जुगनुओं की चमक हमारी आंखों में न होती
जीवन भी तो ऐसा ही है ..
बिना विषम परिस्थियों के कोई निखर कहाँ पाता है
हर ग्रहण बताता है,
छाया टिकती नहीं,रौशनी लौट आती है,
सदियों से यही सच्चाई रही है और रहेगी भी ...
देखो ना...कैसे
चाँद ने ओढ़ ली,लालिमा की चादर,
मानो कह रहा हो—
अंधकार भी सुंदर है।
जैसे सुंदर होता है सितारों से भरा सारा का सारा आसमां
ये अंधकार न होता तो हम कैसे देख पाते ध्रुव तारे को
कैसे दिखाई देता हमें ये चाँद....
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