कहते हैं कि पाताल से भी अपराधी खोज लाएंगे! मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह कांड के दोषियों को टाँगो, सृजन घोटाले के दोषियों को टाँगो! उन्हें क्यों नहीं टाँग रहे?
~ तेजस्वी जी
कोई ऐसा दिन नहीं बीतता जब बिहार में अपराध न होता हो और मुख्यमंत्री लंबी-लंबी फेंकने में लगे रहते हैं।
कितनी सत्ता चाहिए BJP को?
कितनी सीटों से इनका पेट भरेगा?
कितना और नीचे गिरेंगे?
कितना और कलंकित होंगे?
कितनी और संस्थाओं का दम घोटेंगे?
मध्यप्रदेश से काँग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन रद्द करना BJP का एक और कुत्सित पैंतरा है
उनके नामांकन में किसी गलती या गैर-खुलासे का आरोप कोरी बकवास है और कांग्रेस से एक सीट छीनने की घटिया कोशिश है
जब हमारे MLA नहीं तोड़ पाये तो नामांकन खारिज कराने की नीचता पर उतर आए
संविधान को ताक पर रख कर यह लोकतंत्र की दिनदहाड़े हत्या है
अगर आपकी लोकतंत्र में ज़रा सी भी आस्था है तो इसका विरोध कीजिए - क्योंकि BJP के लालच का कोई अंत नहीं है - और इसका ख़ामियाज़ा मेरा देश उठा रहा है
बहुत अफसोस की बात है। जब भी शिक्षा की बात होती है उसके केंद्र में कुछ बड़े शहरों की तस्वीर होती है। लेकिन इसका ढांचा हिन्दी प्रदेशों में ध्वस्त हो गया है। पढ़ाई का हाल पहले चरण से ही इतना बुरा हो चुका है कि लोग ठीक से लिख नहीं पाते। सुन नहीं पाते कि क्या बोला गया है। नतीजा सबको लगता है कि नकल करो, किसी तरह पास हो जाओ। समाज भी इस चोर रास्ते पर चल पड़ा है। बच्चे तो स्कूल जाते ही हैं। गिनती के शिक्षक हैं जो दिल लगा कर पढ़ाते हैं। बाकी सब व्हाट्स एप फॉरवर्ड करने में लगे हैं।
सरदार पटेल के बाद आरएसएस को किसी मर्द ने टककर देने की ठान ली है.
जो काम कांग्रेस के बड़े बड़े सूरमा नहीं कर सके वो अब ये करने जा रहे
कर्नाटक के नए गृह मन्त्री Priyank Kharge
आरएसएस से ही कागज मांग लिए हैँ.
PRIYANK KHARGE ने एक बयान जारी करते हुए बोला है कि आरएसएस अपने सोर्स ऑफ़ इनकम और अपने डाक्यूमेंट्स तैयार रखें
क्योंकि उनको रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा.
KARNATAKA सरकार को पूरी जानकारी देनी पड़ेगी फंडिंग और गतिविधियों की.
हर मेंबर का रजिस्ट्रेशन होगा.
इस बयान से सियासी ह्ड़कंप मचना तय है
क्योंकि आज इंडिया गठबंधन की मीटिंग के बाद आये इस बयान को बहुत अहम माना जा रहा
कागज दिखाना पड़ेगा.. 🤣🤣🤣
एनडीए सरकार ज्वलंत जनसमस्याओं एवं अपनी नीतिगत विफलताओं से ध्यान भटकाने, भरमाने और बरगलाने के लिए आवास और सुरक्षा जैसे गैर-जरूरी मुद्दों को तरजीह दे रही है। आख़िरकार जनता को इन मुद्दों से क्या हासिल होगा?
बिहार के Cheap Minister एनडीए के किसी भी ऐरा-गैरा नत्थू खेरा तथा अयोग्य, अक्षम, कुपात्र, भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को सरकारी खर्च पर उच्च कोटि की सुरक्षा श्रेणी, मंत्रिस्तरीय आवास और सुविधाएं बिना किसी मानक के रेवड़ी की तरह बांट रहे है। परिभाषित नियमों की अवहेलना कर अनुपयुक्त लोगों को सुरक्षा और आवास से उपकृत करने में इस भ्रष्ट और भ्रमित सरकार का कोई निश्चित पैमाना व मापदंड नहीं है।
बिहार का खजाना खाली है। कर्मचारी-व्यापारी, किसान-नौजवान, मजदूर, छात्र-शिक्षक सभी वर्ग त्राहिमाम कर रहे है।
बिहार की दिशाहीन सरकार में भ्रष्टाचार, अपराध, गरीबी, बेरोजगारी और प्रशासनिक अराजकता चरम पर है। शिक्षा-स्वास्थ्य और विधि व्यवस्था बदहाल है। आपराधिक, घृणित, दूषित, संकीर्ण मानसिकता के अवसाद ग्रस्त नौसिखिए लोगों के हाथ में लोकतांत्रिक रूप से समृद्ध बिहार जैसे प्रदेश की बागड़ोर होना, किसी आपदा से कम नहीं है।
अंजना ओम कश्यप @anjanaomkashyap को सैलरी कहां से मिलती है? Aajtak से।
लेकिन Aajtak जैसे प्राइवेट चैनलों की कमाई का एक हिस्सा कहां से आता है? आपके टैक्स के पैसों से!!
चौंकिए नहीं। सरकार Aajtak जैसे प्राइवेट चैनलों को विज्ञापनों (Ads) के बदले करोड़ों रुपये देती है।
सरकार का पैसा, मतलब आपके टैक्स का पैसा।
और यह पैसा लेने के बाद ये चैनल दिन-रात प्रोपेगैंडा चलाते हैं। हिन्दू-मुसलमान करते हैं।
यह आखिर कब तक चलेगा? जाहिर है, जनता जाग जाएगी तो इन्हें मुश्किल होगी। टीचर्स जनता को जगा रहे हैं, और इसी वजह से ये चैनल गुस्से में हैं।
देशभर के बच्चों का भविष्य भाजपा ने नहीं ख़ुद उनके माँ-बाप ने बर्बाद किया है. क्या ये माँ-बाप नहीं जानते थे कि भाजपा को शिक्षा और रोज़गार से कोई मतलब नहीं है?
चले थे अब्दुल को टाइट करने…अब जब अपने बच्चे ही टाइट होने लगे तो रोना आ रहा है? इन बच्चों के असली गुनहगार उनके माँ-बाप हैं🤔
#india #politics #satire
रात 1 बजे धमतरी में एक व्यक्ति अपनी पत्नी और छोटी बच्ची के साथ घर लौट रहा था। पुलिस ने बाइक रोकी, चाबी छीनी और वीडियो बनाने पर परिवार के सामने ही उसकी पिटाई कर दी।
वर्दी का अहंकार है ।
ब्रिटिश राज भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उसकी हुकूमत वाली मानसिकता आज भी देश के कई पुलिस तंत्रों में ज़िंदा दिखाई देती है। नागरिकों को अधिकारों वाले स्वतंत्र नागरिक नहीं, बल्कि हुक्म मानने वाले प्रजा की तरह देखा जाता है।
#amitkilhor #kilhor #chattisgarh
ख़ान सर ने जनता को सस्ती शिक्षा और सस्ता इलाज देकर वो काम कर दिखाया जो सरकार नहीं कर पायी; ज़ाहिर है सरकार को उनसे दिक्कत होनी ही थी!🤔
#politics#india#satire
यूँ ही कांग्रेस ने दिग्गज नेता कमलनाथ को इग्नोर करके 👇इनको चुना है!
इनका नाम है मिनाक्षी नटराजन, कांग्रेस ने राज्यसभा भेजने के लिये मध्यप्रदेश से इन्हे ही चुना है, यह तो सबको पता होगा,
लेकिन जो आपको नहीं पता है वो मै आपको बताता हूँ, यह इतनी पक्की ईमानदार और गांधीवादी नेता हैं, 2024 लोकसभा में कांग्रेस ने इन्हे लगभग 5 करोड़ रुपए चुनाव लड़ने के लिये दिये थे
( जो लोग कांग्रेस को जानते हैं उन्हें पता है कांग्रेस में हैसियत के हिसाब से चुनाव के लिये पैसे दिये जाते हैं ) तो चुनाव के बाद इन्होने 4 करोड़ से ज़्यादा रूपये वापस पार्टी फण्ड में जमा करवा दिये थे, ऐसे ही विधानसभा चुनाव में भी इन्होने चुनाव के बाद लगभग 75% वापस पार्टी फण्ड में जमा करवा दिये थे।
रहन सहन से लेकर खाना पीना एकदम गाँधीवादी हैं।
आप कह सकते हो सच्ची कांग्रेस की सिपाही हैं।
राहुल गाँधी जी को मुबारकबाद देनी चाहिये उनके इस फैसले के लिये। RT
सम्राट चौधरी Chief Minister नहीं बल्कि Cheap Minister हैं।
Cheap राजनीति कर रहे हैं। छोटी सोंच और घृणा भाव के साथ।
हमारे लिए घर और सिक्योरिटी मुद्दा नहीं है ।मुद्दा पेपर लीक, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी है।
~ तेजस्वी जी
अब Cheap राजनीति करने वाले को Chief Minister कैसे कहा जाए?
प्राइवेट कर्मचारी रखने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन बहुत जरूरी है
नहीं तो इसका खामियाजा आम यात्री के साथ-साथ रेल कर्मचारियों को भी भुगतना पड़ेगा!
#RailwayNews#police#PoliceInvestigation#vacancy
विपक्ष छात्रों के साथ मैदान में उतर चुका है. NEET पेपर लीक के मुद्दे पर अनेक राज्यों में पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन और पूरी निर्दयता से उनका दमन किया जा रहा है…
…लेकिन गोदी मीडिया इन खबरों को दबाने में लगा हुआ है. आप इस मुद्दे को दबने मत दीजिएगा.
(वीडियो उत्तराखंड का है)
नेताओं के बच्चे विदेशों की यूनिवर्सिटियों में पढ़ते हैं, लेकिन जनता के बच्चों को भारत की शिक्षा व्यवस्था का गुणगान सुनाया जाता है।
अगर भारत का Education System इतना ही शानदार है, तो देश चलाने वाले अपने बच्चों को यहीं क्यों नहीं पढ़ाते?
क्या उन्हें भारतीय स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों पर भरोसा नहीं?
क्या आम जनता के लिए एक सिस्टम और नेताओं के लिए दूसरा?
जिस शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की ज़िम्मेदारी थी, उसी पर सबसे कम भरोसा सत्ता के गलियारों में क्यों दिखता है?
यह सिर्फ़ सवाल नहीं, करोड़ों छात्रों और अभिभावकों की आवाज़ है।