेने वाले एंकर से यह छोटा रिपोर्टर बेहतर है जो बिना डरे सच बता और दिखा रहा है।
सब मिल कर ख़राब सड़क, स्कूल, हॉस्पिटल का वीडियो बना कर पोस्ट कीजिये 🔥
2014 में आई भाजपा सरकार की सबसे बड़ी असफलता-विफलता ये है कि 14 साल तक के बच्चों को अब उनसे कोई उम्मीद नहीं बची है। जिन छात्राओं को स्कूलों में होना चाहिए, वो टीचर की कमी के साथ-साथ स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर आने को मजबूर हैं।
उप्र में कोई शिक्षा मंत्री है क्या?
“मेरे गाँव आ कर ध्वजारोहण करने का अवसर मिला मुझे इस बात का बहुत गर्व है, लेकिन यहाँ के सरकारी स्कूल के हालत देख कर बहुत दुख भी होता है की आज़ादी के 80 साल बाद भी हम हमारे बच्चों के पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूल नहीं बना पा रहे हैं!” -
@abhijeet_dipke from his native village in Maharashtra
DM साहब, ये Gen Alpha छात्राएं हैं। खुद Video बनाकर बता रही हैं कि रेलवे अंडरपास बारिश में कैसे डूब जाता है और उन्हें स्कूल जाने में कैसे परेशानी होती है।
📍मेरठ, उत्तर प्रदेश
स्कूल ठीक करो!
इंस्टाग्राम पर हर 10 में से 6 रील स्कूल की बदहाल हालत दिखा रही हैं।
देश का Genz और GenAlpha अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए सरकारों से स्कूल के हालात पर सवाल पूछ रहा हैं
क्या भारत अब क्रांति के मोड़ में जा रहा हैं?
#SchoolThikKaro