@JadaunRajeevS कुछ कहने से पहले सोच कर पोस्ट करनी चाहिए।एक तरफ आप कहते हो चन्द्रशेखर जी बीमार थे कुछ बोल नही पा रहे थे दूसरी तरफ उन्होंन ने बैठाया छाछ पिलाकर भेजा।आखिर क्या आप प्रत्यक्ष दर्शी बयान दे रहे है कुण्ठा छोड़कर सकारात्मक बे।
@mukeshbudharwi राजनीत लम्बे समय का अनुभव गिरगिट की भाति रंग बदलने की कला ।कॉकरोच एकदम से कूदकर आन्दोलन करने लगे पीछे महा इमानदार अपने फ्लाप कैरिय�� को पटरी पर लाने के लिए नौसिखिया के कन्धे पर बन्दूक रख फायर करने लगे पहली बार सफलतापूर्वक शो होगया।दूसरे टर्म मे बेचारे अना��़ी फस गए ।
@AnujShukla00009 लक्ष्मण जी मरे नही थे संज्��ासून्य थे उनको ठीक ��िया जा सकता था ।किसी भी युद्ध का मुख्य किरदार ही खेत रहे गे फिर काहे का युद्ध नीले घोड़े के सवारी का अधूरा ज्ञान।
@_YogendraYadav यह सख्स सरकार विरोधी आंदोलन मे बिन बुलाए मेहमान की भाति मलिकार बन के पहुंच जाता है।खर्चा वर्चा कुछ दिनो का निकल जाता होगा।ऐसा लगता है विरोध की दूकान है।