Hello Guys Happy Republic day to all 🙂
So today I am going to present some data from census ,let's start from 2 pics ,one from post independence first census of 1951,and other from census 2011
इक टूटा दिल खाली मकान जैसा
जो रह गया अधूरा उस अरमान जैसा
जो पूरा कर हो कर भी याद न रहा
तो वो अरमान कैसा
और जब अरमान ही खत्म हो जाए
तो इत्मीनान कैसा
जिंदा रहने के लिए
जरूरी है ख्वाहिशो का होना
जो ये भी मर गई
तो क्यों ही जीना ऐसा
लिखा तो बहुत कुछ है
और जो ये न समझ पाए
तो वो इंसान..
@sunshinenew26 शुद्ध खाने वाले लोग थे वो,और हर दिन शारीरिक श्रम भी करते थे,वो हर दिन अपने शरीर का ध्यान रखने वाले लोग थे,यकीन मानो बीमारियां नई नई आने लगी है,पर पहले इतनी बिमारिया आती ही नहीं थी कि इतना सोचना पड़े
@sunshinenew26 फिलहाल आज वालो से बहुत बेहतर था और है भी,बाकी जो बाते तुमने लिखी है न,सोशल मीडिया है तभी ये बकवास लिख पा रहे हो बच्चे,ये तुम्हे समस्याएं लग रही है,उनके लिए आज भी ये छोटी मोटी बाते समस्याएं नहीं है
@sunshinenew26 हा क्योंकि वो पीढ़ी मानसिक और शारीरिक रूप से काफी मजबूत रही है,उन्हें छोटे मोटे बहाने बनाने नहीं आते,वो बस काम पूरा होने के यकीन रखते है,उनके लिए समस्या बस हल ढूंढने का अवसर होती है,हा इस समय ये पोषण और बाकी सारी समस्याएं आ रही है,पर तब ये नहीं थी,इसलिए उनके बारे में सोचा नहीं