@shauryasingh134@DEEPSBISHNOI_@narendramodi और तू तो फिर क्रांति करके आया है हर जगह, सब नाम तूने ही रखवाये, साले न तो मां बहन की तमीज ना साला कोई बात करनी आती नाम और रख लिया सौर्यवीर mc, तेरी तो।
@Jabarsingh_@Kapil_Jyani_ माताजी मंदिर में ही ठीक है एयरपोर्ट पर नहीं। देवी देवताओं का अपना प्रोटोकाल है। वहां ज्यादा सम्मान से हैं। चौराहों पर लोकदेवता को खड़े रखना गुनाह है।
कई जातियां अपने सामुहिक हित को ध्यान मे रख कर दशकों पहले संगठित हो चुकी है। इनको अपने दोस्त और दुश्मन का भान है। इनकी नियत कब्जा करने की है ।और यह वाजिब है क्यूंकि संगठित इंसानी समुह का चरित्र ही यही है । बिहार मे ही नहीं ब्लकि पूरे उत्तर भारत में सिर्फ एक ही बड़ी जाति अभी तक संगठित नहीं हुई है और वो है क्षत्रिय। लेकिन धीरे धीरे यह जाति भी संगठित हो रही है। सोशल मीडिया क्षत्रियों और कम संख्या वाले अति पिछड़ी जातियों के लिए वरदान बन कर आयी है । इसका उचित लाभ क्षत्रिय समाज को मिले इसके लिए जरूरी है कि वर्तमान पर लिखने वालों की संख्या ज्यादा हो समाज मे ।
@NekadiGanesh मारवाड़ में ये दिक्कत हमारे साथ है। तथाकथित किसान कौम कोई बदमाशी करती है, शासन चीजों को संभाल नहीं पाता लोग उसको हमसे जोड़ देतेहै जैसे अभी शिव में जो घटना हुई बेनीवाल के समर्थकों ने किया वो प्रशासन का फेल्योर था क्यों गरीब आदमी की गाड़ी में तोड़फोड़ हुई।
बाड़मेर में जातीय कट्टरता नहीं थी जब तक ये साहब नहीं पधारे, इन्होंने आने के बाद राजपूतों के खिलाफ़ जाटों को लामबद्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सेना का एक भी गुण नहीं था आदमी में। कोरा जातिवाद, ज़हर।
@NekadiGanesh@aamliNSS भाई साहब, राजस्थान में कोई दिक्कत नहीं है पर ये बाहर वाले सच में बहुत गलत काम करते हैं। बाकी गुजर राजपूत की इधर कोई लड़ाई है ही नहीं और चाहते भी नहीं है।