भाजपा सरकार के बनाए हर ‘कॉरिडोर’ और ‘चौड़ीकरण’ की योजना के पीछे जो घपला-घोटाला है, उसके लिए एक बहुसदस्यी न्यायिक जाँच हो। इसमें संलिप्त न कोई ट्रस्टी बख़्शा जाए, न किसी कमेटी का कोई सदस्य और न ही कोई प्रशासनिक और विकास प्राधिकरण का अधिकारी। इतने बड़े घोटाले इन सबकी मिलीभगत से ही होते हैं। पिछले कुछ सालों में इन कामों से जो भी जुड़ा रहा है और जिन पदाधिकारियों और अधिकारियों ने मुख्य-मुख्य भूमिका निभाई है, उनकी ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से कमाई गयी काली संपत्ति व अकूत धन-संपदा की भी जाँच आम जनता, ईमानदार पत्रकारों व बहुदलीय जनप्रतिनिधियों की निगरानी में हो।
जिस घपले-घोटाले की सज़ा शिक्षामंत्री को मिलनी चाहिए उसकी सज़ा शिक्षक को क्यों दी जा रही है।
भाजपा अपनी कमियों, कमज़ोरियों और भ्रष्टाचार के लिए हमेशा ही किसी और को निशाना बनाती है। कभी ‘दानाजीवी’ तथाकथित पत्रकारों से मीडियाबाज़ी करवाकर शिक्षा से जुड़े यूट्यूबर्स पर बेबुनियाद आरोप लगवाती है और कभी उनके शैक्षिक ���ंस्थान बंद करवाती है। इसके लिए भाजपा संस्थान के भवनों के अवैध निर्माण का बहाना बनाती है। अगर कोई अवैध निर्माण हुआ है तो हम ‘प्रयागराज विकास प्राधिकरण’ के उन सभी अधिकारियों के निलंबन और उनसे वसूली की माँग करते हैं, जिनके समय में ये निर्माण हुआ या फिर जिन्होंने आज तक उस पर आपत्ति नहीं की। 24 घंटे में इस कार्रवाई की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
भाजपा शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों की विरोधी है। देश के इतिहास में अब ये पहली बार होगा कि शिक्षा के मुद्��े पर चुनाव लड़ा जाएगा। प्राइमरी के सरकारी स्कूलों को बंद करने; यूनिफ़ॉर्म, स्टेशनरी, मिड-डे मील जैसे घोटालों से लेकर कॉपी की हेराफेरी व भ्रष्ट-मूल्यांकन, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण की हक़मारी, हर संभव परीक्षा धांधली, रिजल्ट में बेईमानी व कोर्ट में परिणाम फँसाने की भाजपाई चालबाज़ी जैसे विषयों पर चुनाव होगा और जनता भाजपा को हमेशा के लिए बाहर कर देगी।
मंदिरों के लिए बजट मिल जाता है।
किलो के जीर्णोद्धार के लिए फंड आ जाता है।
विदेश यात्राओं पर करोड़ों खर्च हो जाते हैं
लेकिन सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों के लिए कभी बजट ���हीं आता! क्यों?
जिस तरह से पीडीए समाज के युवाओं ने एआई के माध्यम से ‘पीडीए पाठशाला’ की संकल्पना को चित्रित किया है वो सराहनीय है।
कुछ गाँवों के युवा तो साइकिल पर किताबें लेकर गाँव के बच��चों को पढ़ाने निकल चुके हैं। जैसे ही उनकी तस्वीरें आना शुरू होंगी हम उन्हें सबके सामने लाएंगे।
हर चीज को व्यापार समझनेवाले भाजपाइयों को कोई समझाए कि शिक्षा आय-व्यय और लाभ-हानि की तराज़ू पर तौली जाने वाली कोई चीज़ नहीं होती है।
शिक्षा और प्रतिभा को प्रोत्साहन हमारी प्राथमिकता रही है और सदैव रहेगी।
अखिलेश यादव वास्तव में बहुत बढ़िया इंसान हैं
अखिलेश यादव ने आज अपने ट्वीट में साफ साफ बृजेश पाठक जी को लिखा है को वो उनके संकट के समय उनके साथ खड़े रहेंगे
सोचिए कितना विशाल ह्रदय अखिलेश यादव हैं कि वो अपने राजनैतिक विरोधी को अपना व्यक्तिगत विरोधी नहीं मानते
वहीं कुछ लोग जो अपने का अखिलेश जी की विचारधारा प्रति 100% समर्पण का दावा करते हैं पर अपने को अच्छा साबित करने के लिए ट्विटर पर दूसरों की छवि बिगाड़ने का काम लगातार कर रहे हैं
ऐसे लोग अखिलेश जी के अनुयाई हो नहीं सकते
हर हर महादेव
@yadavakhilesh
हमने उप्र के उप मुख्यमंत्री जी की टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए, पार्टी स्तर पर उन लोग���ं को समझाने की बात कही है जो समाजवादियों के डीएनए पर दी गयी आपकी ‘अति अशोभनीय टिप्पणी’ से आहत होकर अपना आपा खो बैठे। आइंदा ऐसा न हो, हमने उनसे तो ये आश्वासन ले लिया है लेकिन आपसे भी यही आशा है कि आप जिस तरह की बयानबाज़ी न��ंरतर करते आये हैं उस पर भी विराम लगेगा। आप जिस स्तर के बयान देते हैं वो भले आपको अपने व्यक्तिगत स्तर पर उचित लगते हों लेकिन आपके पद की मर्यादा और शालीनता के पैमाने पर किसी भी तरह उचित नहीं ठहाराये जा सकते हैं ।
एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में आपसे ये अपेक्षा तो है ही कि आप ये समझते होंगे कि किसी के व्यक्तिगत ‘डीएनए’ पर भद्दी बात करना दरअसल किसी व्यक्ति नहीं वरन् युगों-युगों तक पीछे जाकर उसके मूलवंश और मूल उद्गम पर आरोप लगाना है। जैसा कि सब जानते हैं कि हम यदुवंशी हैं और यदुवंश का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है अतः ऐसे में आपके द्वारा हमारे डीएनए पर किया गया प्रहार धार्मिक रूप से भी हमें आहत करता है। हम जानते हैं कि आपका धर्म-प्रधान व्यक्तिक्त ऐसा नहीं है कि वो भगवान श्रीकृष्ण के प्रति ऐसी दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी कर सकता है परंतु एक सामान्य भोला व्यक्ति जो भगवान श्रीकृष्ण ही नहीं बल्कि किसी भी भगवान में विश्वास करता है वो आपकी टिप्पणी को अन्यथा भी ले सकता है। ऐसे में आपसे आग्रह है कि राजनीति करते-करते न अपनी नैतिकता भूलिए और न ही धर्म जैसी संवेदनशील भावना को जाने-अंजाने में ठेस पहुंचाइए।
आशा है आप अपनी टिप्पणी के लिए अपने अंदर बैठे हुए उस अच्छे इंसान से क्षमा माँगेंगे, जो पहले ऐसा न था। आप यदि एकांत में बैठकर अपने विगत वर्ष���ं के व्यवहार, विचार और व्यक्तित्व का निष्पक्ष अवलोकन-आलोचन करेंगे तो पाएंगे कि मूल रूप से आपके विचारों में पहले कभी भी ऐसा विचलन न था, न ही आपकी राजनीतिक आकांक्षाएं ऐसी थीं कि आप व्यक्तिगत स्तर पर आदर्श को भूल जाएं और अपना शाब्दिक संतुलन खो बैठें। आशा है इस बात को यहीं ख़त्म समझा जाएगा और राजनीति की शुचिता को बचाए-बनाए रखने के लिए आप नकारात्मक राजनीति की संगत से यथोचित दूरी बनाकर अपने विवे�� और विचार को पुनः सही दिशा की ओर मोड़ेंगे। एक जनसेवक होने के नाते हम सबके पास जनसेवा के लिए वैसे भी समय हमेशा कम रहता है, ऐसे में व्यर्थ के विषयों में न उलझकर हमें सकारात्मक राजनीति के उद्देश्यों पर अडिग रहकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
शुभेच्छा!
हमारी एकता ही हमारी शक्ति है और देश ���ी जनता की नयी उम्मीद भी!
जनता ने भाजपा को बहुमत न देकर नैतिक रूप से हरा दिया है, भाजपा को जो सीट मिली भी हैं वो जनता ने नहीं बल्कि उनके झूठे तंत्र और इंडिया गठबंधन के विरूद्ध षड्यंत्र और साज़िश करनेवालों के बल पर मिली हैं।
आज जो भाजपा के साथ जाकर नासमझी दिखा रहे हैं, वो भी भाजपा के इतिहास को समझते हुए भविष्य में अपनी पार्टी के टूटने की आशंका से ग्रस्त हैं। उन्हें भी जनता के सच्चे जनादेश का सम्मान करना चाहिए और देश को साम्प्रदायिक राजनीति के चंगुल से मुक्त करने के अभियान में जनता का साथ देना चाहिए। उनके बीच जो अविश्वास है, उसकी नींव पर कोई भी सरकार मुकम्मल नहीं हो सकती है। देश, संविधान और लोकतंत्र बचाने का ऐसा ऐतिहासिक अवसर इतिहास हमेशा नहीं देता है। जो इसमें चूक जाएगा, वो इतिहास निर्माता के रूप में अपनी भूमिका को द��्ज कराने से चूक जाएगा।
जनमत का सम्मान, जनता का सम्मान!