वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब ने आय असमानता पर अपनी नई रिपोर्ट जारी की है. इसमें भारत दुनिया में पहले नंबर पर है.
यहां 10% अमीर लोगों के पास देश की 65% संपत्ति है. यह रिपोर्ट कहती है कि भारत के टॉप 10% अमीर लोगों का देश की 58% कमाई पर कब्जा है. जबकि कम इनकम वाले 50% लोगों के हाथ में देश की सिर्फ 15% आय आती है.
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आय असमानता का आलम ये है कि सिर्फ 1% लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का लगभग 40% हिस्सा है.
World Inequality Report 2026 | Income | India
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द मैन हू लिव्ड ..
भारत के इतिहास में शोले शायद इकलौती फ़िल्म होगी, जिसका हर किरदार, हर डायलॉग, उसके रिलीज के 50 साल बाद भी लोगो की जुबान पर चढ़ा हुआ है।
गब्बर सिंह के रूप में अमजद खान तो आईकॉनिक हैं ही। जया भादुड़ी, हेमा, अमिताभ, धर्मेन्द्र, संजीव कुमार, जगदीप, असरानी, मैक मोहन, लीला मिश्रा, जलाल आगा, हेलन, ए के हंगल जैसे मिनट भर की प्रेजेंस वाले रोल भी हमारी स्मृतियों में ताजा है।
इनके बीच हीरो कौन था?
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अगर कुछ नियमो को फॉलो करें- जैसे मेन हीरोइन किसे मिलती है, या अंत मे विलेन किसके हाथ से पिटताता है- तो इस आधार पर धर्मेंद्र हीरो हैं।
लेकिन ट्रेजेडी यही है। हीरो होकर भी, वे पूरी फिल्म में, डोमिनेटिंग हीरो बनकर जेहन में छप नही पाते नही। मर जाने वाला अमिताभ सारी सहानुभूति लूट जाता है।
जी जाने वाला धर्मेंद्र पीछे रह जाता है।
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फ़िल्म इंड्रस्टी में 50 साल से अधिक साल तक छाए रहने के बावजूद, वे सुपरस्टार नही गिने गए। कभी राजेश खन्ना, कभी अमिताभ ने वह दर्जा रखा।
लेकिन धर्मेंद्र का औरा कायम रहा।
अनपढ़ औऱ बंदिनी जैसी फिल्मों से फूल और पत्थर, हकीकत, सत्यकाम, खामोशी से सफर यमला पगला दीवाना तक पहुँचता है।
लेकिन मौजूदा दौर में ज्यादातर लोगों के जेहन में उनकी छवि, 80-90 के दशक के हीमैन की है, जो कमीनो कुत्तों का खून पीने को आतुर था।
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यही उनके साथ अन्याय है।
उनका असली कद उनकी अभिनय रेंज में छिपा है। छह दशक के कॅरियर और तीन सौ से अधिक फिल्मों में उन्होंने हर छोर को छुआ।
सत्यकाम में सत्यनिष्ठ शख्स, अनुपमा में टूटे पिता का अपराधबोध, जीवन मृत्यु में एक ही फिल्म में क्रूर ठाकुर से शांत डॉक्टर तक का सफर, और चुपके चुपके में का वो प्रोफेसर, जिसके हालात से हंसी फूटती थी।
गंवई जट से शहरी बुद्धिजीवी तक, एक्शन हीरो से हास्य कलाकार तक, वे फिट रहे। हृषिकेश मुखर्जी, ऋत्विक घटक और रमेश सिप्पी, तीन अलग-अलग ध्रुवों के निर्देशकों के सबसे भरोसेमंद अभिनेता थे।
अभिनेता उनकी रेंज यह नहीं कि वे कितने रोल कर सकते थे, बल्कि मिलने वाले हर रोल में वह कितना असली लगता है। धर्मेंद्र उस श्रेणी के अभिनेता रहे। हिंदी सिनेमा इतनी लंबी पारी और ऐसी रेंज के अभिनेता कम है।
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निजी जीवन मे भी उनकी रेंज दिलचस्प है। आजकल ज्यादा बात उनके दिलावर खान बनकर, हेमा मालिनी से विवाह की होती है।
पर एक सेलिब्रिटी होकर, स्टार और पब्लिक की आलोचना की तमाम सम्भानाओ के बावजूद, उन्होंने प्रेम को निबाहा- सबके सामने अंगीकार किया।
ये साहस और जिद की बात है।
उन्होंने लम्बी जिंदगी जी। दोनों लड़के स्टार हुए। धन, यश, प्रेम, आनंद और कंट्रोवर्सी से भरपूर, एक जीने योग्य जीवन के बाद, धर्मेंद्र गये हैं।
आज अमिताभ उनकी अंतिम क्रिया में शामिल होते दिखाई दिए। लगा कि ये शोले का फाइनल एक्ट, वो आखरी सीन था।
लेकिन रोल बदले हुए थे।
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असल जिंदगी में वीरू चला , जय देखता रह गया। हम भी आज उस नायक को जाते हुए देख रहे हैं। लेकिन सिनेमा में धर्मेंद्र को बहुआयामी छवियां, कई पीढ़ियों के जेहन में जिंदा रहेंगी।
धर्मेंद्र मरेंगे नही।
ही विल बी द हीरो, हू लिव्ड ..
नमन
❤️🙏
जौनपुर की अदालत में महिला जज के सामने अतुल सुभाष ने जब पत्नी द्वारा झूठे मुकदमे कराने की बात कही तो
जज ने कहा, तो क्या हुआ आपकी पत्नी है, ये आम बात है।
अतुल ने कहा, झूठे मुकदमों में लोग मर जाते है।
बगल में बैठी पत्नी ने कहा, आप क्यों नहीं मर जाते, जज भी ठहाके लगाकर हँसी।
ये कहानी है समस्तीपुर के अतुल सुभाष की जो बेंगलुरु में IT एक्सपर्ट के तौर पर काम करता था। 2019 में जौनपुर की निकिता से शादी करने के बाद जो हुआ, अतुल ने मौत को चुनना बेहतर समझा।
पत्नी ने 09 झूठे मुकदमे दर्ज कराये, दो साल में 120 तारीखें मिली लेकिन न्याय नहीं मिला।
दो साल के बेटे से मिलने के लिए रिश्वत, जज ने मामला सुलझाने के लिए पाँच लाख मांगे, पत्नी ने पीछा छोड़ने के तीन करोड़ मांगे, पुलिस और न्यायपालिका के अधिकारियों ने पैसे मांगे, लेकिन किसी ने राहत नहीं दी। शादीशुदा जिंदगी के ताने बाने खामियां, लालच और षड्यंत्र की दास्तान ने सब बर्बाद कर दिया और अतुल ने आत्महत्या को अंतिम और विकल्प के तौर पर चुना। आत्महत्या से पहले लाइव वीडियो बनाया और अपनी बात कहकर दुनिया से से विदा ली।
24 पन्ने के सुसाइड नोट में वो सब लिखा है जो इस समाज और सरकारी सिस्टम के मुँह पर कालिख पोतने के लिए काफ़ी है। हम जितनी तरक्की कर रहे है उतना ही सामाजिक ताना बाना छिन्न भिन्न हो रहा है।
अगर बचा सकते हो तो सब मिलकर इस टूटते बिखरते कलंकित होते समाज को बचाने की कोशिश कीजिए, फिर कोई अतुल सुसाइड नहीं करेगा।
#AtulSubhash #AtulSubash
UKPSC के नए कैलंडर मे लोअर PCS का जिक्र नहीं है,छात्रों मे निराशा है, बेरोजगारों को आयोग से बहुत उम्मीद थी, परंतु कलैन्डर की रिलीज के साथ ही छात्र दुखी हैं, कृपया छात्र हित मे लोअर PCS का विज्ञापन यथाशीघ्र प्रकाशित करें
@pushkardhami@UKPSCOFFICIAL@DIPR_UK@ukcmo
ये उत्तराखंड नैनीताल के शिव सर्किट मे शामिल मुकतेश्वर मंदिर जाने वाली सड़क है जिसमे गड्डे ही गड्डे हैं कृप्या ठीक करवाने की कृपा करें!इसके भरोसे हम पर्यटन को आकर्षित करना चाह रहे हैं! दुःखद संज्ञान लें!
@pushkardhami@DIPR_UK@AjitSinghRathi@nitin_gadkari