मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा; इस भावनात्मक ब्लैकमेल में मत फँसाइए। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल कोई बदतर पार्टी आई तो उसे सड़कों पर निपट लेंगे।
दूसरी तरफ़ घनघोर अयोग्यता को कोचिंग से लेकर मेरिट, PG, नौकरी और प्रमोशन तक लगातार छूट, ये अनंत काल तक नहीं चल सकता।
This has to stop!
कृपया मुझे इस बात पर भावनात्मक ब्लैकमेल न करें कि मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा। इस दोनों परिस्थिति की चिंता भाजपा को करनी चाहिए कि इनके आने से इनका क्या होगा। इन नेताओं और पार्टी पर ऐसे लोग कैसे-कैसे प्रतिबंध डालेंगे।
मैं इन बातों का लोड नहीं लेता क्योंकि मेरे लोड लेने, या ना लेने, से कोई अंतर नहीं पड़ता। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल को कोई ऐसी पार्टी आई जो, आप जैसा कह रहे हैं की बदतर बना देगी, तो उस से सड़कों पर निपट लेंगे। उनको वैसे भी सड़कों की क्रांति पर ऑर्गैज़म आ जाता है।
आपसे तो केवल शब्दों से लड़ रहे हैं। यदि किसी को यह भ्रम है कि सवर्णों का रक्त रंगहीन जल बन चुका है, और उस से वीरता का वाष्पीकरण हो चुका है, तो हम वहीं हैं जिन्होंने लहू से सने जनेऊ मनों में तुलवाया था धर्म रक्षा हेतु। हम वही हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में फाँसियाँ झेलीं। हम वही हैं जो अंग्रेजों के विरोध में बिगुल फेंका। और हम वही हैं जिन्होंने मुगलों के होते हुए भी धर्म की रक्षा की।
जो लोग शब्दों से समझ सकते हैं वो समझें। हम बिकाऊ राजनेताओं के राजनैतिक समीकरणों के वेरिएबल्स नहीं हैं कि जब इच्छा हुई, जो मन में आया वो कर लिया। हमने आशा दिखाई कि आपके पास विज़न है, और आप 'विकसित भारत' के नाम पर एक जातिवादी समाज देश पर थोप रहे हो जहाँ प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए हर मार्ग पर आपने गड्ढे बना रखे हैं!
अतः, यह धर्म की लड़ाई है, समाज की लड़ाई है और देश की लड़ाई है। प्रतिभा को कूड़ेदान में रखने वाला राष्ट्र कभी भी विकसित नहीं हो सकता। ऐसे राष्ट्र में रेवड़ियाँ बाँटी जाती रहेंगी और वह अंततः वेनेजुएला बन जाएगा। इसलिए, समय रहते या तो हम इनसे तंत्र को ठीक करवाएँगे या अपने जीवन की परवाह किए बिना इस समर में कूदेंगे।
मैं नेता नहीं हूँ। मैं कुछ भी नहीं हूँ। मैं कल को रहूँ या ना रहूँ, यह विषय ही समाज का नेतृत्व करेगा। और जब समाज का हर व्यक्ति अपनी चिंता, अपने बच्चों से जोड़ कर करने लगेगा, तब सत्ता को भयाक्रांत होना चाहिए।
मेरी योजना ओपन-सोर्स है। मुझे किसी पुस्तक की आवश्यकता नहीं है। मैं छुप कर अचानक से कुछ नहीं करूँगा। मैं जो करूँगा, मैंने वह कई बार लिखा है और वही करता हूँ। मैं सचेत करने के प्रयास करता हूँ, मैं प्रॉपर चैनलों से आप तक बात भी पहुँचाता हूँ परंतु यदि तुम नहीं मानते, तो मेरा क्या दोष!
संसद में सामान्य वर्ग की बात करने वाला एक भी व्यक्ति क्यों नहीं है? OBC के क्रीमी लेयर और EWS की क्वालिफिकेशन में इतनी असमानताएँ क्यों हैं? सवर्णों के टैक्स के पैसे से SC/ST/OBC की योजनाएँ फाइनेंस होती रहेंगी और हमारे बच्चे लोन के लिए मरते रहें जो उन्हें मिलता नहीं?
उनके पिता ६०% के ब्याज दर पर पैसे ले कर उसे हर महीने भेजते रहें और तुम घनघोर अयोग्य लोगों को कोचिंग दो, फिर मेरिट में छूट दो, फिर वो क्लास में कुछ ना उखाड़ पाए तो आगे PG में फिर से छूट दो, फिर नौकरी में छूट, प्रमोशन में छूट... ये अनंत काल तक चलता रहेगा?
दिस हैज टू बी फकिंग स्टॉप्ड! एंड वी विल नोट कॉम्प्रोमाइज एन इंच नाउ!
@WokeFuneral मैंने ayese दोगले लोगों को college time से ही देखा है. आज कल लोगों में गलत को गलत कहने की हिम्मत ही नहीं है . स्वर्ण समाज अपने comfort zone से bhar आना ही नहीं चाहता
आरक्षण भीख ही है:
१. मेरिट पर सीट ले नहीं पाते, कोई छोड़ता है तब मिलता है
२. फॉर्म का दाम कम, हॉस्टल-कोर्स फी फ्री, सवर्णों के टैक्स के पैसे से सब्सिडाइज होता है
३. फ्री कोचिंग भी भीख ही है क्योंकि टैक्स का पैसा जाता है
४. हर स्तर पर जितनी भी आर्थिक छूट है, वह भीख ही है जो मेरे जैसे टैक्सदाताओं के पैसे से दी जाती है।