राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी कल होने वाली ट्रस्ट की बैठक से पहले खुलासा करते है कि 😱😱
- राम मंदिर में होने वाले खर्चे में मेरा कोई रोल ही नही है, मैं अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हूं ही नही। 🤡🤡
- चढ़ावा वाले स्थान से मेरा कोई लेना देना शुरू से नही है, और उसको गिनने की प्रकिया के SOP मुझे पहली बार पिछले महीने दिखाए गए है। 🥴🥴
बताओ पिछले 2.5 साल से ये व्यक्ति कोषाध्यक्ष है लेकिन न तो ये खर्चे पर साइन करते है न इन्हें पता है कि चढ़ावा जो आता है उसकी गिनती कैसे होती है। 🤷🏻♂️
राम मंदिर जैसे पवित्र और इतने महत्वपूर्ण स्थल में पैसा कैसे आ रहा, कहां जा रहा इसमें कोई पारदर्शिता दूर-2 तक नही थी और पहले दिन से नही थी।
ये अरबों रुपयों का घोटाला है, इसमें सारे सत्ता के चाटुकारों ने माल कमाया है इसलिए इसकी जांच बहुत ऊंचे स्तर पर होनी चाहिए।
बेशर्मों ने भगवान राम को भी अपनी भोग की हवस का साधन बना लिया, थू है इन सब पर।