राजस्थान की 13 वर्षीय मासूम बच्ची, जिसने 32 दरिंदों की हैवानियत झेली, आखिरकार 5 दिन तक ICU में जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद आज इस दुनिया को छोड़ गई।
यह केवल एक बच्ची की मौत नहीं, बल्कि इंसानियत की हार है।
अब यदि इस जघन्य अपराध के दोषियों को फांसी से कम सज़ा मिलती है, तो लोगों का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक होगा। ऐसे अपराधों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कोई भी दरिंदा कानून से बच निकलने की हिम्मत न कर सके।
मासूम बच्ची को भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर उसकी आत्मा को शांति दें और उसके परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति दें।🥹🙏🥹@
यह जितने 32 से 32 हैं उनकी एक ही सजा है हत्या उनकी हत्या कर देनी चाहिए ताकि दोबारा कोई ऐसा जगन अपराध न करें
बेटी तुम्हारी आत्मा को शांति नहीं मिलेगा तुम्हारी आत्मा शांति तभी मिलेगा जब वह 32 इस दुनिया से छोड़कर चले जाएंगे
ओम शांति🙏🙏🙏🙏🙏😭😭😭😭😭😭
इस पोस्ट को बहुत से लाइक मिले हैं क्या ये पोस्ट लाइक वाली हो सकती है!
मुख्य पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा repost करें,
इन 32 हैवानों को फांसी होनी चाहिए जल्द से जल्द
मैं प्रार्थना करती हूँ इस इस बच्ची के लिए
इसे फिर से जन्म मिले लेकिन स्त्री शरीर में नहीं 🙏
राजस्थान की 13 वर्षीय मासूम बच्ची, जिसने 32 दरिंदों की हैवानियत झेली, आखिरकार 5 दिन तक ICU में जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद आज इस दुनिया को छोड़ गई।
यह केवल एक बच्ची की मौत नहीं, बल्कि इंसानियत की हार है।
अब यदि इस जघन्य अपराध के दोषियों को फांसी से कम सज़ा मिलती है, तो लोगों का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक होगा। ऐसे अपराधों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कोई भी दरिंदा कानून से बच निकलने की हिम्मत न कर सके।
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यह जितने 32 से 32 हैं उनकी एक ही सजा है हत्या उनकी हत्या कर देनी चाहिए ताकि दोबारा कोई ऐसा जगन अपराध न करें
बेटी तुम्हारी आत्मा को शांति नहीं मिलेगा तुम्हारी आत्मा शांति तभी मिलेगा जब वह 32 इस दुनिया से छोड़कर चले जाएंगे
ओम शांति🙏🙏🙏🙏🙏😭😭😭😭😭😭
"दुआएं साथ हैं तो फिर नज़र का खौफ क्या करना,
मगर हां, कांच के तोहफ़ों को सारे आम मत रखना।
छुपा कर मुट्ठियों में रख लो अपनी खुशी को तुम,
ये दुनियां है साहब! यहाँ खुशियों पर अक्सर वार होता है।
एक पुरानी जान पहचान से एक दफा फिर से मुलाक़ात हुई,
हालचाल जब पूछा तो जवाब था...
"सीने में जो दब गए हैं वो जज़्बात क्या कहें,
ख़ुद ही समझ लीजिए हर बात क्या कहें "