सोचिए सिर्फ एक पत्रकार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से एक सवाल क्या पूछ लिया,
उनको कितना प्रताड़ित किया जा रहा है,
देश आज अघोषित आपातकाल की स्थिति से गुजर रहा है,
अब इस देश के युवा ही इस बदहाल स्थिति को सुधार सकते हैं।
योगी आदित्यनाथ सवालों सेव से ऊपर हो गए हैं क्या??? और प्रेसवार्ता का डेफिनेशन कब से ये होने लग गया कि आप अगर सवाल पूछोगे तो आपके घर बुलडोजर चलेगा और भाजपा के कार्यकर्ता आपको घेर लेंगे
"अगर दम हो तो उठाकर देख ले"
देश के गृहमंत्री अमित शाह व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को अभिषेक ठाकुर का खुला चैलेंज 👇🏻
बड़ा सवाल:- देश के सबसे ताकतवर संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को खुला चैलेंज कोई कैसे दे सकता है?
@DelhiPolice क्या इन लोगों के पीछे कोई विदेशी ताकतें हैं?
पहले राम मंदिर में चंदा चोरी,
अब ₹4400 करोड़ से बने प्रभु श्री राम के वन गमन पथ में भी भ्रष्टाचार।
प्रधानमंत्री मोदी जी,
भगवान राम के नाम पर देश की आस्था को राजनीति का हथियार बनाकर आख़िर जनता को और कितना लूटेंगे?
सोचिए, ऐसा क्या गुनाह किया था इन बच्चों ने कि इन्हें गोली मार दी गई?
इन्होंने सरकार से सिर्फ़ तीन चीज़ें माँगी थीं - शिक्षा, रोज़गार, और जवाबदेही।
एक छात्र के पैर की हड्डी AK 47 की गोली से टूट गई। सेना में जाकर देश की सेवा करने का उसका सपना भी उसी के साथ चला गया। दो और छात्रों के कंधों को गोली चीरती हुई निकल गई।
ये अपराधी नहीं थे। ये ग़रीब घरों के वो बच्चे थे जो अपने परिवार के सपने लेकर पढ़ने निकले थे - किसी को अच्छी नौकरी चाहिए थी, किसी को अपने घर के हालात बदलने थे।
गोली के घाव भर जाएंगे - पर जो डर इन बच्चों के भीतर बैठ गया है, उसका इलाज किस अस्पताल में होता है?
प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी - इनकी टूटी हड्डी तो जुड़ जाएगी। क्या इनका टूटा हुआ सपना आप लौटा सकते हैं?
सोचिए हमारे देश के नेताओं को जब इतना नहीं पता है कि किसी भी अधिकारी की कुर्सी पर नहीं बैठना चाहिए,
उसके पद की एक गरिमा होती है,
फिर इन लोगों से देश के विकास में क्या ही उम्मीद करें.
हद हो गई है।