भारत के सबसे प्यारे बेटे की धरोहर को बचाओ साथियों बुद्ध से प्यारा बेटा देश को कभी न मिला है न मिलने की उम्मीद है l सभी लोग इस हैशटैग पर अधिक से अधिक लिखे @HansrajMeena#SaveBuddhistHeritage
मांड गायिका गवरी देवी नहीं रहीं
लेकिन परिवार की तीसरी-चौथी पीढ़ी तक में स्वरों के बीज बोकर गई हैं। पाली के सांसद पीपी चौधरी गवरी देवी के निधन पर उनके घर बैठने गए तो परिवार की नन्ही बच्ची और बहू ने उनके गाये हुए गीत गाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
विहिप के चंपत राय का चेला टुन्नू यादव जो ड्राइवरी करता था पांच साल में करोड़पति हो गया। जो घर बनवाया है उसमें लिफ्ट लगवाया है। आरएसएस और बीजेपी की लूट की ग़ज़ब कहानी बता रहा है यह भगवाधारी।
ध्यान दो सब छोटे छोटे चैनल का माइक है बड़े चैनल वाले कहाँ मरे है . आम घर का लड़का विनोद जाखड़ neet मामले पर सड़के गर्म कर रहा है गोदी मीडिया से भी सहा नहीं जा रहा है किसी नेता का बालक होता तो अब तक बाप बना लेता मीडिया वाले , लेकिन आम घर का है तो कोई coverage नहीं
जो जो विनोद भाई के साथ है रीट्वीट करो और वक़्त जज़्बात बदल दो
तस्वीर नॉर्वे की है।
बात मिडिल ईस्ट की, पर कहानी शुरू होती है अमेरिका से। और इस बार बात मोदी पर खत्म नही करूँगा।
आप पर करूँगा।
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बहरहाल, 20 वी सदी के अंत तक दुनिया में तेल की जरूरत खाने के अलावे रोशनी के लिए होती थी। वो ज्यादातर आसपास के पेड़ो, फसलों से मिल जाता था।
धीमे जलने वाले गाढ़े तेल के लिए व्हेल का शिकार होता। पर अब इससे काम नही चलना था। तेल की जरूरत, ऑटोमोबाइल के आविष्कार के बाद एकदम से एक्सप्लोड हो गयी।
औऱ तेल मिलता था- धरती के भीतर ड्रिल करके। अमरीका में इसका व्यापार रॉकफेलर ने किया। अरबपति हो गए।
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विश्वयुद्धों का दौर आते आते, तेल सबसे बड़ी कमोडिटी हो गया। पर्ल हार्बर पर हमला, जापान की तेल आपूर्ति पर बढ़ रहे खतरे को मिटाने को हुआ।
तो हिटलर ने काकेशस के बंजर इलाके जीतने में इतना जोर लगाया, ताकि ऑयलफील्ड हाथ आ जायें।असफल रहा।
अंत मे उसकी तोपगाड़ियाँ घोड़े खींच रहे थे। कोल्बे की कोयले से तेल बनाने की विधि जो हम केमिस्ट्री में पढ़ते है, इसी मजबूरी से उपजा।
लब्बोलुआब यह कि तेल ही ताकत था।
और भरपूर तेल मिला- मिडिल ईस्ट में
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ईरान, इराक, कुवैत, जॉर्डन, कतर, ओमान, UAE,सऊदी अरब etc। रेत के ढूह और कबीलो में बंटे इस पिछड़े इलाके के सरदारों को वैश्विक शक्तियों ने साधा।
तेल की खोज,पश्चिमी देश करते। निकालने का ठेका उनकी कम्पनियां लेती, मार्किट मे बेचती। शाह/ सुल्तान/अमीर/तानाशाह को हर बैरल पर रॉयल्टी मिल जाती।
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दशक भर में तानाशाहों की दौलत ठाठें मारने लगी। ब्रूनेई जैसे बित्ता भर देश के सुल्तान की दौलत दुनिया के सबसे बड़े धनिकों से ऊपर है।
आगे चलकर सऊदी जैसे देशों ने अरामको जैसी कंपनियां बनाई। जिसमे उनकी खुद की हिस्सेदारी होती, और फॉरेन पावर्स की भी।
दुबई, जेद्दा, जैसे चमचम शहर बने। लेकिन नागरिक??
तेल की दौलत में उसका कोई हिस्सा न था।
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नॉर्वे के नार्थ सी में तेल की खोज 1960 के दशक में हुई। यह प्रजातन्त्र था। औऱ सरकार का नजरिया अलग।
तेल पर हक, सरकार का नही, जनता का था। जनता में भी सिर्फ मौजूदा पीढ़ी नही, आने वाली नस्लों का भी। एक दिन खत्म हो जाने वाले इस खजाने का लाभ उन्हें भी मिले, जिन्हें अभी पैदा होना है।
तो तेल की सारी कमाई से एक सॉवरिन फंड बनाया गया। जनता केयर फंड कह लीजिए। पूरा पैसा इसमे जमा होता।
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फिर यह फंड, दुनिया भर के मार्किट, बॉन्ड, शेयर में इन्वेस्ट करता। इन्वेस्टमेंट से दौलत और बढ़ती। फिर हर साल, तेल की कमाई तो जुड़ती ही जाती है।
नार्वे में तय किया कि यह दौलत खर्च नही होगी।निवेश से हुए मुनाफे का एक हिस्सा सरकार, शिक्षा और स्वास्थ्य में खर्च करेगी। यह अमूमन रिटर्न का 3-4% होता है।
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इतने से ही नॉर्वे में शिक्षा मुफ्त है, स्वास्थ्य मुफ्त है। ये दोनों ही वर्ल्ड क्लास है, बेस्ट है। टैक्स कम है। सब लोग वैसे ही काम करते है..
और तमाम चीजो का उत्पादन करते है, जैसे की तेल से कोई मुफ्त की अकूत कमाई हो ही नही रही। याने नार्वे की इकॉनमी तेल आधारित नहीं। वह अरब देशो की तरह वन कमोडिटी नेशन नही।
तेल खत्म भी हो गया, तो इकॉनमी चलेगी। उस दौर की दौलत भी बची रहेगी। बढ़ती रहेगी।
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यह आज कई ट्रिलियन का फंड है। दुनिया में सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट फंड, दुनिया के हर बड़े मार्किट में तगड़ा इन्वेस्टमेंट है।
यह बड़ी ताकत है। जेब मे धन हो, तो आप किसी पर भी आंखे तरेर सकते हैं। नार्वे सॉवरिन फंड किसी कम्पनी से पैसा निकाल ले, तो वह कम्पनी डूब जाए। शेयर ख़रीद ले, तो वह सोने के भाव बिकने लगे।
तो दुनिया सबसे बड़े प्रजातन्त्र के राजा को भी, नार्वे जाकर मत्था टेकना पड़ता है। गिड़गिड़ाने के लिए ..
कि नार्वे सरकार ने उसकी बेनामी कम्पनी में इन्वेस्ट करने के लिए, सॉवरिन फंड पर जो रोक लगाई गई है, वह हट जाये।
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प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण किसी भी देश के सामने दो तरह के मॉडल है। एक अरब देशों का मॉडल, और दूसरा नार्वे का मॉडल..
पहला मॉडल नेताओ, उनके बगलगीर धनपतियों और उनकी मौजूदा पीढ़ी को अकूत फायदा देता है। वे धन उलीचकर, प्रॉपर्टीज, कोठियों, महलो, रोल्स रॉयस, मर्सिडीज में भरने के बाद, अंततः स्विस बैंक और केमैन आइलैंड के जरिये विदेशी अर्थव्यवस्था में छुपा देते हैं।
दूसरा मॉडल- धन देश की निगाह मे रहता है। जनता के काम आता है। वह जनता जो अभी सामने है, और वह भी-
जो अभी पैदा नही हुई।
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भारत मे तेल नही है।
लेकिन नेक्स्ट बिग थिंग है।
रेयर अर्थ मेटल्स हैं। निजी कम्पनियो को ठेके पर माइन्स दी जा रही हैं। भले ही उन्हें इसका कोई अनुभव हो न हो विदेशी कम्पनियो के साथ वेंचर होंगे। वे खोदेंगी, बेचेंगी।
अफसरों को रिश्वत, सरकार को रॉयल्टी मिल जाएगी। यह मॉडल अरब देशों का है, या नॉर्वे का?
आप सोचिए।
जातिवाद का लाइव टेलीकॉस्ट किया है BBC ने, यह वीडियो शेयर कीजिए और उन मुंह से जन्मी औलादों तक पहुंचाए जो कहते हैं भारत में जातिवाद नहीं है 🔥🔥🔥
दलित युवक रेंट पर रूम के लिए फोन लगाता है, पहले रूम मालिक हां करता है लेकिन जैसे ही उसको सरनेम से जाति का पता चलता है वह फोन काट देता है,
मध्यप्रदेश के कई गांव ऐसे हैं जिनके नाम जाति आधारित है, लेकिन मुख्यमंत्री व्यस्त हैं वह नहीं बदल पाएंगे ऐसे गांवों का नाम,
जातिवाद मल्टीलेयर है, शहरों में महीन जातिवाद होता है और गांवों में खुलकर होता है, जातिव्यवस्था के जनकों शर्म करो और प्राउड जींस कहना बंद करो ।
“ऐसा नहीं कि परीक्षा पहले लीक नहीं होती थी। छत की पानी की टंकी की तरह ये हमेशा से लीक होती रही है। लेकिन अब अंतर ये ही कि कुछ ही परीक्षा ठीक हो रही हैं। बाक़ी बस लीक हो रही हैं।
https://t.co/uvaMCtgf4V
NEET-UG, UGC-NET, JEE-Mains, SSC CGL, BPSC, REET, बाक़ी परीक्षाओं के नाम आप ख़ुद जोड़ लीजिए। मेरे दिमाग़ का सर्वर काम नहीं कर रहा।”
#CUET #TechnicalGlitch
#NEET #PaperLeakScam
बड़ी ख़बर
ब्रेंट क्रूड की क़ीमत $100 प्रति बैरल के निशान से नीचे आ गई है।
आज सुबह ब्रेंट क्रूड अब $98.27 प्रति बैरल पर आ गयी।
दूसरी तरफ़ भारत में तेल कंपनियाँ पेट्रोल डीज़ल के क़ीमत बढ़ाती चली जा रही है! देश में कोई सरकार है कि इसे रोके?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने off late पेट्रोल डीज़ल के आसन्न संकट की बात कर और लोगों को एहतियात बरतने की सलाह देकर रूबियो के आने से बहुत पहले ही भूमिका बांध दी है। अब अमेरिका से बड़े पैमाने पर तेल ख़रीद की डील सामने है तो उसे जस्टिफाई किया जा सकेगा कि समस्या इतनी बड़ी है कि यहाँ से न ख़रीदें तो कहाँ जाए! वैसे समस्या तो सच में बड़ी है पर ईरान तो छोड़िए, रूसी तेल पर भी अमेरिकी ‘गाइडलाइन्स’ हैं कि कब ख़रीदना है कब नहीं। दूसरे शब्दों में इसे प्रतिबंध कहा जाता है।
मैं राजीव से बात करना चाहता हूँ..
रात के 3 बजे, मालदीव के राष्ट्रपति ने इसरार की। थके हुए, मगर बेहद कृतज्ञ गयूम का सम्पर्क, सेटेलाइट फोन से राजीव से कराया गया।
राजीव उस रात सोए नही थे। उन्हें इस कॉल का इंतजार था।
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दिल्ली में राजीव से गयूम की मुलाकात तय थी, मगर अपरिहार्य कारणों से उनका दौरा स्थगित हो गया था। इसकी खबर विरोधियों को नही थी।
श्रीलंका में बैठे गयूम के विरोधी अरबपति ने सरकार पलटने की योजना बना रखी थी। लंकाई चीतों से डील सेट थी। गयूम दिल्ली में होते, माले में हमला होता।
भाड़े के लड़ाके, हाईजैक किये शिप से माले उतरे। बहुत से इसके पहले ही, आम वेशभूषा में माले पहुँच गए थे। 4 नवंबर 1988 की रात हमला हुआ।
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छोटा सा शहर- आप एयरपोर्ट, टेलीफोन एक्सचेंज, सेक्रेट्रीटीएट जैसी आधा दर्जन बिल्डिंग कब्जा कर लें, तो सत्ता आपकी हुई। भाड़े के विद्रोही कब्जा कर चुके थे।
लेकिन राष्ट्रपति को भी तो हिरासत में लेना होगा। वे अपने पैलेस में नही थे। हमले की खबर से वे कहीं छिप गए।
और वहीं से अमेरिका से मदद मांगी। मगर डिएगो गार्सिया से मदद आने में कुछ दिन लगते। श्रीलंका और पाकिस्तान से मदद मांगी।
पाकिस्तान ने क्षमता न होने का बहाना किया, श्रीलंका चीतों से उलझना नही चाहता था। तो ब्रिटेन से मदद मांगी। थैचर ने सलाह दी- भारत से मदद मांगो।
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राजीव कलकत्ता में थे, जब खबर आई। रक्षा और विदेश मंत्रालय की संयुक्त बैठक रखी गयी।राजीव सीधे एयरपोर्ट से वहीं पहुचें।
आर्मी, नेवी, एयरफोर्स का एक संयुक्त ऑपरेशन तय किया गया। नाम - ऑपरेशन कैक्टस
कई योजना बनी, बिगड़ी। पैराट्रूपर्स उतारने की बात सोची गयी, मगर माले इतना छोटा की ज्यादातर सैनिक, समुद्र में गिर जाते।
फिर एक डेयरिंग योजना बनी।
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शाम होते होते आगरा से हैवी एयरक्राफ्ट, फौजी, साजोसामान, जीपें लेकर प्लेन माले चला। और सीधे हुलहले एयरपोर्ट पर उतर गया। घुप्प अंधेरे में ये लैंडिंग जानलेवा हो जलती थी।
तुरन्त ही फौजी और जीपें बिखर गए। एयरपोर्ट थोड़ी बहुत सँघर्ष के बाद कब्जे में आ गया। इतने में और विमान उतर गए।
कुछ ही घण्टो में माले में विद्रोहियों की लाशें बिखरी पड़ी थी। खेल खत्म हो गया था।
सेफ हाउस में छिपे गयूम से माले के भारतीय राजदूत मिले। बताया कि विद्रोह कुचल दिया गया है। वे सेफ हैं।
राजीव को मदद की गुहार लगाए महज सोलह घण्टे हुए थे। त्वरित मदद से अभिभूत, थके हुए, मगर बेहद कृतज्ञ गयूम ने राजदूत से कहा - मैं प्रधानमंत्री राजीव से बात करना चाहता हूँ..
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इसके बाद, मालदीव एक स्ट्रेटजिक एसेट के रूप में भारत का ठिकाना बना। हिन्द महासागर में भारत को एक मजबूत ताकत बनाने में, वहां क्रिएट किया गया फौजी ठिकाना, हमे थाह देता रहा। तीन दशक तक ..
जब तक कि घर मे घुसकर मारने की बकैती नेशनल टीवी पर करने वाले,
औरो के बाथरूम में ताक झांक करने वाले..
दूसरो के स्वतंत्रता संग्राम में खुद को सेनानी बताने के शौकीन,
पड़ोसियों नाकाबंदी कर क्षुद्र ब्लैकमेलिंग करने वाले मूर्ख को, हमने राजीव के जूतों में फिट न कर दिया।
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दस साल पहले जिस व्यक्ति के राज्याभिषेक में समारोह में सभी सार्क देशों के नेता, लाइन लगाकर हाथ मिलाने आये थे..
तब मेरे,आपके, हिंदुस्तान की जनता के निर्णय से एक नई आशा भारत में ही नही, पूरे उपमहाद्वीप में फैली थी।
सबको लगा, कुछ बड़ा होने वाला है..
दस बरस बाद, सिर्फ निराशा है। उम्मीदों का बादशाह, बौना जोकर साबित हुआ है।
पदानुकूल बड़प्पन त्यागकर, क्षुद्र हरकतों से, छिछोरे समर्थकों की तालियां हासिल तो हुई। मगर पद , देश का वकार, इसके स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट, इसकी गरिमा का जनाजा निकल गया है।
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हाल यह है कि पाकिस्तान ही नही नेपाल, श्रीलंका, भूटान भी चीन को गोद मे जा बैठे है। ताजा ताजा मालदीव उसमे मिल चुका है। माले से भारतीय बेस खाली करवाया जा चुका है।
और हमारा छबीला राजा, लक्षद्वीप में बैठकर मालदीव को चिढा रहा है। उसके छल्ले लक्षद्वीप को मालदीव से बेहतर टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की देशभक्ति बेच रहे हैं।
हद्द है..
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इस दौर में राजीव की रह रह कर याद आती है। वो गरिमा, वो गम्भीरता याद आती है।
काश यह शख्स अगर 10 साल जिया होता। तब दुनिया की हर बड़ी ताकत दिल्ली में फोन लगाकर कहती..
- मैं राजीव से बात करना चाहता हूँ..
❤️
🚨 “Mother of all deals” की असली पोल-खोल!
संदीप चौधरी का खुलासा
बिना डरे, बिना झुके 🫡
3% से 18% टैरिफ
3 लाख करोड़ के फायदे से 9 लाख करोड़ सालाना घाटा
चीन से नुकसान था ही, अब अमेरिका से भी
ऊपर से ट्रंप की धमकी - रूस से तेल लिया तो और टैरिफ 😡
देश को गुमराह करना बंद करो।
.@AITCofficial ने इस CCTV फ़ुटेज के साथ लगाया बड़ा आरोप, बैलेट बॉक्स खोलने का आरोप
“❗️ALARMING❗️
यह दिनदहाड़े डेमोक्रेसी का मर्डर है।
CCTV फुटेज से पता चला है कि कैसे @BJP4India, @ECISVEEP के साथ मिलकर, किसी भी संबंधित पार्टी स्टेकहोल्डर की मौजूदगी के बिना बैलेट बॉक्स खोल रहा है। यह इलेक्शन कमीशन की पूरी जानकारी और सुरक्षा में खुलेआम किया जा रहा बड़ा चुनावी फ्रॉड है।
उन्होंने हर गंदी चाल चली, नाम हटाना, वोटर को डराना, सेंट्रल फोर्स का आतंक, कैश की बाढ़, और बुरी तरह फेल हुए। अब, पूरी तरह से हताश होकर, वे EVM से छेड़छाड़ करने पर उतर आए हैं। लेकिन बंगाल महाराष्ट्र, दिल्ली या बिहार नहीं है। हम चुपचाप बैठकर उन्हें हमारी डेमोक्रेसी को लूटते नहीं देखेंगे।
हमारे नेता श्रीमती @DrShashiPanja और श्री @KunalGhoshAgain ने नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर धरना शुरू कर दिया है। श्रीमती @MamataOfficial खुद मौके पर जाकर हालात का जायजा लेंगी। बंगाल के लोग इस दिनदहाड़े हो रही लूट को देख रहे हैं।
हम दिल्ली के ज़मींदारों और उनके कठपुतली चुनाव आयोग को लोगों का जनादेश चुराने की इजाज़त नहीं देंगे।”
डॉक्टर साहब की गलती बस इतनी थी… कि उन्होंने इंसानियत दिखाई और वकील साहब को अपने छत पर AC लगाने दिया।
कुछ साल पहले पड़ोसी वकील ने कहा – “AC लगाना है, आपकी छत की तरफ रहेगा, अनुमति दे दीजिए।”
डॉक्टर साहब ने बिना सोचे हाँ कर दी… क्योंकि लगा, पड़ोसी हैं – साथ देना चाहिए।
सालों तक चुप रहे…
पानी गिरता रहा, गर्म हवा आती रही, परेशानी होती रही... लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की।
आज जब वकील साहब से सिर्फ इतना कहा कि अब इसे हटा दीजिए या सही जगह लगा दीजिए, हमें अब अपने छत की जरूरत पड़ेगी।
तो जवाब मिला –
“नहीं हटेगा… जो करना है कर लो।”
तब डॉक्टर साहब को समझ आया –
हर कोई आपकी अच्छाई को समझे, ये ज़रूरी नहीं। कुछ लोग उसे आपकी कमजोरी समझ लेते हैं।
आप पूरा वीडियो देखिये,
उसके बाद डिसाइड करें कि क्या डॉक्टर साहब ने इंसानियत दिखाकर गलत किया?
“हमें ना दें लेकिन हिन्दुओं को 500₹ गैस सिलिंडर 50₹ पेट्रोल और डीज़ल दे दें हम बीजेपी को वोट दे देंगे” - बंगाल के एक मुस्लिम वोटर के उद्गार सुनिए
एक ऐसा इंटरव्यू जो आप करोड़ों खर्च कर कवरेज में उतरे बड़े बड़े चैनलों पर नहीं सुना होगा। जिन्होंने भी किया है पता चलने पर उनको due credit दिया जाएगा।