मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज कल जनपद लखनऊ में 'मिशन रोजगार' एवं 'टूरिज्म कॉन्क्लेव- 2022' के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे।
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उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों की सीधी भर्ती लिखित परीक्षा-2025 को सकुशल, निष्पक्ष एवं शुचितापूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के उद्देश्य से आज परीक्षा के द्वितीय सत्र में @DmSambhal अंकित खण्डेलवाल एवं #SPSambhal कृष्ण कुमार बिश्नोई ने सम्भल नगर स्थित विभिन्न परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
उल्लेखनीय है कि उक्त लिखित परीक्षा 08, 09 एवं 10 जून 2026 को प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जा रही है। निरीक्षण के दौरान @DmSambhal एवं #SPSambhal ने राजकीय महाविद्यालय सम्भल, जेड.यू. इण्टर कॉलेज सम्भल तथा एम.जी.एम. डिग्री कॉलेज सम्भल का भ्रमण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने परीक्षा केन्द्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, अभ्यर्थियों की प्रवेश एवं चेकिंग व्यवस्था, यातायात एवं पार्किंग प्रबन्धन सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। @CMOfficeUP@UPGovt@ChiefSecyUP@InfoDeptUP@Comm_Moradabad
“New Year Resolution: Protect Your Digital Identity.”
“Celebrate the New Year, Not Cyber Regrets.”
“New Year, New Goals — Stay Cyber Secure.”
🚨 “Faced online fraud? Don’t wait — call 1930 or visit https://t.co/D8k3mbRj3V immediately!”
@PinkiYadavMLA
माननीय विधायक जी ये वाटर कूलर
ग्राम राजपुर (पं दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज राजपुर, बहजोई सम्भल )में दिनांक 4 जुलाई को स्थापित हुआ 1-2दिन चलने के बाद ही यह काम करना बंद कर दिया ठेकेदार से कई बार बोला नही सुन रहे अपने स्तर से कार्रवाई करने की कृपा करें
शहरी, मध्यम वर्गीय अभिभावक बहुत गाजे बाजे के साथ बच्चों का प्रवेश शहर के, क्षेत्र के किसी नामी गिरामी कान्वेंट स्कूल में कराते है और उनका यह उत्साह केवल कक्षा 12 तक ही बना रहता है, वो ये देखना चाहते हैं कि हमारा बच्चा स्कूल में टाई बेल्ट पहनकर जा रहा कि नहीं, प्राइवेट बस से जा रहा है कि नहीं। वह स्कूल में क्या सीख रहा है उसके साथ स्कूल में कैसा व्यवहार हुआ इस पर अभिभावक का कोई फोकस नहीं है, बहुत सारे प्राइवेट स्कूलों में बच्चों के साथ जघन्यतम घटनाएं भी हुई हैं, चाहे वो प्रयागराज की घटना हो चाहे अवध की घटना, बच्चों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा है इन घटनाओं में फिर भी अभिभावक क्यों चुप हो गए? ये समझ में नहीं आया और समाज। के लोग भी चुप हो गए किसी ने एक बार भी इन। संस्थानों पे सवाल नहीं उठाया जबकि सरकारी संस्थानों पर कोई भी यूं, भी सवाल उठाने उठकर चला आता है। फिर भी अभिभावकों को लगता है कि हम अपने बच्चे को सामान्य बच्चे से कुछ अलग प्रदर्शित करेंगे समाज में अपना रुतबा बनाएंगे जलवा बनाएंगे। कि देखो हमारा बच्चा कितने अच्छे शहर के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित कान्वेंट स्कूल में पढ़ रहा है और लोगों को चिढ़ाएंगे धीरे धीरे कक्षा 12 के बाद उनका यह मोह भंग हो जाता है, फिर भारत देश के जितने भी अभिभावक हैं सब का रुझान सरकारी स्कूलों पर एकाएक बढ़ने लगता है उनको लगता है सरकारी संस्थान से बेहतर कुछ भी नहीं है, सभी को सरकारी मेडिकल कॉलेज चाहिए, सभी को सरकारी आईआईटी चाहिए, रुड़की चाहिए, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज फिर किसी को प्राइवेट कुछ भी नहीं चाहिए, यहां तक कि आईए एस पीसीएस जैसी सरकारी सेवाएं भी चाहिए, यहां तक कि जब हम रिश्तेदारियां ढूंढने जाते हैं तो भी सरकारी सेवाओं म को ही महत्व देते है यदि हम बेटी के लिए कोई वर? ढूंढते हैं तो वह दामाद सरकारी सेवा में ही होना चाहिए।यह शादी की पहली शर्त होती है यदि बच्चा आईएस है, पीसीएस है, इंजीनियर है, डॉक्टर है तो उसका शादी में मूल्य बहुत लगेगा क्या हम ये सोच रहे हैं कि हम इंटर तक प्राइवेट संस्थानों को बढ़ावा दे रहे हैं, क्या प्राइवेट संस्थान हमारे बच्चों का उचित मानसिक विकास कर पा रहे हैं क्या बच्चे को जो चाहिए वो दे पा रहे हैं? अगर वो नहीं दे पा रहे हैं तो उन सबकी कमी हम ट्यूशन से पूरी कर रहे हैं फिर भी बच्चा अपने बचपन से महरूम रह जा रहा है बहुत सारी ऐसी बातें हैं जो उसके बचपन में होनी चाहिए लेकिन उससे वंचित हो जा रहा है, अभिभावकों का यह मोह जल्दी ही समाप्त हो जाता है 12वीं के बाद उनको। सिर्फ और सिर्फ सरकारी शिक्षा चाहिए। सरकारी नौकरी चाहिए। इसलिए आपसे अनुरोध है की सरकारी शिक्षा ही बेहतर है उसी को आगे बढ़ाने का हम सभी प्रयास करें और देश के लिए ऐसा नागरिक पैदा करें जो हमारी सीमाओं की हिफाजत करें हमारी हिपाजत करें मानवता की हिफाजत करें और अपने परिवार की इबाजत करें जय हिंद, जय शिक्षक जय भारत 30/6/25 राकेश सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़।
सैलरी1,5 लाख, केवल आना जाना और काम कुछ नहीं, जब हम यह बात एक सम्मानित शिक्षक के बारे में कहते हैं तब हमें पता होना चाहिए की 150000 यह संख्या बताना, आना जाना कुछ न करना, इन सारे शब्दों का ज्ञान हमें एक शिक्षक ने ही दिया है, जब हम कहते हैं कि एक शिक्षक काम नहीं करता, कामचोर है स्कूल में नहीं जाता जाता बच्चों को नहीं पढ़ाता तो हमें पता होना चाहिए यह विवेक और यह ज्ञान उसी शिक्षक ने हमें दिया है कि हम उसके बारे में ये टिप्पणी करने लायक हो गए हैं, या कर रहे, हैं जिस गुरु के दिए ज्ञान से हमें इस चर, अचर जगत के बारे में जानकारी मिलती है उसी गुरु के बारे में इतनी हल्की बात कहना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है ज्ञान की महत्ता तब भी थी, आज भी है, और कल भी रहेगी, ज्ञान तब भी राज करता था, आज भी राज कर रहा है, कल भी करेगा, ज्ञान की किसी से तुलना नहीं हो सकती है और ज्ञान को कोई उपदेश देने लायक इस जगत में कोई नहीं है, ज्ञान को उपदेश देने का अर्थ है कि अपने दामन में खुद झाँककर देख लेना चाहिए जब हम किसी पर एक अंगुली उठाते हैं तो 3 अंगुलियाँ कहती हैं पहले अपने आप को देखो और एक अंगुली ऊपर की तरफ इशारा करती है कहती है कम से कम ईश्वर से डरो जिन लोगों के मन में शिक्षकों के प्रति ये भाव हैं उनको अपने भी आत्मा में झांक के देखना चाहिए, और ईश्वर से डरना चाहिए , राकेश सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ 15/7/25
अगर हम बंदूक और तलवार के सामने क़लम और क़िताब को हारने से नहीं रोक सके, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमसे सवाल करेंगीं: जब स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय खंडहर बनाए जा रहे थे, तब तुम क्या कर रहे थे?
@skuldeep011 शिक्षा के अधिकार से एक बच्चे को पढ़ाई का अधिकार मिला, गांव गांव उसके लिए स्कूल खुले। अब स्कूल बंद किए जा रहे हैं।
ये कहां का न्याय है ?
ये कहां का विधान है ?
ये कैसा जनहित है ?
ये कैसा निर्णय है ?
ये कैसा उत्तर प्रदेश है ?
#SaveVillageSchool
इस समय पूरे प्रदेश में भीषण गर्मी और हीट वेव के कारण छात्रों का अवकाश 30 जून तक बढ़ाया गया, लेकिन बगैर बच्चो के शिक्षकों को अनावश्यक स्कूल बुलाने का आदेश अव्यवहारिक और अमानवीय है। आदरणीय बेसिक शिक्षा मंत्री @thisissanjubjp जी कृपया संशोधित आदेश जारी कराने की कृपा करें। धन्यवाद🙏
अब तक आपने पुरुषों के ख़िलाफ़ दहेज़ वाले मामले सुने होंगे मगर इस बार मामला थोड़ा अजीब है,
इंदौर में एक महिला जिसकी शादी 2019 में हुई थी अब उसने कोर्ट में शिकायत की है कि
"सुहागरात पर उसके ससुराल वालों ने उसकी वर्जिनिटी चेक करने के लिए ग़लत तरीके अपनाए, जिससे उसे मानसिक और शारीरिक यातनाओं का सामना करना पड़ा"
अब कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए ससुरालवालों के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने का आदेश दिया है,
सवाल तो यह भी है कि
महिला को 6 साल बाद क्यों याद आया कि वर्जिनिटी चेक करने के लिए ग़लत तरीक़ा अपनाया गया?