@ErDurgeshPande7 ये दलितों की आवाज वहाँ उठाएगा सिर्फ जहाँ सवर्णो का नाम आएगा बाकि जगह है सांप सूंघ जाता है दलित शिरोमणि जी का यह बिल्कुल सही है इसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है
पंडित नेहरू ही हिंदुस्तान के असली मसीहा हैं
राजतंत्र खत्म किया,लोकतंत्र खड़ा किया।
आम आदमी को ज़मींदारों की गुलामी से आज़ाद कराया
रियासतों को खत्म कर राजाओं को रंक बनाया,
ये देश जिस आज़ादी की सांस लेता है, उसकी बुनियाद चाचा नेहरू ने रखी थी
ब्राह्मण श्रेष्ठ पंडित नेहरू अमर रहें🔥
ब्राह्मण बेटियों के अपमान पर कांग्रेस विधायक व उपनेता प्रतिपक्ष @HemantKatareMP
जी ने जो कहा वे धन्यवाद के पात्र है वो ही हमें समाज के नेताओ से पूछना चाइए? सभी ब्राह्मण बंधु जरूर पढ़े 🙏 रिट्वीट अनिवार्य
@neha_laldas @neetusi86329772
@Ankur_mishra32@Sharma
बड़ी खबर IAS वर्मा के खिलाफ प्रयागराज में मुकदमा दर्ज ।
ब्रह्मदेव जागरण मंच महिलाओं के सम्मान और सामाजिक समरसता के लिए प्रतिबद��ध है अपमानजनक बयान बाजी करने वाले रिटायर्ड IAS संतोष वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज ।
@Adv_Anil_Mishra
श्रीमान @CMOfficeUP जी
आज पांच दिन गुजर जाने के बाद भी शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया गया है.............
अवैध वारिस प्रमाण पत्र का बड़ा खेल! मिल्कीपुर न्यायिक तहसीलदार पर गंभीर आरोप, विधवा बोली—“मेरे जिंदा होते मेरे हक पर डाका डाल दिया!”
#अयोध्या : मिल्कीपुर तहसील में अवैध वारिस प्रमाण पत्र जारी करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्राम पंचायत रामपुर जोहन पूरे मंनशा उपाध्याय का पुरवा निवासी प्रेम कुमारी, पत्नी स���वर्गीय सुनील कुमार उपाध्याय ने डीएम अयोध्या को सनसनीखेज आरोपों से भरा प्रार्थना पत्र सौंपकर तहसील प्रशासन में खलबली मचा दी है। पीड़िता का कहना है कि उसके पति की मौत के बाद वह अकेली अपने परिवार और अधिकारों के लिए लड़ रही है, फिर भी न्यायिक तहसीलदार ने उसकी आंखों के सामने उसके हक पर “अवैध तरीके से कब्जा” तक करा दिया।
प्रेम कुमारी का आरोप है कि 03 अगस्त 2021 को पति की मृत्यु के बाद वह तमाम सरकारी द���्तावेजों—आधार कार्ड, राशन कार्ड, पेंशन, परिवार रजिस्टर, मृत्यु प्रमाण पत्र—सभी में विधवा पत्नी के रूप में दर्ज है। लेकिन इसके बावजूद न्यायिक तहसीलदार मिल्कीपुर ने 11 नवंबर 2025 को उसकी अनुपस्थिति में उसकी ही पति की संपत्ति का वारिस उसके देवर के नाम कर दिया।
पीड़िता ने इसे “हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 का खुला उल्लंघन” बताते हुए कहा ��ि यह फैसला न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि उसके वैधानिक अधिकारों की सीधी हत्या है। उसने आरोप लगाया कि पूरे मामले में “भारी भ्रष्टाचार और मिलीभगत की बू” आती है।
पीड़िता प्रेम कुमारी ने शिकायत में लिखा है—“मैं जिंदा हूं, विधवा हूं, और सभी कागजों में पहली श्रेणी की वारिस हूं, फिर भी मेरे हक को मेरे ही देवर के नाम कर दिया गया। यह मेरे अधिकारों पर डकैती है।”
प्रेम कुमारी का यह पत्र प्रशासनिक गलियार���ं में चर्चाओं का विषय बना हुआ है। उसने मांग की है कि—
● अवैध वारिस आदेश की उच्च स्तरीय जांच हो।
● संबंधित अधिकारियों को शासन स्तर पर तलब किया जाए।
● जांच पूरी होने तक संपत्ति पर रोक लगे।
● दोषी तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई हो।
● पति की संपत्ति उसे—एकमात्र वैधानिक वारिस—के नाम दर्ज कराई जाए।
दस्तावेजों सहित लगाए गए इन आरोपों ने पूरे तहसील प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। अब दे��ना यह है कि जिला प्रशासन इस “वारिस प्रमाण पत्र घोटाले” पर क्या कदम उठाता है?
संज्ञानार्थ
@dmayodhya @ayodhya_police @igrangeayodhya @LucknowDivision @CMOfficeUP @DyCMGoUP @ChiefSecyUP @DyCMofficeBP@UPGovt @homeupgov @myogiadityanath
गिरफ्तारी तक रिपोस्ट रुकना नहीं चाहिए भाइयों
नाम 👉अतुल कटियार
पता 👉लखीमपुर खेरी उप्र
अपराध 👉 सोशल मिडिया पर ब्रा���्मण समाज की महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करना
आदरणीय @kheripolice कृपया संज्ञान लें अतुल कटियार नाम का व्यक्ति सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहा है..!!
@Uppolice @112UttarPradesh @cyberabadpolice @Cyberdost
@myogiadityanath @myogioffice
अब चुप रहना अन्याय को स्वीकारना होगा !
सामान्य वर्ग को अपनी ये लड़ाई ख़ुद लड़नी होगी !
EWS क्रांति “मशाल यात्रा “ इंदौर 07/12/25
श्री राजपूत करणी सेना (कालवी विचारधारा )
टीम अनुराग प्रताप सिंह राघव
बृज बिहारी प्रसाद कौन था?
जिसकी हत्या में बाहुबली मुन्ना शुक्ला जेल में है?
बृज बिहारी का जन्म पूर्वी चंपारण जिले में हुआ, 1990 के दशक में ल��लू यादव से जुड़कर बिहार की राजनीति में एंट्री ली
कुछ ही समय में बृज बिहारी, लालू यादव के करीबी सहयोगी के रूप में उभर कर सामने आए, बृज बिहारी 1990 से 95 तक ग्रामीण विकास मंत्री रहे, 1995 में राबड़ी सरकार में उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया
1990 का दशक बिहार में जातीय गैंगवार का था, बृज बिहारी की हत्या की जड़ें भूमिहार जाति के बाहुबली छोटन शुक्ला से जुड़ी थीं, जो 1994 में शुरू हुई
दिसंबर 1994 में मुजफ्फरपुर में छोटन शुक्ला समेत 5 लोगों की सरेआम हत्या कर दी गई, बृज बिहारी प्रसाद ने यह साजिश रची, छोटन शुक्ला की हत्या क�� बाद उनके भाई भुटकुन शुक्ला ने गैंग की कमान संभाली और बृज बिहारी के करीबी ओमकार सिंह को ठोक दिया
बदले की आग में भुटकुन शुक्ला की भी हत्या कर दी गई, इसका इल्जाम फिर बृज बिहारी पर लगा, इन दो हत्याओं के बाद उनके भाई मुन्ना शुक्ला ने बदला लेने की ठान ली
बदले की आग में जल रहे मुन्ना शुक्ला ने इंतकाम लेने के लिए यूपी के बाहुबली श्रीप्रकाश शुक्ला से हाथ मिलाया, श्रीप्रकाश शुक्ला पूर्वांचल के 'डॉन' थे
1998 की शुरुआत में बृज बिहारी इंजीनियरिंग एडमिशन (BECEE) घोटाले में गिरफ्तार हुए, जून में उनके सीने में दर्द के कारण पटना के IGIMS में भर्ती कराया गया, उन्हें अपनी जान का खतरा था, इसलिए उनकी सुरक्षा में कई कमांडो तैनात थे
13 जून 1998 की शाम बृज बिहारी IGIMS परिसर में अपने अंगरक्षकों के साथ टहल रहे थे तभी लाल बत्ती वाली एक एंबेसडर कार और एक टाटा सूमो वहां रुकी
कार से श्रीप्रकाश शुक्ला और कई हथियारबंद लोग बाहर ���िकले, उन्होंने AK-47 से बृज बिहारी प्रसाद पर गोलियों की बौछार कर दी, इसमें बृज बिहारी और उसरे कई बॉडीगार्ड मौके पर ही मारे गएं
इस हत्याकांड ने पूरे देश को सकते में डाल दिया और लालू-राबड़ी सरकार पर 'जंगलराज' का आरोप लगा
दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोधी पठान ने रीवा के बघेल राजा से पुत्री मांगी थी रीवा के राजा बहुत छोटे राज्य के राजा थे फिर भी उन्होंने पुत्री नहीं दिया सिकंदर लोदी अपनी पठान तुर्क गजनी खिलजी सेना लेकर रीवा पर आक्रमण कर दिया
2 महीने युद्ध हुआ था साथ में जौहर की भी तैयारी होने लगी
पर उस समय ग्वालियर के तोमर बहुत ताकतवर थे जब उन्हें पता लगा कि रीवा में जौहर की तैयारी हो रही है तो वह अपनी सेना लेकर बघेल राजा के सहायता में आए और पठानों की सेना से युद्ध हुआ पठान सेना हार के भाग गई
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