"फ़ितूर होता है हर उम्र में जुदा...
खिलौने, माशूका, रुतबा और ख़ुदा।"
ज़िन्दगी के फेज़ और उम्र के साथ बदलती हमारी ख्वाहिशों की हकीकत। विकास दिव्यकीर्ति सर ने क्या खूब बयां किया है! 💯✨
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जीवन एक महासंग्राम है। जिसमें हार या जीत से भयभीत हुए बिना अपने कर्तव्य पथ पे निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए , और कभी किसी के आगे दया या वरदान के लिए हाथ नहीं फैलना चाहिए।