विषय: UPSSSC PET 2026 के परीक्षा केंद्र निर्धारण के संबंध में।
मान्यवर, @CMOfficeUP@UpssscOfficial1
निवेदन है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) के परीक्षा केंद्रों के निर्धारण को लेकर अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
सुदूर जिलों में केंद्र आवंटित किए जाने से विशेषकर महिला एवं आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को आवागमन एवं आवास में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल अभ्यर्थियों की परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो रही है, बल्कि यह निर्णय छात्र हितों के प्रतिकूल प्रतीत होता है।
छात्रों में इस अव्यवस्थित केंद्र निर्धारण को लेकर गहरा असंतोष है और सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों पर विरोध दर्ज किया जा रहा है। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया तो यह एक बड़े विवाद का रूप ले सकता है।
अतः माननीय मुख्यमंत्री जी से विनम्र अनुरोध है कि कृपया इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए संबंधित आयोग को अभ्यर्थियों के गृह जनपद के निकटतम परीक्षा केंद्र आवंटित करने हेतु आवश्यक निर्देश प्रदान करने की कृपा करें।
ये दिल्ली का जंतर मंतर नहीं बल्कि झारखंड की तस्वीर है जहां कांग्रेस-जेएमएम की सरकार है..
छात्र सड़क पर हैं... परीक्षा व्यवस्था में कमियों को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं...
कॉकरोच पार्टी वाले वहां छात्रों की आवाज़ बनने कब पहुंच रहे हैं?
राहुल जी के पास पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था ठीक करने का फॉर्मूला है तो झारखंड का भी इलाज कर दें...
#PaaltuMedia सन्नाटे में है.. उसका काम है सरकार से सवाल पूछना.. लेकिन उनके लिए सरकार मतलब सिर्फ मोदी है.. विपक्ष शासित राज्य की सरकारों को वो सरकार नहीं मानते...
पीएम मोदी ने तो अपने शिक्षामंत्री का इस्तीफा ले लिया.. अभी देखते हैं कहां कहां की सरकारें क्या क्या करती हैं छात्रों के लिए।
अगर सोनम वांगचुक के लिए आँसू बहाए थे, तो एक बार महिपाल सिंह मकराणा के बारे में भी सोचिए।
वह पिछले 20 दिनों से नंगे पाँव, भूखा-प्यासा लगभग 650 किलोमीटर की पदयात्रा पर है। वह दावा करता है कि यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है।
#Reservationhatao#Reservationend
#WATCH | Delhi | Daughter of a Delhi Police SI (Sub-Inspector) who sustained injuries during the clash between Police and protesters in Delhi, says, "...Before joining the police, my father served as a Marine Commando in the Indian Navy. He dedicated 15 years of his life to the Indian Navy. My father was present at the main protest site. He was on the front line near the barricades, where there was a large crowd. Whenever my father came home at night, he used to say that the protest no longer seemed like a student protest. Many antisocial elements had become involved in it. The very next day, on the 25th, my father was pulled by a rowdy mob and was almost lynched near the stage at Jantar Mantar. This happened on the 25th at around 2:00 PM. He remained unconscious at RML Hospital for about four hours. Around 10:00 PM, his colleagues brought him home, and his uniform was completely stained with blood. It was extremely painful for us to see him in that condition...When I opened social media, I saw that my father was being called a criminal. The very next day, I came to know that the people who had attacked my father were approaching the Supreme Court to wash away their crimes and were filing complaints against him and all the police personnel. I felt very hurt and decided that I should also seek justice for my father. I received support from other police families, and we went to the Supreme Court. We requested an advocate to present our case before the Hon’ble Supreme Court. The advocate assured us that we, too, have equal rights as citizens of this country and that we would also get justice"
सूचना के अनुसार: UGC नियमों के विरोध में 600 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहे। श्री राजपूत करणी सेना के महिपाल सिंह मकराना जी की आज अचानक तबीयत बिगड़ गई।
हम माता करणी और भगवान महादेव से उनके शीघ्र स्वस्थ होने एवं उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करते है।🙏🏻
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी @narendramodi
नमस्कार।
मैं एक जनरल कैटेगरी का छात्र हूँ। आपकी सरकार से एक सीधा, कड़वा और दर्द भरा सवाल पूछने आया हूँ।
आरक्षण के नाम पर मेरी जिंदगी के 4-5 साल पूरी तरह बर्बाद कर दिए गए। जो टॉप कॉलेज मुझे अपनी रैंक और मार्क्स पर पहली ही कोशिश में मिल जाना चाहिए था, उसके लिए मुझे दो-दो साल अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी। डबल मार्क्स लाने पड़े। रात-रात भर पढ़ाई, नींद छोड़ना, खुद को तोड़ना… सिर्फ इसलिए कि मेरे पास “जाति का सर्टिफिकेट” नहीं था।
कितने पैनिक अटैक झेले, कितना डिप्रेशन सहा… ये सिर्फ मैं ही जानता हूँ। और मैं अकेला नहीं हूँ। हर साल करोड़ों जनरल कैटेगरी के बच्चे यही जहन्नुम झेल रहे हैं। आधे मार्क्स वाले, उनसे 10 गुना अमीर बच्चे उनकी सीट छीन ले जाते हैं… सिर्फ आरक्षण के नाम पर।
ये “सामाजिक न्याय” नहीं है मोदी जी।
ये खुली नाइंसाफी है।
ये मेहनतकशों का कत्ल है।
ये मेरिट का कत्ल है।
आप “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देते हैं। लेकिन असल में जनरल कैटेगरी के बच्चों का साथ कौन दे रहा है? उनकी जिंदगी कौन बचा रहा है? जब आरक्षण की वजह से मेहनत करने वाले बाहर हो रहे हैं और कम मेहनत वाले अंदर घुस रहे हैं, तो देश कैसे आगे बढ़ेगा? विश्वगुरु कैसे बनेगा?
क्या आपके मंत्री, आपके सांसद, आपके अधिकारी ये सब नहीं देख रहे? या जानबूझकर आँखें मूंद रखी हैं क्योंकि वोटबैंक की राजनीति ज्यादा जरूरी है?
मैं आपसे नहीं, बल्कि इस व्यवस्था से थक चुका हूँ।
लेकिन आप प्रधानमंत्री हैं। आपके हाथ में ताकत है।
अगर सच में देश को मजबूत बनाना है, तो आरक्षण की इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था पर लगाम लगाइए। मेरिट को वापस लाइए। वरना ये देश सिर्फ नारों में विश्वगुरु बनेगा, हकीकत में नहीं।
इंतजार कर रहा हूँ…
किसी जवाब का, या फिर उसी पुरानी चुप्पी का।
सादर,
एक टूटा हुआ जनरल कैटेगरी छात्र
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हमारी आवाज़ है। लेकिन उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती हमारी भाषा है।असहमति ज़रूरी है। सवाल पूछना भी ज़रूरी है। सरकारों को जवाबदेह बनाना भी ज़रूरी है। लेकिन अगर हम अपनी भाषा की मर्यादा खो देंगे, तो हमारी बात की ताकत भी कम हो जाएगी।
यह वीडियो किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। यह उस संस्कृति के पक्ष में है जहाँ विचारों का संघर्ष हो सकता है, लेकिन शब्दों का पतन नहीं।
मतभेद रखें… लेकिन मर्यादा भी रखें। क्योंकि एक सभ्य समाज की पहचान केवल उसके विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्त करने के तरीके से भी होती है। जय हिन्द! वंदे मातरम्! ❤️🇮🇳
#JaiHind
Hello Generals,
This is just a beginning. We are working towards ending reservation in a plan and systemic manner.
Keep supporting GJP, keep joining GJP
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CC: @GCMovementOrg@GJPSpokesperson
At least ek discussion to ho. Bhai jinhone oppression kiya wo to chale gaye, ab kyu logo ko saja di ja rahi h..?
Ek middle class brahman ke bache ko kya mil raha h..?
Aur doosra koi reserved category se sarkari afsar banke bhi apne bache ko reservation dila deta h. Kaha ja rahe h ham isse ..? Reverse racism ke taraf. Aur problem actually unme h jo bolte nahi h. Nahi bologe to daba diye jaoge. This world is a jungle and you need to fight bhai.