#चित्रकूट एडमिन उमेश के नेतृत्व मे माननीय पंचायती राज मंत्री श्री ओमप्रकाश राजभर जी को ज्ञापन दिया गया, जब जिम्मेदारियां समान हैं तो वेतन में भेदभाव क्यों पंचायत सहायकों को भी 26910 ₹ अति कुशल श्रेणी श्रमिक के बराबर वेतन मिलना चाहिए
#पंचायत_सहायक_भी_हकदार#समान_कार्य_समान_वेतन
माननीय मुख्यमंत्री जी @myogiadityanath नीति आयोग के मॉडल ग्राम सचिवालय के संचालक के साथ व्याप्त समस्याओं कर पिछले 4 सालों से बस आश्वासन दिए जा रहे है समाधान कभी नहीं हुआ।
कृपया पंचायत सहायकों की समस्याओं का समाधान करते हुए न्यूनतम वेतनमान और स्थाईकरण प्रदान करे।
पंचायत सहायक वर्षों से स्थाई कर्मचारियों के समान अनेक विभागों के कार्य कर रहे हैं,हर विभाग अधिकारी अपने कार्य में पंचायत सहायको को उपयोग करता लेकिन आज तक उनके कार्यों का कोई संयुक्त दस्तावेजी प्रमाण तैयार नहीं हुआ है। न हमारे विभाग ने कभी इस पर पहल की, न करना चाहता है अतः हमे खुद ही यह बेड़ा उठाना होगा
आप नियम से खेल रहे हम भी काग़ज़ से खेलेंगे
पूरे उत्तर प्रदेश से विकास खंडो और जनपदों से पंचायत सहायक के कार्यों से संबंधित शासनादेश, कार्य आदेश, व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट, फोटो, नोटिस एवं अन्य कार्यों के प्रमाण एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि पंचायत सहायकों के कार्यों की एक राज्य स्तरीय मास्टर रिपोर्ट तैयार की जा सके।
📌 सभी पंचायत सहायक साथियों का योगदान अपेक्षित है।
वेबसाइट लिंक 🖇️ https://t.co/PoGiFCMCkt
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय मात्र एकल कर्मी पंचायत सहायक संचालित करता है।
❓ ग्राम सचिवालय स्थापना आदेश में लिखित कर्मी बीसी सखी, लेखपाल और अन्य 6 कर्मी रोस्टर अनुसार क्या आते हैं या नहीं, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
❓ मात्र पंचायत सहायकों की उपस्थिति दर्ज करवाना, जबकि सफाईकर्मी, सचिव और केयरटेकर को इससे अलग रखना इस भेदभाव की समीक्षा कौन करेगा?
❓ बिना संसाधन, बिना अनुकूल व्यवस्थाओं के पंचायत सहायक किस प्रकार व्यवस्था संभाल रहा है, यह कौन देखेगा और समीक्षा करेगा?
❓ अपने निजी स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग करके विभागीय कार्य करने की मजबूरी की समीक्षा कौन करेगा?
❓ न्यूनतम मजदूरी ₹15,224 होने के बावजूद पंचायत सहायकों को मात्र ₹6,000 मानदेय दिया जा रहा है, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
❓ 6-6 माह तक मानदेय नहीं दिया जाता तथा राजनीतिक मतभेदों के चलते चंद दिनों में नौकरी से निकाल दिया जाता है, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
❓ राजनीतिक मतभेदों के कारण महिला पंचायत सहायकों को प्रताड़ित किया जाता है, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
❓ आज तक 8 से 9 हजार पंचायत सहायक नौकरी क्यों छोड़ चुके हैं, इसकी समीक्षा कौन करेगा?
क्या इन सवालों का जवाब है आपके पास?
@oprajbhar@uppanchayatiraj@DirectorUPPR@ChiefSecyUP@Manojkmr_singh@AwasthiAwanishK@yadavakhilesh@Mayawati@RahulGandhi@BhimArmyChief@AAPUttarPradesh@mediacellsp
#UPkePanchayatSahayak
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी का हार्दिक आभार। आपके नेतृत्व में ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए किए गए प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश का ग्राम सचिवालय मॉडल आज राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है।
#PanchayatiRajUP#GramSachivalaya#UPPanchayatiRaj
#प्रयागराज : पंचायत सहायकों ने विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह को सौंपा ज्ञापन, स्थायीकरण की उठाई मांग...
पूरी खबर पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें-https://t.co/JO9CZqsMLJ
@myogiadityanath 4 साल से ग्राम पंचायतों की डिजिटल व्यवस्था संभालने वाले पंचायत सहायकों को आज भी सिर्फ ₹6000 मानदेय!
नियमित वेतन नहीं,
2-3 माह तो कहीं 6-6 माह बाद भुगतान!
नीति आयोग का मॉडल स्वीकार है तो फिर पंचायत सहायकों के साथ यह भेदभाव क्यों?
₹5 कमीशन का कमीशन नहीं,
सम्मानजनक वेतनमान और स्थायीकरण चाहिए।
57,000 पंचायत सहायकों की एक ही पुकार
स्थाईकरण और वेतनमान
"काम पूरे विभाग का,
अधिकार भी पूरे चाहिए!"
#पंचायत_सहायक
#स्थायीकरण
#वेतनमान
@uppanchayatiraj@ChiefSecyUP@Manojkmr_singh@DirectorUPPR@AwasthiAwanishK@oprajbhar
नीति आयोग का मॉडल स्वीकार होने के बावजूद पंचायत सहायकों के हितों की लगातार उपेक्षा क्यों की जा रही है?
पंचायत सहायकों की नियुक्ति हुए लगभग 4 वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी आज तक मात्र ₹6000 मानदेय पर कार्य कराया जा रहा है।
यह समझ से परे है कि आखिर किस आधार पर इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले कर्मियों को इतना अल्प मानदेय दिया जा रहा है।
प्रदेश के हजारों पंचायत सहायकों को नियमित रूप से मानदेय भी प्राप्त नहीं होता। कहीं दो-दो, तीन-तीन माह बाद तो कहीं छह-छह माह बाद भुगतान किया जाता है।
क्या नीति आयोग के मॉडल में भी ऐसी ही व्यवस्था का उल्लेख है?
पंचायत सहायकों को ₹5 प्रति परिवार के नाम पर जो कमीशन आधारित व्यवस्था दिखाई जाती है, वह व्यवहारिक नहीं है। एक कागज़ पर दर्ज कमीशन से किसी परिवार का भरण-पोषण नहीं हो सकता। यदि यही व्यवस्था है तो प्रदेश के सभी पंचायत सहायक उस ₹5 कमीशन का त्याग करने को तैयार हैं और उसे ग्राम निधि में दान करने को भी तैयार हैं।
हमारी मांग केवल इतनी है कि पंचायत सहायकों की आर्थिक मजबूरियों और भावनाओं के साथ खिलवाड़ न किया जाए।
ग्राम पंचायतों के डिजिटल और प्रशासनिक कार्यों की रीढ़ बन चुके पंचायत सहायकों को सम्मानजनक वेतनमान, नियमित भुगतान तथा स्थायीकरण का अधिकार मिलना चाहिए।
#पंचायत_सहायक_स्थायीकरण #पंचायत_सहायक_वेतनमान
@uppanchayatiraj@ChiefSecyUP@Manojkmr_singh@DirectorUPPR@AwasthiAwanishK@oprajbhar
और पंचायत सहायकों की पहचान कहा बन रही।
बिना मानदेय के काम कर रहे आप लोग आदेश जारी कर देते AC में बैठकर लेकिन उनका ग्राउंड में कोई इंप्लीमेंट हो रहा ये कभी समीक्षा की आपने ?? @uppanchayatiraj
पंचायत सहायक के द्वारा ही ग्राम सचिवालय संचालित किया जाता है आपके आदेश में लिखित 8 कर्मचारी की परछाई भी न दिखती पंचायत भवन में।
गजब मॉडल है आप लोगो का!
एक और जिले से,
#DPRO कुशीनगर द्वारा पंचायत सहायकों के मानदेय बढ़ोत्तरी, सेवा नियमावली निर्माण, विभागीय सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के लिए माननीय निदेशक पंचायती राज लखनऊ को भेजा गया पत्र.
@dm_kushinagar@myogiadityanath@CdoKushinagar@oprajbhar
57000 परिवार आज भी इंतजार में हैं
#UPkePanchayatSahayak
ग्राम पंचायतों में एक ग्राम सचिवालय संचालित करने वाले,गांवों को डिजिटल बनाने,योजनाओं को घर-घर पहुंचाने और शासन की प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने वाले पंचायत सहायक आज मात्र 6000 मानदेय पर कार्य करने को मजबूर हैं
@CMOfficeUP