बांग्लादेश में मजहबी भीड़ द्वारा हिंदू महिला टीचर को लातों से कैसे मारा जाता है |
हिंदुओं हो सके तो इस वीडियो को सेकुलर हिंदू महिलाओं तक पहुंचा देना |
जिनको लव जिहाद के प्रति जागरूक करने वाले हिंदू नफरती लगते हैं और नाम बदल कर हिंदू महिलाओं को फंसाने वाले विक्टिम | 😡😡
प्रिय एसोसिएशन वालों,
पुनः एक बात कहना चाहेंगे—
जो ईमानदार हैं, उनको हमारा नमस्कार है,
चाहे वह चपरासी, सिपाही, अधिकारी या जमादार है.
लेकिन जो करते भ्रष्टाचार हैं,
उनसे होगी लड़ाई आर पार है..
एसोसिएशन वालों, प्रेस कॉन्फ्रेंस-कॉन्फ्रेंस खेल रहे हो आप, चलो ठीक है, पर कम से कम तुम एक ऐसे विधायक के खिलाफ कॉन्फ्रेंस कर रहे हो, जो विधायकी दांव पर लेकर चलता है, तो कम से कम कॉन्फ्रेंस में जो पदाधिकारियों को बैठा रहे हो मीडिया के सामने, उनका चरित्र साफ-सुथरा होना चाहिए।
ईमानदार छवि के लोगों को कॉन्फ्रेंस के लिए बैठाओ, लेकिन तुमने बोकारो जिला में जिन अधिकारियों को कॉन्फ्रेंस कराया, उनमें से आधे के अकाउंट सीआईडी ने फ्रीज कर दिया है ट्रेजरी घोटाले के मामले में।
एक अधिकारी ने अपने बेटे की शादी में एक महिला की हत्या की है।
एक अधिकारी ने बालीडीह में आदिवासी का जमीन हड़पा है।
एक अधिकारी ने एक रेलवे के पदाधिकारी की अर्धांगिनी को जबरन अपना बना लिया है।
एक अधिकारी ने दो किलो मांस के लिए खून-खराबा किया है।
और सबसे खास बात, जमशेदपुर का एक केस आया है प्रकाश में। अगर वो केस सबके सामने आ गया ना तो तुम्हारी पाँव तले जमीन खिसक जाएगी, बस इतना जान लो पॉक्सो एक्ट नार्को टेस्ट ।
तुम कॉन्फ्रेंस करो हम डेटा इकट्ठा कर रहे हैं।
मेरे लाइव आने या प्रेस कॉन्फ़्रेंस का इंतज़ार कीजिए।
पुनः कर्तव्यनिष्ठ निष्ठावान कर्मचारियों-अधिकारियों को नमस्कार जोहार।
इन्होंने ही कहा था न सीडी 💿 ब्लैंक्स है.. ये आदमी पूरे सिस्टम को निगल जाना चाहता था. CGL मामले में इन्होंने किसी फ़िल्म के एक्टर से कम नाटक नहीं किया. ऐसे-ऐसे कई फ़िल्मों में काम करने वाले को झारखंड में शरीफ सिविल सर्वेंट कहा जाता है, जिनकी फी 50 करोड़ से पार है. इतना तो शाहरुख-सलमान, अक्षय कुमार और अमिताभ का भी फी नहीं जितना ये एक परीक्षा से उठा लेते हैं. और फिर चोरी के बाद ये सफ़ाई देने का शानदार अभिनय करते हैं. अपने चेहरे, अपनी आँखो,आवाज में नरमी, छात्रों के साथ इमोशंस का ऐसा मिश्रण और हाव -भाव को इस तरह पेश करते हैं जैसे मानो JSSC एक पवित्र मंदिर 🛕 हो. अरे भाई यहाँ राम मंदिर जैसे जगह को तो लोगों ने छोड़ा नहीं. तो फिर JSSC और JPSC जैसी संस्था में क्या ही पारदर्शिता साबित करोगे तुम. यहाँ तो चुटकी में पूरा सिस्टम बेच सकते हैं ये लोग. मुझे अच्छे से याद है JSSC CGL परीक्षा रद्द करने को लेकर छात्रों के भीड़ को इन्होंने कैसे मीठा-मीठा उलझाया था, फिर बाद में आरोपों को झूठ साबित कर दिया, मुझे यह भी याद है कि PGT और सहायक आचार्य में भी इकट्ठे छात्रों को भी अकेले समझा के भेज दिया. उन्हें दिलासा दिला के सुला दिया. मुझे याद है हमने इस मामले में एक मीडिया बाइट माँगा था तो इन्होंने गब्बर सिंह के अंदाज़ में मना कर दिया था, इसलिये ऐसा लगता है जैसे यह एक महान एक्टर हैं. ऊपर से झारखंड में तो सरकार ने माइयाँ सम्मान और भेड़ बकरी पालो योजना चला ही रखा है. अब मुझे और यकीन हो गया है कि झारखंड में आज तक एक भी प्रतियोगी परीक्षा पारदर्शी नहीं रही होगी. एकदम 💯 परीक्षाओं में सेटिंग और धांधली हुई है इसलिये इस परंपरा को ख़त्म करने के लिए इसके सबसे जिम्मेदार पहलू को शख्त सजा जरूरी है. ऐसे IAS अधिकारियों को सलाखों के पीछे होनी चाहिए, ताकि सबक मिले.
#cbiforjpscjssc
आज रांची के मोरहाबादी में आदिवासी... सॉरी धर्मान्तरित ईसाइयों की एक रैली हुई, जिसमें परिसीमन को लेकर बड़े बड़े दावे किए गए। कल से ही ईसाई धर्मगुरुओं के कई पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हैं, जो इस बात की तस्दीक करते हैं।
सबसे पहले तो कांग्रेस को परिसीमन के मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि इनके राज (2008) में पड़ोसी राज्य ओडिशा के मयूरभंज जिले में अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 9 से घटा कर 7 कर दी गईं। छत्तीसगढ़ में ST सीटों की संख्या 34 से घट कर 29 रह गईं।
जिस कांग्रेस ने 1967 में बाबा कार्तिक उराँव जी द्वारा लाए गये डीलिस्टिंग बिल को ठंडे बस्ते में डाल कर आदिवासी समाज का अस्तित्व ही संकट में डाल दिया, जिन्होंने 1961 में आदिवासी धर्म कोड हटाया, जिन्होंने दर्जनों बार आदिवासियों पर गोलियाँ चलवाई, वे किस मुँह से स्वयं को आदिवासियों के हितैषी बताते हैं?
आप वास्तव में उन ईसाइयों के हितैषी हैं, जो आदिवासी समाज को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों में अतिक्रमण करते जा रहे हैं। आदिवासियों के लिए आरक्षित 90% से ज्यादा सरकारी नौकरियों पर इन्हीं का कब्जा है। सिमडेगा, पाकुड़ एवं साहेबगंज समेत कई जिलों में हमारे जाहेरस्थान तथा सरना स्थलों पर अगर ताला लग गया है, तो उसके जिम्मेदार भी यही लोग हैं।
वैसे तो परिसीमन से पहले जनगणना एवं डेमोग्राफी समेत कई कारकों का ध्यान रखा जाता है, लेकिन हमारा स्पष्ट तौर पर मानना है कि परिसीमन के बाद शेड्यूल एरिया में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़नी चाहिए। आदिवासी समाज के हितों को लेकर केन्द्र सरकार गंभीर है और मुझे यकीन है कि हमारे समाज के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
विधानसभा सदस्य और थाना प्रभारी के बीच हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन से लेकर तरह-तरह के बयान सामने आ रहे हैं। अच्छी बात है कि भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा बनी रहनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?
क्या पुलिस एसोसिएशन ने उस गालीबाज दारोग़ा के व्यवहार पर कारवाई की बात तो दूर, कभी निंदा या आम आदमी के साथ गाली की भाषा में बात करने को लेकर कभी किसी पुलिस वाले को नसीहत दी? क्या पुलिस को यह पता नहीं है कि बिना किसी की सहमति के उससे बातचीत को रिकार्ड कर वायरल करना किसी की निजता के हनन का अपराधिक काम है? क्या यह निजता हनन का कानून सिर्फ आमलोगों के लिये ही बना है, पुलिस के लिये नही? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जबाब देना जरूरी है।
कुछ महीने पहले बोकारो जिले के चास थाना प्रभारी का कथित गाली-गलौज वाला ऑडियो वायरल हुआ था। हमने सरकार से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग भी की थी। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने ऐसे गालीबाज पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दिया।
थानों में आम जनता के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल, फोन पर गाली-गलौज और दुर्व्यवहार की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। आज अगर जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच ऐसी स्थिति पैदा हो रही है, तो इसके लिए राज्य सरकार की नीति और संरक्षण भी जिम्मेदार है।
अगर आम जनता द्वारा गाली देना अपराध है, तो पुलिस को ऐसा कौन-सा विशेषाधिकार मिला है कि वह जनता को अपशब्द कहे? यह विशेषाधिकार आखिर किसने दिया?
पुलिस को सबसे पहले जनता से बात करने का तरीका और शिष्टाचार सीखना होगा। सरकार को भी ऐसे मामलों में केवल निलंबन तक सीमित न रहकर कठोर कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज कराना सुनिश्चित करना चाहिए। तभी व्यवस्था में वास्तविक सुधार आएगा।
@HemantSorenJMM@JharkhandPolice
जब नेता ज़मीन से उठकर शीर्ष पर पहुंचता है, तो वह संगठन की रग-रग से वाकिफ होता है। 7 बार महराजगंज से जीतकर संसद पहुँचने और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के रूप में सफल कार्यकाल देने वाले पंकज चौधरी जी कार्यकर्ताओं के सच्चे साथी हैं।
बिना किसी सुरक्षा तामझाम के कार्यकर्ताओं के बीच रहना और जनता की बात सुनना ही उनकी पहचान है।
मेरिट से परीक्षा पास करने का भ्रम...वाह रे सिस्टम!
जब एक ही राज्य और एक ही जिले से 150+ लोग झमाझम सेलेक्ट हो जाएं, तो अंधी आँखें भी चीख-चीख कर सच बता देंगी कि ‘योग्यता’ नहीं, यहाँ ‘सौदा’ हुआ है।
बिक चुकी डिग्रियाँ और नीलाम होते भविष्य,बस ‘सफलता’ का नया ढोंग है! @HemantSorenJMM
अपने बेरोजगार, बाहरियों की बहार!!
क्या लगता है, स्थानीय युवाओं को जब बिना शुल्क के नौकरी नहीं मिल रही, तो ये सब काबिलियत के दम पर आए होंगे??
Note: आज प्रोटेस्ट का 22वां दिन है और कई छात्र भूख हड़ताल पर अड़े हुए हैं।
#JharkhandProtest