एक बिहारी , बिहार नवनिर्माण के लिए प्रयत्नशील, समस्याओं पर विमर्श से ज्यादा निदान में दिलचस्पी, टेक्नोक्रेट और सामर्थ्य भर बिहार की बेहतरी के लिए संकल्पित युवा।
...सगाई के बाद का पहला सवेरा बाबा विश्वनाथ के दरबार में,अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत संगिनी के साथ की,अपने आराध्य महादेव के आशीर्वाद से यह शुभ यात्रा प्रारंभ हुई है,जहाँ आस्था ने प्रेम का हाथ थामा और विश्वास ने जीवन का अर्थ दिया 🙏
बाबा के चरणों में सिर झुकाया,मन में बस एक ही कामना रही यह साथ यूँ ही जन्मों-जन्म तक महादेव की कृपा से अटूट बना रहे 💫
हर श्वास में अब भक्ति का स्पर्श है,हर कदम में एक नई शुरुआत का विश्वास।क्योंकि जब शिव साक्षी हों,
तो प्रेम भी तप बन जाता है और संगिनी, स्वयं प्रसाद।
ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव
#BabaVishwanath #MahadevBlessings #RoyalBeginning #NitishAndVandna #DivineJourney #ForeverStartsHere
@samrat4bjp , @SKNiralaJDU जी बक्सर जिले के राजपुर क्षेत्र की जनता पिछले 15 दिनों से बिजली संकट झेल रही है। हालात इतने बदतर हैं कि पिछले 48 घंटों में लोगों को 10 मिनट भी ढंग से बिजली नसीब नहीं हुई। बाहर भीषण गर्मी और हीट वेव का प्रकोप है, घरों के अंदर उमस और अंधेरा है, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता कहीं दिखाई नहीं दे रही।
कभी कहा जाता था कि पुराने दौर में तार गायब हो जाते थे, लेकिन आज तो हालत यह है कि तार भी हैं, खंभे भी हैं, मीटर भी है, बिल भी समय पर वसूला जा रहा है, मगर बिजली ही गायब है।
मुख्यमंत्री जी मंचों से विकास और सुशासन के दावे करते हैं, विधायक जी उपलब्धियों के पोस्टर लगाते हैं, लेकिन राजपुर की जनता पूछ रही है कि यदि 48 घंटे में 10 मिनट भी बिजली न मिले, तो इसे सुशासन कहें या प्रशासनिक विफलता?
गर्मी से बेहाल बच्चे, बुजुर्ग और मरीज आखिर किससे अपनी शिकायत करें? सोशल मीडिया पर विकास के दावे करने वालों से या उन अधिकारियों से जो जनता की समस्याओं से बेखबर बैठे हैं?
मुख्यमंत्री जी, यदि राजधानी की तरह गांवों की भी चिंता होती, तो शायद राजपुर के लोग आज अंधेरे और उमस में तड़पने को मजबूर न होते।
राजपुर की जनता का सीधा सवाल है कि , बिजली कब आएगी? जवाबदेही कौन तय करेगा? और जनता की इस पीड़ा को आखिर कब तक नजरअंदाज किया जाएगा?
क्योंकि जनता को भाषण नहीं, बिजली चाहिए। विकास के दावे नहीं, राहत चाहिए। और सबसे बढ़कर, उसे ऐसे जनप्रतिनिधि चाहिए जो संकट के समय उसके साथ खड़े दिखाई दें।
बिहार के माननीय मुख्यमंत्री @samrat4bjp को लानत भरी शुभकामनाएँ!
बक्सर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र में पिछले 36 घंटों के दौरान लोगों को कुल मिलाकर मुश्किल से 2 घंटे भी बिजली नसीब नहीं हुई है। एक तरफ दुनिया के सबसे भीषण हीट वेव वाले क्षेत्रों में गिनती हो रही है, तापमान लोगों का जीना मुश्किल कर रहा है, और दूसरी तरफ बिजली व्यवस्था पूरी तरह बेहाल है।जब इस भीषण गर्मी में लोगों को राहत की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब बिजली गायब है और जिम्मेदार लोग दावों और विज्ञापनों में व्यस्त हैं।वाह रे निकम्मी सरकार! जनता गर्मी से बेहाल है, बच्चे, बुजुर्ग और मरीज परेशान हैं, लेकिन व्यवस्था को शायद इसकी कोई चिंता नहीं। क्या यही है वह बिहार, जिसके विकास के दावे किए जाते हैं?
#बक्सर #राजपुर #बिजली_संकट #HeatWave #Bihar #जनता_परेशान #बिहार_सरकार_जवाब_दो
बिहार के माननीय मुख्यमंत्री @samrat4bjp को लानत भरी शुभकामनाएँ!
बक्सर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र में पिछले 36 घंटों के दौरान लोगों को कुल मिलाकर मुश्किल से 2 घंटे भी बिजली नसीब नहीं हुई है। एक तरफ दुनिया के सबसे भीषण हीट वेव वाले क्षेत्रों में गिनती हो रही है, तापमान लोगों का जीना मुश्किल कर रहा है, और दूसरी तरफ बिजली व्यवस्था पूरी तरह बेहाल है।जब इस भीषण गर्मी में लोगों को राहत की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब बिजली गायब है और जिम्मेदार लोग दावों और विज्ञापनों में व्यस्त हैं।वाह रे निकम्मी सरकार! जनता गर्मी से बेहाल है, बच्चे, बुजुर्ग और मरीज परेशान हैं, लेकिन व्यवस्था को शायद इसकी कोई चिंता नहीं। क्या यही है वह बिहार, जिसके विकास के दावे किए जाते हैं?
#बक्सर #राजपुर #बिजली_संकट #HeatWave #Bihar #जनता_परेशान #बिहार_सरकार_जवाब_दो
...आशा है कि आगामी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आप अपने नए समाचार चैनल के नाम की औपचारिक घोषणा करेंगे।साथ ही, जनता को एक बार फिर उसकी वास्तविक सामाजिक भूमिका का बोध कराएंगे, ऐसी भूमिका जो प्रश्न पूछती है, जवाब मांगती है और सत्ता की नहीं, संविधान व जनहित की पक्षधर होती है।
आपकी शुद्ध, सशक्त और विचारोत्तेजक हिंदी उन सामाजिक मुद्दों को आईना दिखाएगी,जो अब तक सत्ता के दबाव में अनदेखे कर दिए गए हैं,और उन सच्चाइयों को स्वर देगी जो न बिकती हैं, न झुकती हैं, न किसी की गुलाम होती हैं।
देश को उम्मीद ह- एक निर्भीक आवाज़ की,
समाज को आवश्यकता है-एक जिम्मेदार माध्यम की, आपके आवाज की सौरव जी।
@saurabhtop
यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया
हम न होंगे कोई हमसा होगा
शुक्रिया @TheLallantop
मान, पहचान और ज्ञान के लिए.
एक अल्पविराम के बाद नई यात्रा की तैयारी
( शेर नासिर काज़मी की कलम से)
...करोना बीतने के बाद उम्मीदें थीं कि यह साल अच्छा रहेगा, पर ज़िंदगी ने अपनी शर्तों पर चलाया। जो सोचा था वो हुआ नहीं। काम के बोझ में इतने दब गए कि खुद के लिए एक पल भी न निकाल पाए।
इस साल ने आँखें खोल दीं कोई अपना नहीं है। चारों ओर चेहरे दिखाई देते हैं, भीड़ है, लोग हैं, पर कोई सच में अपना नहीं। सब संबंध झूठे हैं, दिखावे के हैं।
सच तो यह है जब तक काम के लायक हो, तब तक प्यार मिलता है। जब तक किसी का फ़ायदा निकल रहा हो, तब तक अपनापन दिखता है। पर जिस दिन आप किसी के काम लायक नहीं रहे, उसी दिन वो प्यार, वो रिश्ता, सब हवा हो जाता है।कुछ अपने दूर हो जाते है, कुछ नए लोग मिलते है पर वे सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए। जब ज़रूरत होगी, तब अपनापन दिखाएंगे। काम निकला तो इस्तेमाल करके किनारे कर दिया जायेगा। भावनाओं के साथ खेल खेला जाएगा, जैसे आप कोई खिलौने हों , और ये पूरा एहसास होता है हमें परन्तु हम कुछ बोल नहीं पाते है, और अपने अंदर ठगा हुआ महसूस करते है।
और इस साल सबसे अजीब बात ये रहा कि जब ज़िंदगी में एक व्यक्ति प्रवेश कर रहा था, तो उसी पल के बाद भगवान ने दूसरे को हमसे छीन लिया। मानो कह रहे हों "एक दूँगा तो दूसरा ले लूँगा" मिलन और वियोग, दोनों एक साथ। पूरा साल confusion में बीता समझ नहीं आया कि क्या सही है, क्या ग़लत।
पर अब, बस!
2026 में सब साफ़ है। यह सीख मिल गई कि दुनिया में आप स्वार्थ पर टिके हैं। कोई बिना मतलब के साथ नहीं। अब हम भी वैसे ही रहेंगे।
Response सिर्फ़ उसी को मिलेगा जिसने हमें दिया है। कोई उलझन नहीं, कोई confusion नहीं। रिश्ते बस दुआ-सलाम तक रहेंगे, दिल में गहराई तक नहीं। अब अपेक्षाएँ नहीं रखेंगे किसी से, क्योंकि अपना कोई है ही नहीं।
तो जा रहे हो 2025 अलविदा!
तुमने सच दिखाया, नकली चेहरे उतारे। ले जाओ अपने धोखे, अपना दर्द, अपनी परेशानियाँ।
आ रहे हो 2026 स्वागत है!
इस बार होशियार हैं हम, अकेले हैं पर मज़बूत हैं। अपनी शर्तों पर जिएँगे, अपने लिए जिएँगे। किसी की ज़रूरत नहीं, किसी से उम्मीद नहीं।
सभी को नववर्ष की शुभकामनाएँ! 🙏
🏔✨️
ये इश्क़ भी कैसी अनोखी कहानी लिखता है,
जहा जिस्म ने निभाया हैं हर रस्मों रिवाज ज़माने का,
वहीं दिल हर रात बिछड़े हुये महबूब की खोज में भटकता हैं।✨️
#अंतर्मन