कल आपने एक कुपढ़, घटिया और निकृष्ट प्रवृत्ति के आदमी के मुँह से नेहरू जी के बारे में सुना!
सुनिए क्या कह रही हैं हिंदी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार महादेवी वर्मा जी-
“22 साल के थे वे, तब उनकी पत्नी नहीं रही”
उसके बाद हमने जब कहा कि भाई दोनों बच्चे छोटे हैं... एक लड़की थी, एक लड़का, छोटे-छोटे। दोनों इतने छोटे हैं, आप विवाह कर लें।
तो उन्होंने हमसे बड़ी बात कही, "मनोहरा देवी मरी नहीं हैं, मुझ में समा गई हैं। तो मैं अब दोनों हूँ।"
असल में वहाँ जब खबर पहुँची न उनकी बीमारी की... चले तो जब गाँव की सीमा में पहुँचे तो उनकी पत्नी को जला कर के लोग लौट रहे थे।
अंतिम समय में नहीं देखा उन्होंने लेकिन उनके चरित्र पर कोई धब्बा नहीं है।
एक वो और एक नेहरू जी। नेहरू जी भी ऐसा है कि हमेशा कहते थे "महादेवी, मैं तो नास्तिक हूँ।"
हमने कहा "भाई, अब कभी देखेंगे हम तुम्हारी नास्तिकता।"
तो जब कमला जी को वहाँ... निधन उनका हो गया और जला के आए तो भस्म यहाँ प्रवाहित की।
बिल्कुल उसी कर्मकांड के साथ... धोती पहन के, जनेऊ डाल के, जैसा कहा पंडितों ने।
और इतनी भस्म उन्होंने एक डिब्बी में रखी... चाँदी की डिब्बी में। उसको हमेशा अपने सिरहाने रखते थे वो।
तो जब कुछ दिन हो गए, दिल्ली मैं गई थी, देखा मैंने। तो मैंने कहा "जवाहर भाई, अब बताएं, आप नास्तिक हैं कि आस्तिक?"
तो उनके आँसू आ गए। कहने लगे "महादेवी, आज तो मैं आस्तिक हूँ।"
"क्योंकि यह ठीक है, कमला की भस्म तो मैंने प्रवाहित करा दी लेकिन मुझे लगता है वह है, वह मुझे देखती है।"
दो को मैंने देखा... इतने ज़्यादा अपनी पत्नी के प्रति इतना स्नेह रखना बड़ा मुश्किल है।
कल जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का सुखद अंत हुआ. इस आंदोलन का एक चेहरा जो मुझे हमेशा याद रहेगा वो इरफ़ान का होगा. पहली बार 6 जून को उससे मिला था. उसी दिन जंतर-मंतर पर आंदोलन की शुरुआत हुई थी. उसके बाद मैं इरफान के घर गया. परिवार से मिला. गरीबी झेलते हुए भी इरफान हमेशा मुस्कुराता रहता है. अपनी नहीं अपने लोगों की बात करता है. अपने समाज की. समाज की कुरीतियों को तोड़ता है. इरफान का नंबर मांगने और उसकी मदद करने के लिए अब तमाम लोग संपर्क कर रहे. उन सभी का बहुत शुक्रिया. उम्मीद है इरफान को अपने सपनों का आसमान मिले.
मेरे संस्थान @TheLallantop का बहुत शुक्रिया जो हमे इन कहानियों को कहने की हिम्मत देता है.
#irfan #lallantop
@OliveGreens09 ये तो हाथ ही काटा, तीन-तीन दिन मरे हुए को ICU me रखने की घटनाएं हो चुकी हैं, फिर भी अस्पताल चल रहे है और लोग सब जानते हुए भी मजबूरी मे उन्ही अस्पतालों जाते हैं? कोई सुनने वाला नही है