राजनीति को कुर्सी का खेल समझने वाले लोग कभी नहीं समझ पाएंगे कि विचार की खेती करना सत्ता पाने से कहीं कठिन काम है।
महात्मा गांधी ने भी किसी चुनाव से सत्ता नहीं पाई थी, फिर भी उन्होंने पूरे उपमहाद्वीप की राजनीतिक चेतना बदल दी।
जयप्रकाश नारायण ने भी कुर्सी नहीं, जन-जागरण को अपना ध्येय बनाया था क्योंकि उन्हें पता था कि सत्ता का परिवर्तन क्षणिक होता है, पर विचार का परिवर्तन पीढ़ियाँ गढ़ता है।
प्रशांत किशोर का चुनाव न लड़ना इसी समझ का विस्तार है जहाँ राजनीति स्वयं के उदय की जगह एक सामूहिक शक्ति के निर्माण का माध्यम बनती है।
जय बिहार ✊
The deep state which is fighting India is also the one fighting Trump's US. Its favorite tool to create losses for a country that wins in war against its puppet terror regimes is a PLANE CRASH to kill innocent people. The US / Israel / even India have to be very careful now.
पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।
संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ।
मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।
@mujifren@chasing_highs Tu sach me UPSC mains likha hai ya aise hi fekta hai?
Normal diplomatic engagement and complete surrender me difference nahi samajh aa rha.
साथियों,
बिहार चुनाव परिणाम के बाद प्रशांत किशोर और जन सुराज से जुड़े लोग पिछले कुछ महीनों से लगातार आत्ममंथन कर रहे हैं। हम अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं।
हमारी एक बड़ी कमी यह रही कि हम नैरेटिव को पूरी तरह स्थापित नहीं कर पाए। उदाहरण के तौर पर, पीके ने पलायन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया, एक ऐसा मुद्दा जिससे बिहार का शायद ही कोई परिवार अछूता हो। कुछ लोगों ने इस पर चर्चा तो की, लेकिन जिस स्तर पर इसे मुख्यधारा की मीडिया में जगह मिलनी चाहिए थी और जिस तरह यह हर व्यक्ति की जुबान पर होना चाहिए था, वैसा प्रभाव नहीं बन पाया।
इसी संदर्भ में कई ट्विटर पर सक्रिय साथियों का सुझाव है कि जन सुराज को ट्विटर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करनी होगी। आज ट्विटर वह प्लेटफॉर्म है, जहां से नोएडा की मीडिया खबरें उठाती है और जहां से नैरेटिव को दिशा मिलती है। हाल का यूजीसी वाला मुद्दा इसका ताज़ा उदाहरण है।
इसी सोच के साथ हमने जन सुराज के ट्विटर अभियान को मजबूत करने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। हमारा पहला लक्ष्य है कि अगले एक सप्ताह में कम से कम 1000 ऐसे लोगों को जोड़ा जाए, जो ट्विटर पर एक्टिव हैं। इसके बाद हम ठोस रणनीति और एक्शन प्लान के साथ ट्विटर पर अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
आप सभी साथियों से अनुरोध है कि यदि आप प्रशांत किशोर, जन सुराज, बेहतर राजनीति, बिहार के उज्ज्वल भविष्य या एक सशक्त ऑल्टरनेट राजनीति के समर्थक हैं, तो कृपया इस पोस्ट पर कमेंट करें या मुझे मैसेज करें। मैं आपको ग्रुप जॉइन करने का लिंक भेज दूंगा।
जय बिहार 🙏