Education lost today. 🙏
After Prof. Suryanarayana Doolla resignation, IIT Bombay Director Prof. Shireesh Kedare has also been forced to resign by students, just because they stopped a student from cheating.
Director Shireesh Kedare said today that he didn’t want to drag the students’ protests any further because it could affect their studies, so he decided to step down from his position tomorrow, Sept 21.😓
Today, I literally lost all hope in India. The so-called Gen Z forced a professor and director to resign for doing their jobs honestly.💔
नड्डा जी एक विचार हैं। यहाँ जो हैं, वो नड्डा जी नहीं उनकी मोम की प्रतिमा है। नड्डा जी के घर पर बिस्कुट और चाय अच्छी मिलती है, अतः लोग खिंचे चले आते हैं।
नड्डा जी लोगों को डेट देते हैं, और फिर (यदि आप तिलचट्टे नहीं) मुकर जाते हैं। नड्डा जी को लगता है कि ऐसी योजना से वो सवर्णों का आंदोलन छिन्न-भिन्न कर देंगे। सत्य यह है कि जो आंदोलन @RHAreforms कर रहा है, उसमें ऐसी सरकारी बकलोली के लिए कंटिंजेन्सी पहले से तैयार है।
नड्डा जी आप लगे रहो, हम आपको विरोध में हैं। आपको हवा नहीं लगेगी कि आगे क्या होने वाला है।
@Siddiqu18685392 @RavendraShukla1 Kuch nhi puri hi gadbad hai , views or reels ke liye video bnaya hai only . Itne fresh noto ki gaddi dekhkr har koi smj jayga
सरकार और UGC दोनों को बता दूं।
हम न तो रेल की पटरियाँ उखाड़ते हैं
न सड़कों को जाम करते हैं
न पुतला दहन करते हैं
न सड़कों पर प्रदर्शन करते हैं
हम सीधा सरकार को उखाड़ फेंकते है
इतिहास है हमारा,हम पूरी सत्ता पलट देते है।
कांग्रेस ने जनरल कास्ट के बच्चो से सरकारी नौकरी और सम्मान से जीने का अधिकार छीना था
बिचारे जनरल वाले मेहनत करके व्यापार करते या प्राइवेट नौकरी करते या ख़ुद का छोटा मोटा काम करने लगे
मगर @BJP4India ने तो जनरल कास्ट से शिक्षा का अधिकार ही छीन लिया, जनरल के बच्चो का भविष्य ही ख़त्म कर दिया
हमे बच्पन से बताया गया था की तुम जनरल कास्ट से बिलोंग करते हो इसलिए सरकारी नौकरी की आस में जीवन बर्बाद ना करना, मेहनत करो और खूब पढ़ो और आत्मनिर्भर बनो
और यही बात हम भी अपने बच्चो से अब तक कहते आए है लेकिन UGC के नियमों के बाद हमारे मन में बच्चो के भविष्य को लेकर चिंता और भी बढ़ गई है।
माननीय @narendramodi जी, आप तो OBC है, जनरल वालो की पीड़ा शायद नहीं समझ पाएंगे और आपके तो बच्चे भी नहीं है इसलिए जनरल के बच्चो और उनके माता पिता की मानसिक परिस्थिति भी नहीं समझ पाएंगे और आप नहीं समझ पाएंगे की आपके इस “draconian law” से जनरल कास्ट के पीड़ित बच्चो के पास आत्महत्या के अलावा और कोई विकल्प शेष नहीं।
#ShameOnUGC
बहुत ही दुखद खबर आ रही है
बताया जा रहा है कि इस मामले में पूरा सिस्टम बिक गया है। पूरे सिस्टम का एक भी पार्ट ऐसा नहीं बचा जो दबाव में नहीं आया हो।
और सबसे बड़ा दबाव है पीड़ित लड़कियों के परिजनों पर कि वे किसी भी तरह से ले देकर मामले को रफा दफा कर दें। बताया तो यह तक जा रहा है कि एक बड़ी रकम देकर समझौता हो गया है। लेकिन ऐसा होना बिल्कुल भी नहीं चाहिए।
जो दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और इन्हें बचाने वालों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो संदेश बहुत खराब जाएगा। बेटियां पढ़ने के लिए स्कूल जाने से कतराएंगी। वे कारण भी नहीं बताएंगी।
हम इतना ही कर सकते हैं कि इन बेटियों के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा आवाज़ उठाएं। छात्राओं से संगठित रूप से छेड़छाड़ करने वाले शिक्षक सिस्टम में बनाए रखे जाएंगे तो वह आगे और भी ज्यादा छात्राओं से छेड़छाड़ करेंगे।
@BhajanlalBjp@madandilawar@RajCMO@PoliceRajasthan@Rajeev_ips@svoruganti1466
एक आम मिडिल क्लास परिवार में 5 से 8 सदस्य होते हैं। सबके पास स्मार्टफोन तो है, लेकिन सबको इंटरनेट की जरूरत नहीं होती।
फिर भी टेलीकॉम कंपनियाँ ऐसे दिखाती हैं जैसे हर व्यक्ति को रोज़ाना 2GB डेटा चाहिए।
हकीकत यह है कि बहुत से बुजुर्ग, महिलाएं या बच्चे सिर्फ कॉल करने या व्हाट्सएप चलाने के लिए फोन रखते हैं।
उन्हें न वीडियो स्ट्रीमिंग चाहिए, न भारी इंटरनेट पैक। लेकिन कंपनियाँ ऐसे महंगे प्लान देती हैं कि लोगों को 350 से 900 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं — सिर्फ कॉल करने के लिए।
रिलायंस जियो, एयरटेल, वोडाफोन जैसी कंपनियाँ जनता से "डेटा रेवेन्यू" के नाम पर जबरदस्ती वसूली कर रही हैं।
लोगों के पास छोटे रिचार्ज का विकल्प तक नहीं बचा है। पहले 49, 79, 99 रुपये के कॉलिंग पैक मिलते थे — अब सब खत्म।
सरकार और TRAI को हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि कंपनियाँ अलग-अलग श्रेणी के लोगों के लिए प्लान लाएँ —>>
1. केवल कॉलिंग प्लान (100 रुपये के अंदर)
2. लिमिटेड डेटा + कॉलिंग (जरूरत भर का डेटा)
3. प्रीमियम डेटा यूजर (जो वीडियो या काम के लिए इंटरनेट चाहिए)
हर कोई डिजिटल इंडिया का हिस्सा बनना चाहता है, पर मजबूरी में महंगे प्लान लेकर जीना डिजिटल नहीं, लूट है।
कॉलिंग सेवा एक जरूरत है, कोई लग्ज़री नहीं — और इसे आम आदमी की पहुंच में लाना सरकार और कंपनियों की जिम्मेदारी है।
असली फुलेरा का रेलवे स्टेशन...
बाइक सवार पैसे देता है। पुलिसकर्मी खुद की जेब में डालता है और आधे महिला पुलिसकर्मी के जेब में।
रिश्वत की कलंक कथा चल रही है?