प्रिय गोदी मीडिया के कुत्तों
तुम दलालों ने पहले अपनी EMI चुकाने के चक्कर में अपना जमीर बेचा, फर्जी राष्ट्रवादी बने, अपने आसपास भी उन्हीं लोगों को रखा जो तुम जैसे बिके हुए हड्डीखोर कुत्ते थे
तुम खुश थे कि सत्ता के तलवों को चाट कर भी तुम्हें अपने इकोसिस्टम में हीरो की तरह देखा जाता था, तुम्हारी हर भ्रामक रिपोर्ट पर तुम्हारे लिए न्यूज रूम में तालियां बजती थी, सब तुम्हारे रंग में रंग चुके थे, सबकी EMI थी, सब खुश थे कि जो भी हो किश्तें तो टाइम पर जा रही है, जिंदगी तो बढ़िया कट रही है
नोटबंदी में लाखों लोग रोए पर तुम कुत्तों ने दिखाया नहीं क्योंकि तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ा
कोरोना में लाखों लोग बेकारण मरे, बदइंतजामी से लाखों लोग मरे, प्राइवेट अस्पतालों ने अपनी जेबें भरी, इंसान की जिंदगी कीड़ों से बदतर हो गई पर तुम कुत्तों ने वो सच दिखाया नहीं क्योंकि तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ा
अभी रिसेशन की वजह से तुम्हारे सैकड़ों साथी बेरोजगार हुए, कई चैनलों ने छंटनी करके सैकड़ों मीडियाकर्मियों को लात मारकर बाहर निकाल दिया पर तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि तुम बच गए
कितने मीडिया वालों ने खुदकुशी कर ली, कितने रेपिडो, ओला उबर चला रहे तुम्हें फर्क नहीं पड़ता क्योंकि तुम्हारी नौकरी तो बची हुई है ना
आज तुम कुत्ते महाकुंभ की रिपोर्टिंग कर अपने आप को दूध का धुला साबित कर रहे पर सच ये है कि एक कॉल आएगा और तुम सब दुम दबा कर चुप बैठ जाओगे और अगली EMI भरने का इंतजाम करने में जुट जाओगे
मुझे तुम नपुंसक लोगों से कोई हमदर्दी नहीं है
आज अगर प्रशासन तुम्हें हर जगह से कुत्ते की तरह लात मारकर भगाता है तो सालों इसकी वजह तुम खुद हो, तुमने अपनी औकात दो कौड़ी के कुत्तों की तरह बनाई है
😏तुम सब इसी लायक हो!