आप अपने बच्चों और घर की महिलाओं को ऐसे व्यक्तियों की कथा में जाने से रोकें। कथा ऐसे विद्वानों की सुनिए जो आपको ईश्वर की भक्ति करना सिखाएं।
अनिरुद्धाचार्य, भगवान की कथा के दौरान यह सब कहते हैं।
70 में क्या जोड़ें की 17 हो जाए?
स्त्री के स्तन ज़मीन से टच होने से पृथ्वी मां का भार बढ़ जाता है।
घी और शहद किसी को एक साथ पिला दो तो वह मर जाएगा
आम का रस और पेप्सी कोका कोला किसी को एक साथ पिला दो तो वह मर जाएगा
संसार में ऐसा कोई नहीं है जिसके नाम में राम न हो
यह बेतुकी और लॉजिकलेस बातों को सुनकर अपने दिमाग को कूड़ा न बनाएं। यदि आपको ईश्वर की कथा सुननी है तो कई ऐसे ऋषि संत और शास्त्री हैं जो आपको भगवान के बारे में बेहतर ढंग से बताते हैं।
अनिरुद्धाचार्य जैसे ढोंगियों और लॉजिकलेस व्यक्तियों से दूर रहना ही ठीक है।
मुझे लगता है,की भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है, जहां देशद्रोही ताकत आतंकवादी और खालिस्तानी आतंकवादी को भी देश की जनता जिताकर सर्वोच्च सदन संसद में भेजती है ।
बिहार के सुशासन बाबू को अब अपने किए गए विकास कार्य और पार्टी कार्यकर्ताओं पर विश्वास नही रहा इसलिए राजद आचरण को अपनाकर अपराधियो की मदद से लोकसभा चुनाव जीतना चाहते है । देख रहे हो न विनोद ?
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देशभर के हमारे आदिवासी भाई-बहनों की सेवा और उनका कल्याण भाजपा की कार्य-संस्कृति का हिस्सा है। बीते 10 वर्षों में जनजातीय समुदायों का अभूतपूर्व विकास हुआ है।
TMC has betrayed West Bengal. The people are speaking in loud and clear voice – they want BJP. Addressing a massive rally in Arambagh. https://t.co/v09uhe7c1y
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पवित्र धरती झारखंड का चहुंमुखी विकास भाजपा की प्राथमिकता है। धनबाद में विशाल जनसभा को संबोधित कर रहा हूं। https://t.co/2i6jex2k5F
@NitishKumar माननीय मुख्यमंत्री महोदय यह मेरा व्यक्तिगत विचार है। जो आपके सामने व्यक्त कर आपनी पीड़ा को कम करना चाहते है। और विचार करने का आग्रह करते है। महोदय आज आपके रूप मे बिहार की राजनीति मे टिकट बाँटने बाले वर्ग है।लेकिन भविष्य को लेकर चिंता जाहिर करता हु। आगे भी बना रहे
@PMOIndia माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी भारत सरकार महोदय धार्मिक कटटरता की लड़ाई नही है । पुनः कलयुग मे रावण मानसिकता और राम मानसिकता की संघर्ष है आप से आग्रह है। की आम जन आप के साथ है। आप स्वतंत्र निर्णय ले । विश्वगुरु के रूप मे रौशन पटेल ।
फिरोज खान के पोता कांग्रेस नेता राहुल खान बार बार भारतीय सभ्यता संस्कृति को विदेशो मे अपमानित कर रहा है भारत और भारतबासी कबतक वर्दास्त करेगा।इस विदेशी अपमान को
भारत के शीक्षीत युवा अध्ययन करे।मोदी और भा ज पा को आधार बनाकर पूरे भारत को गली दे रहा है। देश न्याय करे।
भारत चांद के दक्षीणी ध्रुव पर कदम रखकर् विश्व गुरु बनने की ओर पहला चरण पार कर चुका।अब पुनः दुनिया को मानवता का नेतृत्व और व्रह्माण्ड का सही सही ज्ञान देने का जिम्मेबारी नभाएगी। जय हिंद, वन्देमातरम ।
@RCP_Singh बिहार महागठबंधन और नीतीश बाबू का यह सुनूयोजित षंडयंत्र् है।की बिहार की जनता को पुनः जंगलराज और 2005 की अपनी सरकार की सुशासन दोनो की छवि याद दिलाकर अपने पछ मे सहानुभूति बटोर सके। जो यह घातक पहल है।
देश के आम नागरिक और वोटर के प्रति इस तरह के मानसिकता रखने बाले कांग्रेस और कांग्रेस के नेतागण के दिमागी दिवालियापन को दर्शाता है। ऐसे ही व्यान का परिणाम है। की जँहा हारते है।वहा ई वी एम मे गडवडी नजर आता है।पप्पू के शिष्य है। प्रभाव तो दिखेगा ही ।
हृदय सम्राट दार्शनिक पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय अटलबिहारी बाजपेयी जी को भारत देश के साथ साथ सम्पूर्ण विश्व श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है।ऐसे रत्न पुनः देश को प्राप्त नही होगा ।अटल जी अमर रहे ।
एक प्रश्न का जानकारी जानना चाहते है। की देश मे जिस तरह ब्यापक स्तर पर देश के सभी वर्ग एक होकर आजादी की लड़ाई लड़ी । और देश आजाद हुआ।पर 600 वर्ष मुगलो से देश गुलाम रहा। आजादी के लिए देश के लोग क्यो नही आवाज उठाया या व्यापक लड़ाई लड़ी ।
स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
“15 अगस्त, 1947 को हमको स्वतंत्रता मिली। अंग्रेजों से हमने अपने देश को अपने हाथ में ले लिया। यह हमारे लिए गौरव का क्षण है और हमारे लिए संकल्प का भी क्षण है। यह यकायक नहीं हुआ। हमने लिया, किसी की कृपा से नहीं मिला, लंबा संघर्ष करने के बाद मिला।
वो तंत्र तो हमको मिल गया, लेकिन अब उसको स्व-तंत्र बनाना है। स्व-तंत्र होना यानि सब मामलों में स्व-निर्भर होना पड़ता है। हमारा राष्ट्रध्वज बताता है, हमको कैसा देश गढ़ना है। वो देश दुनिया में बड़ा होगा तो क्या होगा, वो अन्य लोगों पर राज नहीं करेगा, डंडा नहीं चलाएगा। वो तो अपने त्याग से दुनिया को गढ़ेगा, दुनिया के हित के लिए त्याग करेगा। हम यह सब समाज की, मानवता की, पर्यावरण की, सृष्टि की धारणा का धर्म पालन करके करेंगे।
इसके लिए हमको परिश्रम करना है। आने वाले दिनों में, ये नहीं पूछना कि मुझे क्या मिलेगा, मेरा देश मुझे क्या देता है, मेरा समाज मुझे क्या देता है? बल्कि, मैं अपने देश को क्या दे रहा हूँ, मैं अपने समाज को क्या दे रहा हूँ? मेरी उन्नति में मेरे समाज की, देश की उन्नति हो रही कि नहीं? इसका विचार करके ही अपना जीवन जिऊं, इसकी आवश्यकता है।”
- डॉ. मोहनराव भागवत, सरसंघचालक
(15 अगस्त, 2022)