URGENT RESCUE NEEDED!!!
This magnificent soul is in agonizing pain with a severe leg injury and infection, unable to even stand up on the ground. While locals are trying to feed it, it desperately needs an emergency medical rescue right now.
Location: Kacharigaon Tea Estate, Rangapara, Sonitpur, Assam
@moefcc get boots on the ground before its too late. Every minute counts.
@assamforest@CMOfficeAssam@assampolice@PetaIndia@pfaindia@WildlifeSOS@PMOIndia
#SaveIndianAnimals #ElephantRescue #Wildlife
•जब हमें हवा साफ करनी थी तब हमने एयर प्यूरीफायर लगाए
��जब हमें नदियां ,तालाब और अंडरग्राउंड एक्विफर्स को साफ रखना था तब हमने वाटर प्यूरीफायर लगाए,
•जब हमें गर्मी से बचने के लिए पेड़ लगाने थे तब हमने AC लगाए,
•जब हमें पूरे देश को साफ रखना था , तब हमने केवल अपना घर साफ किया ,
•जब हमें पानी बचाना था , तब हमने कई फीट बोरिंग करके फिजूल पानी बर्बाद करना उचित समझा,
•जब हमें असल मुद्दों पर सवाल उठाने थे , तब हम जाति धर्म जैसे मुद्दों में उलझे रहे ,
•जब हमें देश क�� सोचना था , तब हमने केवल अपना सोचा।
अब भुगतो।
यह रेबीज के लक्षण है। रेबीज होने के बाद कोई इलाज नहीं है।
मर्त्यु दर लगभग 100% है।
रेबीज लाइल���ज बीमारी है।वैक्सीन ही उपचार है। यदि एसे किसी जानवर (कुत्ता, बिल्ली, बंदर, लंगूर,लोमड़ी etc) ने काट लिया तो तुरंत Anti-rabies vaccine & Serum लगवा लेनी चाहिए।
जान बच जाएगी।
इसीलिए सावधानी और सतर्कता बेहद ज़रूरी है।🙏
#rabies
🚨 Sudha Murthy is spot on. Parents turning their kids into Online CONTENT MACHINES will have lasting psychological damage👏🏼
She’s urged the Govt to frame rules on how children are portrayed online.
~ Today it’s 'Cute Videos', tomorrow it’s lost innocence, all for monetisation.
🚨 सुधा मूर्ति ने वही कहा है जो कड़वी सच्चाई है — और जिसे सुनकर कई पेरेंट-इन्फ्लुएंसर बिदक जाएंगे।
आज माता–पिता अपनी ही औलाद को Online Content Machine बनाकर उनके बचपन का पोस्ट-मॉर्टम कर रहे हैं।
हर रोना , हर हँसी , हर मूड स्विंग सब कैमरे पर।
बच्चा इंसान कम, रील बनाने की प्रॉप ज़्यादा हो गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि बच्चों को ऑनलाइन शो-पीस की तरह बेचने पर सख्त कानून बने।
और ये असलियत किसी को चुभ सकती है, लेकिन सच यही है >>
• आपके क्यूट वीडियो असल में बच्चे की privacy murder हैं।
• लाइक्स और व्यूज़ के लिए बच्चों को नचा-गाना कराना सीधा mental exploitation है।
• बचपन को कंटेंट बनाकर आप उन्हें Attention Addiction और Identity Crisis की तरफ धकेल रहे हैं।
• हर चीज को कैमरे में ठूंस देना उन्हें सिखाता है कि प्यार भी तभी मिलता है जब वे “perform” करें।
आज कंटेंट है ,
कल वही बच्चा lost innocence , anxiety और validation के भिखारीपन से जूझेगा।
और जिम्मेदार कौन?
माता–पिता खुद।
सुधा मूर्ति की बात सीधी और चुभने वाली है ,
बच्चे आपकी सोशल मीडिया करंसी नहीं —
उनका बचपन बेचने का कोई अधिकार आपको नहीं।
जमीन खरीदते समय इन 8 कागजातों की जांच जरूर करें ताकि किसी फ्रॉड में फंस कर आपका पैसा बर्बाद न हो
1. जमीन का ऑनलाइन खसरा/खतौनी चेक करें
2. कचहरी से पता करें कि जमीन विवादित तो नहीं है
3. खरीदने से पहले कन्फर्म करे कि प्लॉट पर कोई लोन तो नहीं है
4. इसे CERSAI की वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं
5. जमीन की स्थिति जानने के लिए नक्शा देखें
6. जमीन के ओनर का ID प्रूफ जमीन के डॉक्यूमेंट्स के साथ वेरिफाई करें
7. दाखिल-खारिज का कागज तहसील से खुद निकलवाएं
8. पुरानी रजिस्ट्री या बैनामे की कॉपी जरूर देखें
जागरूक बनो सुरक्षित रहो...
जानकारी कैसी लगी कमेंट में बता देना और बुकमार्क करते हुए आगे बढ़ाना मत भूलना
छोटे छोटे बच्चों में कैंसर और डायबिटीज जै���ी बीमारियां हो।रही हैं ,
और हम बड़े चाव से बच्चों को ये सब खिला रहे हैं , इन सबको कंट्रोल करने वाली संस्था FSSAI में फर्जी तरीके से डायरेक्टर चुने जा रहे और पॉलिसीज केवल कॉपी पेस्ट हो रहीं।
VIDEO | Uttar Pradesh: RSS members celebrates 150th anniversary of 'Vande Mataram' in Prayagraj.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7)
अवसाद या Depression~
लेंसेट पत्रिका द्वारा कुछ वर्षों पहले किए गए एक सर्वे के अनुसार भारत में 19.73 करोड़ लोग विभिन्न तरह की मानसिक समस्याओं से ग्रस्त हैं।
��नमें 4.57 करोड़ लोग डिप्रेशन या अवसाद से जूझ रहे हैं।
अवसाद गंभीर मानसिक बीमारी है जो आपके महसूस करने, सोचने, कार्य करने और दुनिया को देखने के तरीके को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
अवसाद किसी भी समय और किसी भी उम्र में हो सकता है, औसतन यह पहली बार किसी के किशोरावस्था के अंत से लेकर 20 के दशक के मध्य तक दिखाई दे सकता है।
अवसाद के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और हर व्यक्ति में अलग-���लग दिखाई दे सकते हैं। इन लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
1) उदास, चिड़चिड़ा, खाली और/या निराश महसूस करना।
2) उन गतिविधियों में रुचि या आनंद खोना जिनका आप पहले आनंद लेते थे।
3) भूख में महत्वपूर्ण परिवर्तन (सामान्य से बहुत कम या अधिक खाना)
4) बहुत कम या बहुत अधिक सोना।
5) ऊर्जा में कमी या थकान या कमजोर��� में वृद्धि
6) उद्देश्यहीन शारीरिक गतिविधि में वृद्धि (जैसे, स्थिर बैठने में असमर्थता, इधर-उधर घूमना, हाथ मरोड़ना) या धीमी गति से चलना या बोलना जो इतना गंभीर हो कि दूसरों द्वारा देखा जा सके।
7) स्वयं को बेकार या अत्यधिक दोषी महसूस करना।
8) सोचने या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, भूलने की बीमारी, और/या छोटे निर्णय लेने में कठिनाई।
9) मृत्यु के विचार, आत्महत्या के विचार, या आत्महत्या का प्रयास।
हर इंसान अपने जीवन में कई बार निराशा के दौर से गुज़रता है लेकिन अवसाद में उपरोक्त लक्षण दिन के अधिकांश समय, लगभग हर दिन, दो सप्ताह से अधिक समय तक रहते हैं , साथ ही दिन-प्रतिदिन के कामकाज में स्पष्ट बदलाव (जैसे, काम/स्कूल के प्रदर्शन, व्यक्तिगत संबंधों और शौक) होते हैं।
अवसाद उदासी या शोक/शोक से अलग है
किसी प्रियजन की मृत्यु, नौकरी छूटना या किसी रिश्ते का खत्म होना एक व्यक्ति के लिए मुश्किल अनुभव होते हैं। ऐसी स्थितियों के जवाब में उदासी या शोक की भावनाएँ विकसित होना सामान्य है। नुकसान का अनुभव करने वाले लोग अक्सर खुद को "अवसादग्रस्त" बता सकते हैं।
लेकिन दुखी होना और अवसाद होना एक जैसा नहीं है।
अवसाद किसी को भी प्रभावित कर सकता है यहाँ तक कि उन लोगों को भी जो सब कुछ पा चुके ह��ं।
अवसाद में कई कारक भूमिका निभा सकते हैं|
मस्तिष्क में कुछ में अंतर अवसाद के लक्षणों में योगदान कर सकता है।
ये आनुवंशिक भी हो सकता है।
कई बार कम आत्मसम्मान वाले लोग, जो आसानी से तनाव से घिर जाते हैं, या जो आमतौर पर निराशावादी होते हैं, उनमें अवसाद का अनुभव होने की संभावना बढ़ जाती है । हिंसा, उपेक्षा, दुर्व्यवहार या गरीबी के लगातार संपर्क में रहने से भी अवसाद विकसित होने का खतरा हो सकता है।
अवसाद से पीड़ित 70% से 90% लोग अंततः उपचार के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं।
नियमित रूप से पर्याप्त नींद लेना, स्वस्थ आहार खाना, नियमित व्यायाम और शराब (एक अवसादक) से बचना भी अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।
अगर आप अवसाद के दौर से गुज़र रहे हैं तो इस हेल्पलाइन नंबर पर बात कर सकते हैं।
नंबर है 14416 / 1800 891 4416
High BP से कैसे बचें:-
देश के उच्च रक्तचाप के मरीज़ों की संख्या में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है ।
आइये देखते हैं कैसे इस बीमारी से बचा जा सकता है।
स्वस्थ आहार लें। आहार में हरी सब्जिया , फल की मात्रा बढ़ायें और ज़्यादा तेल की चीज़ो से बचें।
आपने खाने में नमक की मात्रा को सीमित रखना चाहिये और अपने आहार में पोटैशियम की मात्रा बड़ा देनी चाहिए |
नियमित व्यायाम करें। हफ़्ते में कम से कम 5 दिन, 20 मिनट तक शारीरिक व्यायाम करें।
अधिक वजन होने से उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है। वजन को हमेशा नियंत्रण में रखें।
शराब और धूम्रपान ना करें।
नींद पूरी लें। कम से कम 7 घंटे।
तनाव को कम रखने की कोशिश करें। अपनी इच्छाएँ और दूसरों से अपेक्षायें कम रखें।
दिनचर्या में योग और ध्यान जैसी तनाव प्रबंधन गतिविधियों को शामिल करें।
याद रखें कि अगर आपके माता या पिता को उच्च रक्तचाप की समस्या है तो आपको भी ये होने की संभावना बढ़ जाती है। उस परिस्थति में ख़ुद का विशेष ध्यान रखें।
“दुकानदार ने कहा कि –
बिका हुआ सामान न तो बदला जाएगा और न ही वापस होगा?"
ग़ुस्से में आकर झगड़ा न करें....
क्योंकि आपके पास है 7 दिन का रिटर्न और रिप्लेसमेंट का कानूनी अधिकार।
• चाहे ऑनलाइन शॉपिंग हो या ऑफलाइन स्टोर – सामान ख़राब मिला तो या तो बदलना पड़ेगा या फिर वापस होगा।
• उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 आपको देता है इसकी पूरी ताक़त। अगर आपका हक़ छीना जाए, तो चुप मत रहिए, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1800-11-4000 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराए।
सादर: @NCIBHQ