सोनम वांगचुक के बारे में बस गूगल करो और पता चल जाएगा कि उसका बाप विधायक था कांग्रेस नेता था और वो अच्छी अमीर राजनैतिक फैमिली से है।
अगर आपको ये पता नहीं था तो आप वही हैं जिन्होंने कभी कश्मीर के बारे में जाना ही नहीं।
अगर पता था और अब बता रहे तो आप अपने आकाओं के लिए खेल रहे हैं।
अमीर या राजनैतिक परिवार से होना कभी गुनाह नहीं होता ,बस भारतीय जनता को गरीबी का ग्लैमर पसंद है।
दूसरा भले वो आईआईटी का पास आउट इंजीनियर हो या आईटीआई का डिप्लोमा इंजीनियर, उसने अपना नाम अच्छे कामों से बनाया या कुटिलता से, पर वो भारत की एक हस्ती है जिसका नाम लोग जानते हैं और भारत सरकार ने भी उसका टेंट वाले मामले में योगदान सराहा।
क्या उसने कभी बोला कि वो आविष्कार करता है या वैज्ञानिक है?
सौरव जोशी की e 20 पेट्रोल पर वीडियो बनाने के बाद उसकी पुरानी ev मर्सिडीज के साथ फोटो डाल के भ्रमित करने वाले भाजपा के लोगों से ईमानदारी की उम्मीद मैं बिल्कुल नहीं करता।
धर्मेंद्र प्रधान जैसे छात्रों के साथ बेईमानी करने वा
ले लोग जिनको छात्रों की आत्महत्या से फर्क नहीं पड़ता और नितिन गडकरी जैसे भ्रष्ट और घमंडी सामने हों तो मैं सोनम वांगचुक के पक्ष में दिखना ज्यादा पसंद करूंगा।
केवल सोनम वांगचुक के।
बाकी इस प्रदर्शन में शामिल लोगों को मेरा जूता।
ये कमीने लोग सोनम की लाश पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाह रहे।
सोनम को वैसे खुद ही उठ जाना चाहिए अब।
इस सरकार को घंटा फर्क नहीं पड़ता कोई जिये या मरे तो व्यर्थ क्यों जान देना?
वो भी इन जोकरों के समूह के लिये जो सोनम की लाश देखना चाह रहे अपने फायदे के लिये।
हिंदुओं से भरे क्षेत्रों में लाउडस्पीकर से 'अल्लाहु अकबर' के नारे पर तेरी टट्टी वापस क्यों सटक जाती है? हिंदुओं की धरती नहीं है कश्मीर? हिंदुओं की ही धरती है और नारे लगेंगे, तेरी गां$ जलती है, तो उसका कोयला बना और उस पर चाय पका!
वाह रे क्लिप कटुए... @Amockx2022
कांग्रेस और BJP समर्थकों में यही अंतर है
कांग्रेस वालों को वीडियो कट करके डालके एजेंडा चलाना पड़ता है
BJP वालों को तो कांग्रेस वाले live में एजेंडा सेट करके देते हैं, कट करने की जरूरत नहीं 🤣🤣🤣
यह पोस्ट राजकुमार भाटी जी ने उन लोगों के लिए की है, जिन्हें भ्रम है कि, अखिलेश यादव और उनके साथी चढ़ावा चोरी से आहत हैं और दोषियों को सजा दिलाना चाहते हैं। दरअसल, “राजकुमार प्रजाति” हिन्दू एकता को तोड़ने के अपने अभियान को इस बहाने धार देकर बढ़ाने में लगी है।
मेरे जाट समाज के दो सबसे बड़े वीर योद्धा-
वीर तेजा जी महाराज- धर्म रक्षा और गौ रक्षा में बलिदान हुए
महाराजा सूरजमल- धर्म रक्षा में मुगलों से लड़ते हुए पूरे परिवार सहित बलिदान हुए।
आज ये कुंठित जातिवादी कीड़े इस जहरीले मौलाना को “मौलाना साहब” कह रहे है।
ये अकाउंट जरूर कोई मौलाना का Lover ही चला रहा है।
Before independence? How? Weren’t they fighting the British? All the properties of Azad, Bismil, Bhagat Singh were annexed by the British and they were left with no money. How come Nehru’s were affluent in Pre Independence era while fighting the British?
The Voice of Hind Rajab गाज़ा पर बनी एक फ़िलिस्तीनी प्रोपोगंडा फिल्म है जिसे देखने के लिये थिएटर में दस लोग भी नहीं पहुँचे
राणा अय्यूब उसी का रोना रो रही है
उस दिन आरफ़ा ख़ानम शेरवानी कॉक्रोचों के प्रदर्शन में तड़प रही थी कि कोई नहीं आया
आजकल इन लोगों का बैड लक ही ख़राब चल रहा है 😎
भरत तिवारी अपराधी नहीं था।
भरत तिवारी RTI एक्टिविज्म के नाम पर प्रशासन का दलाल भी नहीं था।
भरत तिवारी को बाहुबली बनने का ख़्वाब भी नहीं था।
भरत तिवारी नैसर्गिक ब्राह्मण हृदय का लड़का था। जो स्वयं लोअर मिडल क्लास से आने के बावजूद ख़ुद से ग़रीब तबके के लिए चिंता में मारा गया।
जो हरकत किया वह कोई सनकी ही कर सकता है। जिसके हृदय को नफ़ा-नुकसान का इल्म हो जाए वो क्यों उन्हीं अनुसूचित जाति के लोगों यादवों, चंद्रवंशियों के लिए क्रांतिकारी बनने की क्यों सोचेगा। जिनके जातीय संगठन उसे अपने घोषित दुश्मन की तरह देखते हैं।
जब एसडीएम से मिट्टी भरवाने को लेकर उसका विवाद हुआ तो स्वयं उसके बाप ने पहले जाकर थाने में गुहार लगाई कि उसे पकड़ लो तो थाना ने पहले उसके बाप को ही बैठा लिया।
लगातार आवेदन देने और प्रशासन से टकराने के वजह से प्रशासन आलरेडी उसका इतना उत्पीड़न कर चुका था कि मजबूरी में उसे असलहा खरीदना पड़ गया।
अपने कई वीडियो में वह पहले भी कह चुका है कि उसे मौत की चिंता नहीं है लेकिन इन लोगों को वापस बाढ़ में से निकालकर फिर से बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में ही बसाया जाएगा तो उसके लिए लड़ते हुए मरना उसे कबूल है। आखिर में वह लड़ते हुए ही मारा गया।
उसकी आखिरी इच्छा थी कि उसके शरीर का अंगदान कर दिया जाए। पहली प्राथमिकता भारतीय सेना , दूसरा भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था और तीसरे ग़रीब लोग थे। उसकी यह इच्छा अधूरी ही रही।
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वह तो मर गया लेकिन राष्ट्रीय मीडिया के कंटेंट क्रिएटर्स को नंगा कर गया। जो सरकार के विज्ञापनों से पेट पालते हुए हजारों जमानियाँ गांव और लाखों बिहारी अस्थाई विस्थापितों की ओर देखना भी गँवारा नहीं समझते।
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वह तो मर गया लेकिन पक्ष-विपक्ष दोनों ओर के नेताओं को नंगा कर गया जो गरीब-गरीब जपकर अपने कोठी-बंगलों की लड़ाई लड़ते हैं।
यह भी बता गया कि शाहपुर में विश्वेश्वर ओझा के घर राकेश ओझा जैसा हिज़ड़ा पैदा हो गया है, जो दोषी पुलिसकर्मियों और SDM पर 302 के मुकदमें भी नहीं लिखवा सकता।
फ़र्ज़ी पत्रकार और कांग्रेसी चम्मच, इस मनुवादी संगठन के विषय में अंबेडकर के और लखनऊ अधिवेशन में सरदार पटेल के विचार पढ़ लेना। तुम्हारा बुद्धिस्ट दसवीं पास अनपढ़ है और तुम्हारा बौद्धिक बाप बन गया है।
Just returned home after watching Dhurandhar for the 2nd time. There were 490 people in the theatre. I was mildly devastated there were 10 empty seats..
Still Proud of Kolkata as a city..!
@RanaAyyub#dhurandharonjiohotstar