कल जिस स्कूल से CJP वालों को भगाया गया था
आज वहां BBC के पत्रकार पहुंच गए है
BBC ने पूरी दुनिया में देश के सरकारी स्कूल की पोल खोल कर दी है
युवाओं को ताकत को सरकार बहुत कम करके अंक रही है
जिस प्रकार की खबरें पिछले 1.5-2 साल से आ रही है उनको देखकर लग रहा है कि डांगा खींवसर के विधायक पैसे कमाने के लिए ही बने है.....
बायो डीजल, अवैध खनन, फसल बीमा क्लेम, 40% कमीशनखोरी समेत अनगिनत गड़बड़ी के बाद आज ये नया घपला मार्केट में आया है....
क्या @RajCMO@BhajanlalBjp जी मुख्यमंत्री कार्यालय बुलाकर इनको सम्मानित करेंगे. ...?
@narendramodi@AmitShah
वाह ! डांगा जी, वाह !
पहले फसल बीमा मामले में नाम सामने आया, फिर अवैध पत्थर खनन के आरोप लगे, उसके बाद दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में विधायक निधि के कार्यों के बदले कथित 40% कमीशन लेने के दावे सामने आए, और अब सरकारी भूमि पर कब्जे के गंभीर आरोप !
आखिर एक के बाद एक इतने गंभीर आरोपों के बावजूद भाजपा सरकार की चुप्पी क्यों है ?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जी, आखिर ऐसे नेताओं को राजनीतिक संरक्षण क्यों और किसलिए दिया जा रहा है ?
क्या भाजपा में जवाबदेही केवल विपक्ष के लिए है ? क्या सत्ता पक्ष के नेताओं पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं होनी चाहिए ?
अगर आरोप निराधार हैं तो सरकार स्वतंत्र जांच कराकर सच्चाई जनता के सामने रखे। लेकिन यदि आरोपों में दम है, तो फिर कार्रवाई से परहेज़ क्यों ?
@madanrrathore@BhajanlalBjp
छापर घटनाक्रम की क्रोनोलॉजी समझिये,
अनहोनी होते होते टली, हनुमान बेनीवाल ने सूझबूझ दिखाते हुए प्रस्थान किया, ये काबिल ए गौर है,
हजारों की भीड़ में एक सांसद की सुरक्षा में चूक क्यों? कोई अनहोनी या भगदड़ हो जाती तो जिम्मेदार किसकी? जब हनुमान बेनीवाल ने मंच पर बोला था कि कुछ उपद्रवी हल्ला कर रहे हैं तो प्रशासन घंटों मूक खड़ा था, क्यों? क्या वहां कोई मैनेजमेंट और सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं थी? आखिर इस सरकार में प्रशासन इतनी लापरवाह कैसे? काफ़ी समझाइश के बाद वो असामाजिक तत्व नहीं माने तो हनुमान बेनीवाल ने वहां से जाना उचित समझा क्योंकि माहौल खराब करके वहां बैठे हजारों लोगों की सुरक्षा का सवाल था, पर सवाल ये है कि ऐसे सामाजिक कार्यक्रमों में विपक्षी लोग इतनी घटीया राजनीति पर उतर आए हैं कि उन्हें भीड़ की जिम्मेदारियों की कोई परवाह नहीं की, अगर ये विरोध था तो ये बेहद शर्मनाक हरकत थी, विरोध दर्ज करने के अनेकों मौके है, ऐसे सार्वजनिक जगह पर हजारों की भीड़ में ऐसी हरकते निचले स्तर की राजनीति दर्शाती है,
विपक्षियों को अब बेनीवाल खटकने लगे है, छापर सुजानगढ़ क्षेत्र में आता है जो नागौर के करीब है, तो स्वाभाविक है वहां बेनीवाल जनमत रखते होंगे, बाड़मेर दौरे के समय भी उनके साथ एक गाड़ी को लेकर कुछ ऐसा ही हुआ था,
हनुमान बेनीवाल के बढ़ते लोकप्रियता के खिलाफ नैरेटिव सेट करने के लिए हर जगह कोई न कोई चाल कोई खेल लेता है और झूठा माहौल बनाकर उनकी अस्मिता पर बेवजह सवाल खड़े कर दिए जाते हैं,
अब इस मुद्दे पर भी ऐसा ही हुआ अंधभक्तो की it cell और विपक्षी दल हनुमान बेनीवाल को गलत ठहरा रही है, जबकि हकीकत हम लोगों को समझनी होगी कि गलती किसकी थी, कौन थे वो लोग जो उत्पात मचा रहे थे, किसके इशारे पर उन लोगों ने ऐसी हरकतों को अंजाम दिया, हनुमान बेनीवाल ने समझदारी दिखाते हुए वहां शांति बनी रहे कोई अनहोनी न हो इसीलिए जाना उचित समझा जो एक सकुशल नेतृत्व की पहचान है।
मेरा ये सुझाव है उन लोगों से कि राजनीति अपनी जगह है, कुछ क्षणिक डेमो के लिए आप उस बंदे के खिलाफ ऐसी हरकते करते हो जो बंदा आधी रात तो छोड़ो रात को 4 बजे भी न्याय की लड़ाई लड़ता है, विचारधारा मिले या न मिले राजनीति स्वाभिमान की होनी चाहिए।
ये मेरे निजी विचार है, सादर
@8PMnoCM@RLPINDIAorg@RajCMO@VijayBeniwal_@manphoolsaran7
छापर की ऐतिहासिक जनसभा में उमड़ा जनसैलाब कुछ लोगों को हज़म नहीं हुआ।इसलिए सुनियोजित तरीके से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन असामाजिक तत्वों से नहीं, बल्कि भजनलाल सरकार और प्रशासन से है, जिनकी जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
जब हजारों लोग कार्यक्रम में मौजूद थे, तब सुरक्षा व्यवस्था आखिर नदारद क्यों थी? यदि पहले से सुरक्षा संबंधी इनपुट थे, तो अतिरिक्त पुलिस बल क्यों नहीं लगाया गया ? क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतज़ार कर रहा था ?
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव पर हुए हमले के बाद भी विपक्ष के एक प्रमुख सांसद की सुरक्षा को हल्के में लेना क्या महज़ लापरवाही थी, या फिर यह जानबूझकर बरती गई उदासीनता थी ? आखिर किसके इशारे पर सुरक्षा व्यवस्था को इतना कमजोर रखा गया ?
यदि कल रात भगदड़ मच जाती, किसी निर्दोष की जान चली जाती या बड़ा खूनी टकराव हो जाता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता ? चूरू प्रशासन या भजनलाल सरकार ?
सब जानते हैं कि यदि आरएलपी कार्यकर्ता उकसावे में आकर जवाब दे देते, तो अगले ही पल पूरी घटना का दोष आरएलपी पर मढ़ दिया जाता। प्रशासन अपनी नाकामी छिपा लेता और सरकार विपक्ष को बदनाम करने का नया बहाना ढूंढ़ लेती। सवाल है क्या कुछ लोग इसी पटकथा को सच होते देखना चाहते थे ?
लेकिन उनकी मंशा सफल नहीं हुई।
हनुमान बेनीवाल जी ने एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने का परिचय दिया। उन्होंने मंच से बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की। जब उन्हें साफ दिख गया कि कुछ लोग जानबूझकर टकराव करवाना चाहते हैं, तब उन्होंने कार्यक्रम से निकलना बेहतर समझा, ताकि किसी निर्दोष का खून न बहे और किसी की साजिश कामयाब न हो।
अब जनता जवाब मांग रही है -
• इतनी विशाल जनसभा में पर्याप्त पुलिस बल क्यों नहीं था ?
• बार-बार अपील के बावजूद हंगामा कर रहे लोगों को तुरंत बाहर क्यों नहीं निकाला गया ?
• जब एक दिन पहले ही चूरू पुलिस 21 गैंगस्टरों की गिरफ्तारी का दावा कर रही थी, तो एक सांसद की सुरक्षा में ऐसी गंभीर चूक कैसे हो गई ?
• आखिर किसके दबाव या किसकी लापरवाही से यह सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर रही ?
• यदि कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता ?
लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ को सुरक्षा देना सरकार का संवैधानिक दायित्व है, न कि उसे जोखिम में छोड़ देना। जनता यह जानना चाहती है कि यह महज़ प्रशासनिक विफलता थी या फिर विपक्ष की जनसभाओं को असुरक्षित छोड़ने की कोई सोची-समझी रणनीति ?
भजनलाल सरकार जवाब दे। लोकतंत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी जवाबदेही मांगती है। @RLPINDIAorg@hanumanbeniwal
राजस्थान की जनता ने सुशासन की उम्मीद की थी, लेकिन आज चर्चा जर्जर स्कूलों, बदहाल अस्पतालों, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की हो रही है। जब सरकार जनता की आवाज़ सुनना बंद कर देती है, तब जनता सवाल पूछना शुरू कर देती है।
#पर्ची_हटाओं_राजस्थान_बचाओ
बेटियां सुरक्षा चाहती हैं, युवा अवसर चाहते हैं, किसान सम्मान चाहता है और हर परिवार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं चाहता है। सरकार की पहली जिम्मेदारी इन्हीं मुद्दों पर काम करना है। जनता प्रचार नहीं, परिणाम चाहती है।
#पर्ची_हटाओं_राजस्थान_बचाओ
राजस्थान की जनता आज सिर्फ़ बदलाव की बात नहीं कर रही, बल्कि जवाबदेही की मांग कर रही है। हर गिरती छत, हर प्रशासनिक लापरवाही,हर कानून-व्यवस्था की चुनौती और हर अधूरा वादा सरकार से जवाब मांग रहा है। जनता की अदालत में देर हो सकती है, लेकिन फैसला जरूर होता है।#पर्ची_हटाओं_राजस्थान_बचाओ
सरकार जितना हनुमान बेनीवाल के पीछे पड़ेगी हनुमान बेनीवाल उतने ही मजबूत होंगे
हनुमान को मत रोको...
बढ़ते अपराध को रोको पेपर लीक को रोको ,, भ्रष्टाचार को रोको...
#पर्ची_हटाओ_राजस्थान_बचाओ
सत्ता पक्ष के 240 सांसदों को साइड कर दिया जाए…
तो बाक़ी बचे हुए लगभग 300 सांसदों में से…
क्या कोई एक भी ऐसा सांसद हैं…
जो हनुमान बेनीवाल की तरह कार्यरत हो…??
सड़क से लेकर संसद तक…
पाँच साल चौबीस घंटे लगातार…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कहा जाता है कि 18 घंटे काम करते है, कभी छुट्टी नहीं लेते…
उनकी हक़ीक़त तो हमें नहीं पता…
लेकिन हनुमान बेनीवाल को हम अपनी आँखों के सामने देखते है
18 घंटे नहीं चौबीसों घंटे…
और मजाल है कभी किसी ने बेनीवाल को छुट्टी मनाते या घूमने जाते हुए देखा हो…
आपको एक फ़ोटो या विडियो तक नहीं मिलेगा घूमते हुए या छुट्टी मनाते हुए का…!!
और संसद का कोई ऐसा सत्र नहीं रहा होगा…
जहाँ घंटों पूरे सदन को सुनने के बाद…
अपने हिस्से के 2-3 मिनट के समय का पूरा utilisation ना किया हो…!!
ऐसा दूसरा कोई सांसद हो तो ज़रूर बताइएगा…!!
हनुमान बेनीवाल…
पेपर लीक जैसे मामलों में…
आरोपी का पॉलीग्राफ़ टेस्ट और लाई डिटेक्टर टेस्ट होना चाहिए…
इसके लिए आरोपी की सहमती की बाध्यता ख़त्म होनी चाहिए…
जो युवाओं के भविष्य से खेलने का अपराध कर रहा है…
उसके मानवाधिकारों की चिंता क्यों करनी…!!
एक तरफ देश के प्रधानमंत्री श्री @narendramodi कहते हैं कि "देश के युवाओं का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है", वहीं दूसरी तरफ राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद @madanrrathore दिल्ली में जंतर-मंतर पर अपने भविष्य और अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे युवाओं को "भाड़े का टट्टू" और "पत्थरबाज" कहकर संबोधित करते हैं। यह बयान केवल आंदोलनरत युवाओं का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों बेरोजगार और संघर्षरत युवाओं का अपमान है। अपनी जायज़ मांगों के लिए आवाज़ उठाने वालों को अपमानित करना भाजपा की युवाओं के प्रति वास्तविक सोच को उजागर करता है।
लोगों को मर्यादित आचरण और नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से मैं पूछना चाहता हूं कि क्या यही आपका आचरण और संस्कार है ?
लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को सम्मान मिलना चाहिए, अपमान नहीं।
मैं मांग करता हूँ कि मदन राठौड़ को अपने अमर्यादित बयान पर देश के युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए |
@BhajanlalBjp@PMOIndia
मुख्यमंत्री जी कह रहे है कि जिनके घर में पशु ही नहीं है वो काहे के किसान....?
ऐसा बोलकर मुख्यमंत्री भजनलाल जी ने उन किसानों का घोर अपमान किया है जो आर्थिक रूप से कमजोर है और जिनके पास पशु नहीं है....
तो मैं भजनलाल जी से पूछना चाहता हूँ कि जो किसान आर्थिक रूप से कमजोर है और पशु रखने में सक्षम नहीं होते है तो क्या वो किसान नहीं है?
पहले किसानों को ये कहकर कि वो सिर्फ 20-25 दिन काम करते है और अब ये किसान होने या ना होने का सर्टिफिकेट बांटकर आपने किसानों का अपमान किया है.... मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी को पुरे प्रदेश के किसानों से माफ़ी मांगनी चाहिए.... @hanumanbeniwal
"मंत्री जी, सत्ता का रौब छोड़िए.... अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था सुधारिए। जनता सब देख रही है। आधी रात को मरीज डॉक्टर के इंतज़ार में परेशान रहें... तो सवाल उठेंगे ही। जनता को बहाने नहीं...बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ चाहिए।"
@GajendraKhimsar