सहा भी, रोई भी, इंसाफ मांगा... मिला नहीं। 💔
फिर बंगाल की महिलाओं ने सोचा, अब खुद ही इंसाफ करना होगा।
उन्होंने वोट दिया, और बदल दिया बंगाल का भविष्य।
यही है असली इंसाफ।
हम भाजपा के कार्यकर्ता 2024 के इस दिन को भूल ही नहीं सकते और अपने सबसे बड़े नेता को परेशान भी नहीं देख सकते
और बंगाल की जनता ने भी बता दिया के सब ठीक है लेकिन “मोदी जी” परेशान हों ये हमें गवारा नहीं
बंगाल : देश के खिलाफ एक बहुत बड़ी साज़िश का खुलासा...
-बंगाल की नई सरकार को सबसे पहले इस विषय पर जांच करना चाहिए-
बंगाल ही नहीं आज देश बच गया। बिना भूमिका बांधे मैं ये कहना चाहूंगा कि ऐसी खबरे हैं कि पिछले साल अक्टूबर-नवंबर से ही बंगाल की धरती से देश के खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश रची जा रही थी। ऐसी खबर है कि बंगाल में राजनैतिक रूप से ताकतवर लोग पड़ोसी देश बांग्लादेश के चुनाव में कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को बड़े पैमाने पर फंडिग कर रहे थे। बड़े पैमाने पर मतलब... बहुत बहुत बड़े पैमाने पर, जिसकी मैं और आप कल्पना भी नहीं कर सकते।
अब सवाल उठता है कि जमात को फंडिंग करने के पीछे मकसद क्या था? दरअसल ऐसा कहा जा रहा है कि प्लान ये था कि बांग्लादेश में जमात या तो सरकार बना ले या फिर उसके सहयोग से कोई सरकार बन जाए। जिसके बाद भारत और बांग्लादेश की बॉर्डर पर असली खेल शुरु होता। घुसपैठ, स्मगलिंग, ड्रग्स इत्यादि का बहुत बड़ा सिंडिकेट स्टार्ट हो जाता।
450 किलोमीटर बार्डर पर आज भी फेंसिंग नहीं है, क्योंकि पूर्ववती बंगाल सरकार इसके लिए ज़रूरी ज़मीन मुहैया नहीं करवा रही है। और पूऱा खेल इसी इलाके से होता। इस खेल में षडयंत्र रचने वाले दोनों पक्षों (जमात और बंगाल में उसके सहयोगियों) को जबरदस्त फायदा होने वाला था। न केवल आर्थिक बल्कि राजनैतिक भी। लेकिन भारत और बांग्लादेश की सीमा पर होने वाला ये षडयंत्र महज दो चार साल में पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल देता।
ये प्लान और इसके तहत की गई फंडिंग कुछ हद तक सफल भी रही। जमात और सहयोगियों को 77 सीटें मिलीं। वहीं भारत से लगे बांग्लादेशी इलाके में जमात को अच्छी खासी चुनावी सफलता भी मिली। विशेषकर रंगपुर और खुलना डिवीजन में। सतखीरा बॉर्डर की सभी चारों सीटों और कुश्तिया व बागेरहाट की अधिकांश सीटों पर जमात के उम्मीदवार विजयी रहे।
मैं आगे बढ़ू या कुछ सवाल उठाउं... उसके पहले बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी का पूरा सच जान लीजिए। जमात पाकिस्तान परस्त पार्टी है, आईएसआई की कठपुतली है। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में इसने लाखों लोगों का कत्ल और लाखों महिलाओं का बलात्कार किया था, जिसमें बड़ी तादाद में बांग्लादेश के हिंदू भी शामिल थे। बांग्लादेश जब आजाद हुआ तो इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद इसकी बांग्लादेश में फिर से ताकत बढ़ने लगी थी।
अब कुछ सवाल... क्या राजनैतिक फायदा अब देश से भी ऊपर हो गया है? क्या सियासी फायदे के लिए जमात जैसे घिनौने संगठन से भी हाथ मिलाया जा सकता है? जमात पाकिस्तान के इशारे पर चलती है, क्या ये बात इन लोगों को नहीं पता थी? क्या बंगाल को ग्रेटर बांग्लादेश बनाने का प्लान चल रहा था? बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ये आरोप ऐसे ही नहीं लगाया था। साफ है इसकी जानकारी या सूचना कहीं न कहीं मौजूद है।
अब आगे क्या होना चाहिए... पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनते ही इस मामले की पूरी जांच होना चाहिए, वो भी तत्काल... मुझे पूरा भरोसा है कि ऐजेंसियों के पास भी इस साज़िश के सुराग होंगे। बिना इंतज़ार किये षडयंत्रकारियों के नाम बेनकाब होने चाहिए और उन्हें कानून के मुताबिक सज़ा मिलनी चाहिए।
देश इंतजार नहीं कर सकता... आज भी तीस चालीस साल पुराने राज़ तब खुलते हैं जब कोई केजीबी का मित्रोखिन अर्काइव सार्वजनिक हो जाता है या फिर सीआईए की कोई खुफिया फाइल 50 साल बाद सामने आ जाती है। लेकिन इसका क्या फायदा... देश के साथ गद्दारी करने वाला, विदेश के लिए जासूसी करने वाला तो मर चुका है।
नजीर पेश करना होगी... देश के खिलाफ षडयंत्र रचने वालों को उनके जीते जी कानून के दायरे में सज़ा देनी होगी। भ्रष्टाचार के मामले में तो ऐसा कुछ हद तक हो रहा है। लेकिन देश के दुश्मनों के साथ मिलकर देश के खिलाफ साज़िश रचने वाली बड़ी मछली आज तक नहीं पकड़ी गई है।
ईरान से सीखिए... युद्ध विराम हआ और उसने इजराइल और अमेरिका के लिए जासूसी करने वालों को ढूंढ ढूंढकर उनको उनके अंजाम तक पहुंचा दिया... भारत में भी यही होना चाहिए...
राजनैतिक दलों से निवेदन... आप लोग मजहब, जाति, अगड़े पिछड़े, तुष्टिकरण, भड़काऊ... सभी प्रकार की राजनीति करते हैं... एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हैं... भ्रष्ट्राचार करते हैं... सब चलेगा... सब सह लेंगे... लेकिन भगवान के लिए इस प्यारे देश के खिलाफ बाहर बैठे दुश्मनों के साथ मिलकर षडयंत्र मत रचिए...
उन्होंने नाम पूछकर हमारे लोगों को मारा, तो आप नाम पूछकर दर्जी से कपड़े सिलवाइए,
आप नाम पूछकर नाई से बाल कटवाइए, आप नाम पूछकर कारपेंटर बुलवाइए। एक बार नाम का जलवा आप भी तो दिखाईए।
नाम पूछकर हमारे लोग मारे जा रहे हैं तो हम नाम पूछकर बहिष्कार तो कर ही सकते हैं।
पश्चिम बंगाल के आसनसोल में दुर्गा मंदिर सिर्फ इसलिए बंद था क्योंकि ममता बनर्जी की सरकार ने कहा कि हम सुरक्षा नहीं दे सकते। खून खराबा हो सकता है। लेकिन कल भाजपा की जीत के बाद यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।
बैठे लंदन में ज्ञान बाँटे टोक्यो का
आज दिन में क्या बयान दिया था राहुल गैंडी ने ? ममता के तुष्टिकरण से बीजेपी को रास्ता मिला !!!
ये केजरीवाल से अराजकता की ट्यूशन ले रहा हैं और अब ममता भी मिल गई ।
इटालियन राजकुमार जाओ इटली
बंगाल में आम लोगों का जैसा सेलिब्रेशन देखने को मिल रहा है वैसा देश के किसी राज्य में शायद ही देखने को मिला है।
ऐसा लग रहा है जैसे लोग “आज़ाद” होने का जश्न मना रहे हैं।
और इसका एक बहुत बड़ा क्रेडिट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम को जाता है जिन्होंने भयमुक्त चुनाव करा के दिखा दिया।
जिसको जितनी छाती पीटनी है पीट ले लेकिन सच यही है कि भारी सुरक्षा बल की तैनाती ने लोगों को विश्वास दिया कि वो बिना डरे वोट कर सकते हैं। अगर लोग सुरक्षा बल को देख कर डर रहे होते तो 93-94% वोटिंग ना हो रही होती। लोग घर में बैठते। सुरक्षा बल को देखकर वो डर गए जिन्हें समझ आ गया था कि अब तो लोग डरेंगे नहीं।
जिन्हें समझ आ गया था कि “बारह बजे के बाद किसका बाप बचाने आएगा” जैसी धमकियाँ भी नहीं चल पायेंगीं।
इसलिए CEC ज्ञानेश कुमार ने जो करके दिखा दिया है वो अद्भुत और अभूतपूर्व है। विपक्ष उनको जितना कोस ले लेकिन इस देश के लोकतंत्र के हीरो हैं वो। एक ज़माने में जो टी एन सेशन ने कर के दिखाया था, ज्ञानेश कुमार जी ने उससे भी बड़ा काम कर के दिखा दिया है बंगाल में।
पश्चिम बंगाल की जनता ने अपना जनादेश दे दिया है, लेकिन ममता बनर्जी जबरदस्ती मुख्यमंत्री बनी रहना चाहती हैं। वो कह रही हैं कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी।
संविधान कहता है कि हारे हुए सीएम को इस्तीफा देना होता है। पर दिन रात संविधान की दुहाई देने वाले आज संविधान को इस तरह कुचल रहे हैं।
आपको नूपुर शर्मा जी की आपबीती सुननी चाहिए किस तरह से उनको अपना घर छोड़कर बंगाल से भागना पड़ा
और ऐसे ही हजारों बेटियों के साथ टीएमसी क्या करती थी
बंगाल समय रहते बच गया वरना हम अंदाज़ा ही नहीं लगा सकते क्या होता
बंगालवासियों ने घुसपैठियों और उनके हितैषियों को ऐसा सबक सिखाया है, जिसे तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली पार्टियाँ कभी भूल नहीं पाएँगी।
बंगाल ने जिन आशाओं और आकांक्षाओं के साथ मोदी जी के नेतृत्व पर यह विश्वास जताया है, हम निश्चित रूप से उन्हें पूरा करेंगे।
चैतन्य महाप्रभु, स्वामी विवेकानंद, कविगुरु टैगोर, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरुषों की पावन भूमि बंगाल का खोया गौरव लौटाने और 'सोनार बांग्ला' के स्वप्न को साकार करने के लिए भाजपा दिन-रात एक कर देगी।
ममता बनर्जी और टीएमसी को ईशा राय जी जैसी हजारों अबलाओं का श्राप लगा है. 1 साल पहले टीएमसी गुंडों ने इनके पति को मार दिया क्योंकि वो बीजेपी के कार्यकर्ता थे. पति के मौत के बाद बिना किसी स्वार्थ के वो ये काम करती रहीं. इन वीरांगनाओं के संघर्ष को नमन है.
@narendramodi@AmitShah@SuvenduWB बीजेपी को ऐसे लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए..
ममता दीदी मैं इस्तीफ़ा नहीं दूँगी मुझे हराया गया है मैं तो जीती थी
मेरा जवाब - तानाशाह ऐसे कुर्सी के प्रेम में पड़ जाते हैं के जनता ने हराया नहीं उखाड़ दिया लेकिन कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते
वो छोटी गाड़ी चप्पल सब दिखावा था - सत्ता की असली भूख तो ये है