अग्निपथ - नौजवानों ने नकारा
कृषि कानून - किसानों ने नकारा
नोटबंदी - अर्थशास्त्रियों ने नकारा
GST - व्यापारियों ने नकारा
देश की जनता क्या चाहती है, ये बात प्रधानमंत्री नहीं समझते क्यूंकि उन्हें अपने ‘मित्रों’ की आवाज़ के अलावा कुछ सुनाई नहीं देता।
Reservation Bachao Aandolan 👊
देश के ओबीसी, दलित, आदिवासी, समाज के हितों की रक्षा के लिए समर्पित।
हम बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों से हमारे आरक्षण की रक्षा की मांग करतें हैं।
आरक्षण हटाओ आंदोलन से सवर्णों को दूरी बनानी चाहिए क्योंकि आरक्षण की व्यवस्था थी है और रहेगी आप ज्यादा विरोध करेंगे तो आपके खिलाफ सिर्फ नफरत बढ़ेगा और इस से सिर्फ नुकसान होगा वैसे भी सवर्ण आज आबादी से तीन से 4 गुना हिस्सेदारी लिए हुए है तो सवर्णों को थोड़ी नैतिकता दिखानी चाहिए
कल तक 'Reservation Hatao Andolan' इंस्टाग्राम हैंडल पर सिर्फ़ 50 हज़ार फॉलोवर्स थे।
आज फॉलोवर्स की संख्या 800K हो गई है
1 घंटे बाद देखना 1M से ज्यादा हो जाएगी।
क्या नए आंदोलन को शुरुआत होने वाली है?
जो लोग कहते हैं कि
"देश को आरक्षण ने बर्बाद कर दिया" उनसे मेरा यह एक सवाल है
खेलों में तो आरक्षण नहीं है फिर क्यों हम ओलंपिक खेलों में एक भी Gold Medal जीतने को तरस रहे हैं?
मेरिट का रोना रोने वाले दरअसल आरक्षण के पीछे अपनी नाकामयाबियों को छुपाते हैं😏
#Reservation
FIFA में की आरक्षण नहीं, फिर भी 140 करोड़ का देश क्वालीफाई भी नहीं कर पाता...
👉मेरिट सार....
मिडिया में कोई आरक्षण नहीं..सारे सवर्ण भरे पड़े है....फिर भी 193 देशों में 170 रैंकिंग है..
👉मेरिट सार...
IIT Kanpur has 257 Professors.
OBC: 3 | SC: 0 | ST: 0
Is this what “merit” looks like?
Instead of questioning this shocking lack of representation, Brahminical forces demand an end to reservations.
Reservations exist because exclusion exists.
Representation is justice. Equality cannot exist without inclusion. @EduMinOfIndia@PMOIndia
IIT Kanpur has 257 Professors.
OBC: 3 | SC: 0 | ST: 0
Is this what “merit” looks like?
Instead of questioning this shocking lack of representation, Brahminical forces demand an end to reservations.
Reservations exist because exclusion exists.
Representation is justice. Equality cannot exist without inclusion. @EduMinOfIndia@PMOIndia
मेडिकल कॉलेज में फेल ऐसे भी होते है।
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में 25 दलित छात्रों को कई बार फेल कर दिया गया। छात्रों ने जब आयोग का दरवाजा खटखटाया, तो जांच में नीचता सिद्ध हुई।मेडिकल कॉलेज के डॉ. वीके शर्मा, डॉ. जय श्री भट्टाचार्या, डीन डॉ. राज गुप्ता और डॉ. शोभा दास को छात्रों को जबरन फेल करने के मामले में दोषी पाया गया है।इन लोगो ने बाकायदा छात्र की जाति देखकर टैगिंग कर रखे थे, किसको फेल करना है। ये तो एक दो मामले है जो सामने आ गए।
कॉलेज और शिक्षा संस्थानों के अंदर जातिवाद मंदिर में चोरी जैसा है, जैसे मंदिर में चोरी लगभग हर बड़े मंदिर में हो रही है, लेकिन सामने कुछ मामले आ पाते है। ऐसे ही लगभग हर जगह कुछ ना कुछ जातिवाद देखने को मिलता है, पर सामने कुछ ही आ पाते है।
आख़िर डीन से लेकर कुलपति में 90% एक ही वर्ग के है।
क्या -40 नंबर से कोई डॉक्टर बन सकता है ?
क्या बिना सारे सेमेस्टर एग्जाम पास किए , सारे प्रैक्टिकल वाइवा पास किए, किसी को डिग्री मिल सकती है ? क्या इसके बिना किसी डॉक्टर को लाइसेंस मिल सकता है ? सेमेस्टर एग्जाम में कोई आरक्षण नहीं होता है सबके साथ एक ही तरह से सबको पास करना होता है। डिग्री सबको एक प्रोसेस से ही मिलती है।
प्रवेश परीक्षा सिर्फ प्रवेश यानी एडमिशन के लिए है, एससी/एसटी केटेगरी के मार्क्स को बोल रहे हो, लेकिन EWS के मार्क्स से कोई समस्या नहीं ? और मैनेजमेंट कोटे से जो लाखो करोड़ो की सीट खरीद लेते है उनके मार्क्स नहीं पूछते और ना ही आपको पता होंगे।
क्यूँकि हमारे देश में पर्याप्त सीट नहीं है, और दूसरी तरह की नौकरियों में इस तरह के पैसे और अवसर नहीं है इसलिए इस प्रवेश परीक्षा में इतनी मारामारी होती है। बहुत से देशों में तो इसकी प्रवेश परीक्षा भी नहीं होती जिसको रुचि होती है वो सीधा प्रवेश लेता है। इसलिए बहुत से छात्र दूसरे बहुत से देशों में पढ़ने जाते है।
ये इतनी सी बात अगर किसी को समझ नहीं आ रही है तो या तो आप किसी गधे के अवैध शुक्राणु से पैदा मूर्ख है या बहुत घटिया दर्जे के धूर्त। 🙂