प्रिय सनातनधर्मियों!
राम नाम कोई सामान्य संकीर्तन नहीं,
अपितु वेदांत का सर्वोच्च सार और निर्गुण-सगुण ब्रह्म की परम आद्या शक्ति है।
यह मात्र दो अक्षरों का शब्द नहीं,
बल्कि जगदाधार परात्पर चेतना का
वह शाश्वत बीजाक्षर है जो अज्ञान के आवरण को छिन्न-भिन्न कर जीव को उसके स्वरूप का बोध कराता है।
राम ही आदि हैं, राम ही अनंत।
जय जय श्री राम।
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मित्रो!
रामचरितमानस केवल एक पावन ग्रंथ नहीं,
बल्कि सनातन संस्कृति का वो धधकता
हुआ प्राण-तत्व है जो युगों-युगों से अधर्म के अंधकार को भस्म करता आया है।
प्रभु श्रीराम का चरित्र मर्यादा की पराकाष्ठा है, जो हमें सिखाता है कि विषम से विषम परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर अडिग कैसे रहा जाता है।
यह ग्रन्थ हमारे अस्तित्व का दर्पण है,
हमारी रगों में बहते स्वाभिमान का साक्ष्य है।
रामकथा मंदाकिनी, चित्रकूट चित चारु।
आइए,
केवल रामचरित का पाठ न करें,
बल्कि उनके अद्वितीय आदर्शों को अपने आचरण में उतार कर राष्ट्र और सनातन धर्म की उन्नति में अपना सर्वस्व समर्पित करें।
जय श्री राम।
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जो लोग रामत्व को केवल भावुकता मानते हैं,
वे सनातन की मूल चेतना से अनभिज्ञ हैं।
वाल्मीकि रामायण का एक-एक श्लोक साक्षी है, प्रभु श्री राम का मानवता को संदेश किसी काल्पनिक लोक की बात नहीं,
बल्कि इस धरती पर धर्म अर्थात कर्तव्य और पुरुषार्थ की व्यावहारिक स्थापना है।
राम का अर्थ है,
अन्याय और अधर्म के विरुद्ध बिना
किसी समझौते के शस्त्र उठाना,
और अपने अधिकारों से पहले समाज के प्रति कर्तव्यों को सर्वोपरि रखना।
मर्यादा कोई कायरता नहीं, बल्कि शक्ति पर विवेक का अंकुश है।
मानवता का कल्याण वेदों के,
इसी सिद्धांत में है कि सत्य के लिए वनवास भी स्वीकार हो, पर अधर्म के सामने शीश न झुके...
पाखंड छोड़ो,
इतिहास पढ़ो और मर्यादा पुरुषोत्तम के
शौर्य को अपने आचरण में उतारो।
जय सनातन... जय श्री राम।
🙏🚩
“जब तक तुम परिणामों से प्रेरित हो,
तुम थक सकते हो।
जिस दिन उद्देश्य से प्रेरित हो जाओगे,
तुम्हें कोई रोक नहीं सकेगा।”
परिणाम उत्साह देते हैं,
पर उद्देश्य जीवन देता है।
जो व्यक्ति अपने उद्देश्य को पहचान लेता है,
वह कठिनाइयों में भी नहीं रुकता;
क्योंकि उसका मार्ग
परिस्थितियों से नहीं,
अंतःकरण से संचालित होता है।
उद्देश्य से जुड़ा जीवन
सफल ही नहीं,
सार्थक भी होता है।
भज मन 🙏
– श्रीमद् जगदगुरु: स्वामी संदीपानी।
#SwamiVani #PurposeDriven #InnerWisdom #SpiritualWisdom #SelfRealization #ConsciousLiving #UpanishadWisdom
आज ग्वालियर में अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) द्वारा आयोजित श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व विधायक आदरणीय श्री हेमंत खंडेलवाल जी, प्रदेश प्रभारी आदरणीय डॉ. महेंद्र सिंह जी एवं मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष आदरणीय श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी के साथ सहभागिता कर प्रभु श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा के पावन दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।
लोकआस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति की यह रथ यात्रा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।
इस सार्थक आयोजन के लिए संयोजक श्री देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर जी को हार्दिक बधाई।
जय जगन्नाथ! 🚩🙏
कान खोलकर सुन लो भौश्री वालो
मुझे #BJP का एजेंट #RSS का दलाल,पाखंडी बोलनेवालो तुम वही हो न जिन्होंने रामभक्तो पर गोलिया चलायी,रामसेतु को काल्पनिक बताया , मुझे #धमकिया न दो #अलकायदा भी मुझे 3 वर्ष पूर्व धमकी दें चुकी है,
जय जगन्नाथ।
श्री जगन्नाथ रथयात्रा के महापुनीत
पर्व पर समस्त सनातनधर्मी भाई-बहनों को श्रद्धा, समर्पण और आनंद से ओतप्रोत अनंत शुभकामनाएं।
आइए,
शब्दों के इस रथ पर सवार होकर महाप्रभु
के श्रीचरणों में अपनी भावनाएं अर्पित करते हैं...
ॐ नीलाचलनिवासाय नित्याय परमात्मने।
बलभद्रसुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः॥
चलो रे मन, पुरी धाम।
अहा!
क्या अनुपम छटा है।
नील गगन के नीचे, शंखध्वनि और मृदंग की थाप पर थिरकता हुआ आस्था का महासमुद्र।
आज तो स्वयं सृष्टि के पालनहार,
साक्षात् ब्रह्म, अपने गर्भगृह के ऐश्वर्य को त्यागकर, छप्पन भोग का वैभव छोड़कर, अपनी प्रजा, अपने भक्तों के बीच आ गए हैं।
यह कोई साधारण यात्रा नहीं है।
यह आत्मा का परमात्मा से मिलन का
उत्सव है।
महाप्रभु का रथ नंदीघोष,
सुभद्रा मैया का दर्पदलन और बलभद्र भइया का तालध्वज जब बड़दांड पर अग्रसर होते हैं, तो मानो काल की गति भी कुछ क्षणों के लिए ठहर जाती है।
अद्भुत है मेरे सांवरे की लीला।
वे मंदिर के बंद कपाटों में सिमट कर रहने वाले देव नहीं हैं।
वे तो करुणा के सिंधु हैं।
जो वृद्ध हैं, जो गर्भगृह तक नहीं आ सकते,
जो पतित हैं, जिन्हें समाज पीछे छोड़ देता है। आज जग के नाथ स्वयं चलकर उनके पास आए हैं।
उनकी वे विशाल, गोल और खुली आंखें
बिना किसी भेदभाव के हर भक्त पर अपनी अमृतमयी दृष्टि डाल रही हैं।
रथ की रस्सी को छू लेना मात्र एक क्रिया नहीं, बल्कि अपने अहंकार को महाप्रभु के चरणों में सौंप देने का प्रतीक है।
जब राजा स्वयं सोने की झाड़ू लेकर,
प्रभु के रथ के आगे चेरा-पहरा करते हैं,
तो संसार का सारा ऊंच-नीच का दंभ पल भर में विलीन हो जाता है।
गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ती यह यात्रा
हमें सिखाती है कि जीवन गति का नाम है, रुकने का नहीं।
महाप्रभु से प्रार्थना
हे दारुब्रह्म!
हे पतितपावन!
इस रथयात्रा के पावन अवसर पर संपूर्ण सनातन जगत पर अपनी कृपा बनाए रखें।
हर घर में सुख, शांति, समृद्धि और सनातन संस्कृति का ध्वज सदा लहराता रहे।
हमारे मन के रथ की कमान भी,
आप अपने हाथों में थाम लीजिए,
ताकि हमारा जीवन सन्मार्ग की ओर अग्रसर हो सके।
आइए,
पूरी श्रद्धा के साथ दोनों हाथ उठाकर जयकारा लगाएं...
जय जगन्नाथ!
हरे कृष्ण!
जय बलदेव, जय सुभद्रा मैया!
🙏🚩
नीलाचलनिवासाय नित्याय परमात्मने।
बलभद्रसुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः॥
भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से समाज में सद्भावना, एकता और प्रसन्नता की भावना का विस्तार हो, इन्हीं मंगल कामना के साथ आप सभी को प्रभु जगन्नाथ जी की रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय जगगन्नाथ 🙏🏻
#RathYatra