जैसे कल की ही बात है। 15 साल पहले देश की राजधानी में यह तस्वीर ली गई थी। ट्रेन के लोकल डब्बे में कट्टे में भरकर हैंडीक्राफ्ट का सामान लेकर लोधी गार्डन के पास लगी प्रदर्शनी में गई थी।
उन दिनो जो खुशी अनुभव होती थी वैसी आज दुनिया के बङे से बङे प्लेटफॉर्म पर भी नसीब नहीं होती।
हमारे तकलीफ के दिनो में छोटी छोटी सफलताएं असीम ताकत लाती है। उस समय हर एक सफलता अनूठी थी। भविष्य की कोई योजना नहीं, कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं, बस जो वर्तमान है उसीमें जीना आता था।
यह अलग बात है कि समय के साथ सफर नई ऊंचाईयो, मंजिलो को पाता गया।
हम यदि वर्तमान को जीते हुए सतत चलते जायें तो मंजिल अपने-आप मिल जाएगी।
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पुण्यतिथि विशेष >इस तरह का लीडर रेअर पैदा होता है।शालीन धीर गंभीर गहरा विद्वान सब कुछ उनकी शख़्सियत में था।उनके व्यक्तित्व में एक क़िस्म की असल विराटता थी ,जो बिना प्रचार या पाखंड के उनके व्यक्तित्व की विशालता के कारण थी।वो एक आदर्श पार्लियामेंटेरियन थे उनके पास हाऊस में कहने के लिए ठोस व कन्सट्रक्टीव बात होती तभी हस्तक्षेप करते ओर उनको गंभीरता से लिया भी जाता व सुना भी जाता।उनकी भाषा उच्च कोटि की थी English उनके मुक़ाबले संसद में बोलने वाले बमुश्किल ही कोई थे वैसी ही अच्छी हिंदी ओर इतनी ही बढ़िया मारवाड़ी ।उनकी भाषा में बहुत ही शालीनता भी थी ओर बात में कंटेंट भी होता था।वो नेताओं की उस जमात में नहीं थे जो अननेसेसरी ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर बोलते हैं बहुत सहज बातचीत की शैली में हाँ बात में दम ओर वजन दोनों था।भारत में वाजपेयीजी की सरकार संचालन के समय जो पोलिसी मेकिंग में एक्सीलेंसी उन्होंने दिखाई वो तो अपने आप में उदाहरण है।फ़ोरेन पोलिसी डिफेंस फायनेंस तीनों मिनिस्ट्री की जटिलता को समझना ग्लोबल दुनिया में आगे आने वाले 50 साल की कल्पना लेकर दिशा बनाना ।हाईड्रोकार्बन ,टेलीकम्यूनिकेशन ,इन्फ़्रास्ट्रक्चर को लेकर सरकार के टास्क फ़ोर्स के वो चैयरमेन रहे।अपने मंत्रालय में एक फ़ौजी जनरल जैसा वर्क कल्चर था उनके दफ़्तर में एकदम कीप साईलेंस ,सिर्फ़ काम की टू द पोईंट कम लफ़्ज़ों में बात व सभी को टाईम बाउंड काम।उनके दफ़्तर में कोई फ़ाईल 24 घंटे से अधिक पेंडिंग नहीं रह सकती उसका निस्तारण आवश्यक था।इस मुश्किल टास्क को पूरा करने के लिए अफ़सर पसीना पसीना हो जाते।कई माईल स्टोन तय किए पर कभी भी अपने मुँह से खुद के कामों को ना गिनाया ना तारीफ़ ही की।कोई दूसरा कहता तो एक ही शब्द था ‘ओ जसवंतसिंह नी करियों भई आ इण धरती रा गुण है ईश्वर करावे सब’।फिर गीता का श्लोक बोलते ओर कहते ‘अहंकारी लोग ये दावा करते कि मैंने मैंने किया हमारी करने की औक़ात ही कितनी है’।अकाल के वक्त टूर पर आए राजस्थान ,वित्त मंत्री थे गहलोत की पहली सरकार थी पत्रकारों ने गहलोत सरकार पर सवाल किया तो बोले ‘म्हे अठे गोरमेंट री खुड़ी खोतरण (अकारण कमी ढूँढना)खातर कोनी आयो सेंटर कंई मदद कर सके ऐ देखण आयो हूँ ‘’।हमारे सार्वजनिक जीवन से ये भाषा ही ग़ायब हो गई अब तो।उनको झूठ दिखावे नेताओं के तामझाम ओर क़ाफ़िला संस्कृति से नफ़रत थी पुलिस एस्कॉर्ट वालों को बुलाकर अक्सर कहते “थे क्यूं तेल बालो हो म्हने अठे कुण खावे “।कभी लालबत्ति लगी गाड़ी यूज नहीं की हूटर तो दूर ड्राईवर को होर्न ना बजाने के भी सख़्त निर्देश थे।कभी वोट के लिए कोई वादा नहीं ,कभी किसी को झूठा आश्वासन नहीं ,कभी खुद किसी काम का श्रैय न लेने का भाव ,गुणगान व चापलूसी को बिल्कुल हिक़ारत से देखते नारेबाज़ी हा हुल्लड़ को बिल्कुल सख़्ती से नापसंद करते।कई बार किसी नेता के आगमन पर नारेबाज़ी वग़ैरह होती तो मंच पर बैठे बैठे असहजता से कहते ‘ऐ क्यूं गैलायो करें’।गीता रामचरितमानस हरिरस के दोहे व श्लोक कंठस्थ थे भारी स्प्रिचुअल टेस्ट था बाला सतीजी के प्रति एकनिष्ठ आस्था।उनके जितना बुकिश लीडर भारत में शायद ही दूसरा हो ,रेयर किताबों से भरी लाईब्रेरी ,मोजार्ट व इंडियन क्लासिकल या पश्चिमी राजस्थान के भजन बहुत धीमी आवाज़ में अपनी किताबों से भरी छोटी सी ओफिस में सुनते रहते।जीवन में एक फ़ौजी अफ़सर जैसा अनुशासन ओर जुनून की हद तक वक्त की पाबंदी ।उनसे आप 10 बजे का समय लेकर 10 बजकर 1मिनट पर नहीं मिल सकते।उनकी लिखी दर्जनों किताबें ओर आर्टिकल उनके विधाव्यसन विधानुराग की गवाह है।वो व्यक्तिगत जीवन में घोर ट्रेडिशनल टिपिकल मालाणी मेन थे पर विचार ओर पोलिसी मेकिंग में अल्ट्रामोर्डन थे।फ़ौज मालाणी व अपने ननिहाल खूहड़ी के संस्कार व जीवन मूल्य एक स्टंच सनातनी धार्मिक ,स्वाभिमानी राजपूत इन सबसे उपर वो एकदम ट्रू सेंस में सच्चे भारतीय थे वो भारत के अब तक के बेहतरीन विदेश मंत्री रहे है।उनके गुणों ओर व्यक्तित्व की छाप जीवन से कभी जा नहीं सकती क्यूँकि उनके जैसा दूसरा कोई दिखता नहीं।जसवंतसिंहजी की चौथी पुण्यतिथि पर सादर श्रधासुमन ।सादर -राजेंद्रसिंह भिंयाड़ #JaswantSingh
कंधार का नीलकंठ..
IC814 मामला, किसी वेब सीरिज से चर्चा में है। तब घुटना टेक नेतृत्व, और उस कायर कैबिनेट में एक बहादुर ऐसा था, जिसकी बात होनी चाहिए।
जसवंत सिंह।
उस तस्वीर में भारत का प्रतिनिधि, जिसमें हमारी हुकूमत, अपनी पगड़ी चंद आतंकियों के कदमों में रख रही थी।
जहर का ये घूंट पीने के लिए, जसवंत ने नीलकंठ बनना स्वीकार किया।
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नई सहस्त्राब्दी करवट बदलने को थी।
जसवंत घर मे नए मेहमान का स्वागत कर रहे थे। पोती हुई थी। परम्परानुसार उसका मुंह मीठा कराने घर पहुंचे। वहीं खबर मिली-
IC-814 हाईजैक हो गया है।
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जहाज अमृतसर रुका, फ्यूल लिया। उड़ गया। मामला तो तभी हाथ से निकल गया था। सांप सूंघी हुई सरकार, अब टीवी पर गाल बजा रही थी।
जहाज लाहौर पहुंचा। वहां उतरने की इजाजत न मिली। दुबई को मुड़ा। फ्यूल खत्म हो रहा था, भारत ने किसी तरह दुबई से इजाजत ली।
दुबई के दूसरे, कम व्यस्त एयरपोर्ट पर जहाज देर रात उतरा। अलग खड़ा रहा।
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आजकल प्रधानसेवक के अभिन्न मित्र बने फिरते, शहजादे MBZ ने तब भारत को न नेगोशिएट करने की इजाजत दी,
न ऑपरेशन करने की।
अलबत्ता CNN को इजाजत मिली, जो रातभर भारत की लुटती इज्जत लाइव दिखाता रहा।
एक तिहाई यात्री और एक लाश.. एक कत्याल नामक यात्री की, दुबई में फ्यूल के बदले उतार दी गयी।
अलसुबह जहाज ने दुबई छोड़ा।
कन्धार पहुंचा।
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दिशाहीन नेतृत्व, दुबई की फुटेज और मीडीया के फैलाये पैनिक के बीच, सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यात्रियों के रिश्तेदार घुस गए।
आज "गोलियों से मां भारती की आरती" गाने वाला जंगजू मध्यवर्ग, तब हांफते हुए गुहार लगा रहा था..
ख्वाबों में बाबर से लड़ने वाली जनता, मौका आया तो तालिबान और 5 हाईजैकर्स के सामने देश के घुटने टेकने में कोई बुराई नही देख रही थी।
"लेट देम टेक व्हाट दे वांट"
मामला उनके बच्चों का जो था।
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तो नेगोशियशन चले।
हाईजैकर्स ने, भारत की जेलों में बंद 30 आतंकी मांगे। अंततः 3 पर सौदा हुआ। बड़ी धनराशि देने की भी कानाफूसी थी।
पाकिस्तानी मौलाना, मसूद अजहर, जो कश्मीर में आपस मे झगड़ रही तंजीमो के बीच सुलह कराने भेजा गया था। उसका भाई ही खुद प्रमुख हाईजैकर था। हाईजैक उसी के लिए हुआ था।
उमर शेख, इंटनेशनल टेरेरिस्ट था। पाकिस्तानी एस्टेब्लिशमेंट में उसके ऊंचे सम्पर्क थे। शायद उसने भी अपहर्ताओं को धन दिया। आगे वह डेनियल पर्ल का मर्डर करने वाला था। 9/11 वर्ल्ड ट्रेड हमले में केंद्रीय भूमिका रही।
दो पाकिस्तानी के बाद तीसरा एक लोकल कश्मीरी नाम लेना मजबूरी थी। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मुश्ताक अहमद जरगर को फाइनल किया।
जरगर, वही आदमी, जो पहले भी रुबाइया सईद के बदले, एक बार छोड़ा जा चुका था।
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तो 3 आतंकी और भारत की इज्जत एक हवाई जहाज में लादकर कन्धार में सरेंडर की जानी थी।
यह अप्रिय काम करने वाला, जीवन भर के लिए अपमानित होने वाला था।
फैसला जाहिर है, पूरी कैबिनेट का था।
मगर शर्म तारी थी। बाद में लौह पुरुष, उप प्रधानमंत्री, नम्बर 2 आडवाणी तो इस फैसले में सहमति से ही ही पल्ला झाड़ लेने वाले थे।
राष्ट्रीय अपमान का जहर पीने को यह राजस्थानी वीर आगे आया।
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दो जोड़ी कोट,एक गीता और एक रुद्राक्ष बैग में डालकर जसवंत कन्धार पहुंचे। शर्मनाक तस्वीरों का हिस्सा बने।
अपने कर्मों से मुंह छुपा कर पल्ला झाड़ने वालो के गैंग में, यह बहादुरी रेयर है।
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31 दिसम्बर।
7 दिन विलंब से फ्लाइट अपने गंतव्य, पालम पर उतरी। जसवंत उसी जहाज में आये।
सबसे पहले उतरे।
और सीढियों के नीचे तब तक खड़े रहे, जब तक आखरी यात्री ने सुरक्षित भारत भूमि पर कदम न रख दिये।
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जसवंत वह, जिन्होंने अटल युग मे अटल को ताकत दी।
घटिया धार्मिक राजनीति से दूर,
जिम्मेदार, स्वत्रन्त्र चिंतक, डाउन टू अर्थ,
सीरियस एडमिनिस्ट्रेटर जसवंत।
कारगिल, ऑपरेशन पराक्रम, बम, बस, अमेरिकी प्रतिबन्ध, संसद पर आतंकी हमले और IC-814 के दौर में..
बदनामियाँ इनके खाते में आईं,
उपलब्धि अटल के।
इसलिए ये नीलकंठ हैं।
सितंबर 2020 में वह गोलोक वासी हुए।
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जसवंत के पुत्र मानवेन्द्र ने एक आर्टिकल में लिखा..
2016-17 के दौरान वे पिता के साथ NDTV की एक बहस देख रहे थे। इस दौरान अपहृत जहाज में रही एक महिला, स्टूडियो में दर्शकों के बीच थी।
बहस में बार बार कूदकर, बड़ी बड़ी ताकतवर बातें कर रही थी। उसका कहना था कि देश ने आतंकियों को छोड़कर गलत किया।
भली अंग्रेजी बोलकर उसने खूब तालियां लूटीं।
तो टीवी पर बहस देखते हुए जसवंत ने मानवेन्द्र को बताया-
यह लेडी उस जहाज में सबसे ज्यादा हिस्टिरिकल (बदहवास) थी।
जब मैं कंधार में खड़े जहाज पर पहुचा तो यह मेरे सीने से आकर लग गयी और कहा..
आपने इतनी देर क्यो लगा दी?
A beautiful example of India's unity in diversity.
A Muslim family celebrates Janmashtami by dressing their child as Krishna. This is the spirit of our India. 🇮🇳 ❤️
#KrishnaJanamashtami
🎥 : @PunjabLocals
Deaths by suicide of our youth can’t be allowed to become a pandemic. We are literally killing our youth, stop glamorising individual academic success, it kills. #KotaSuicides
-ट्रेन नंबर 19010/19009 बाड़मेर-बांद्रा टर्मिनस-बाड़मेर
-ट्रेन नंबर 12998/12997 बाड़मेर-बांद्रा टर्मिनस-बाड़मेर हमसफर
उपरोक्त दोनों ट्रेन बाड़मेर से मुम्बई रूट के लिए शुरू हो चुकी है।