मैं ट्रेन से यात्रा कर रहा था तो एक भिखारी मेरे पास आया और बोला "अल्लाह के नाम पर कुछ दे दो बाबा"
मैंने नजर उठा कर निर्विकार भाव से उसे देखा और बोला "मैं अल्लाह को नहीं मानता" तो क्यों दे दूँ ?
उसने घुरकर मुझे देखा तो उसके बाद मैंने उसे प्रस्ताव दिया कि तुम "भगवान राम" के नाम पर मांगो तो मैं तुम्हें 50 रुपया दूँगा
इस पर वो मेरा मुँह ताकने लगा और ट्रेन के आसपास के लोग भी कौतूहल से हमें देखने लगे
फिर, मैंने अपने प्रस्ताव को और अधिक आकर्षक बनाते हुए कहा कि अगर वो भगवान राम के नाम पर मांगेगा तो मैं उसे "100 रुपया" दूँगा
लेकिन, वो भिखारी इसके लिए तैयार नहीं हुआ और भुनभुनाते हुए चला गया और मैं भी मन ही मन "उसकी कट्टरता को भांपकर, पेपर पढ़ने लगा
लेकिन, इस घटना से मुझे ये सीख मिल गई कि एक भिखारी जिसके पास खाने को कुछ नहीं है और भीख मांगकर अपना जीवन-यापन करता है, वो भी "धन के कारण, अपने धर्म से समझौता" नहीं करता है तो क्या हम हिन्दू एक भिखारी से भी ज्यादा गए-बीते हैं जो अपने निजी स्वार्थ (धन अथवा पद) की लालच में अपने धर्म से गद्दारी करने व सेक्युलर बनने को हमेशा एक पैर पर खड़े रहते हैं
सोचना अवश्य और हो सके तो अपने भटके दोस्तों एवं ग्रुप में जरूर भेजें ताकि वे अपने मन में मंथन या मनन जरूर करें 🙏
#hindu #awareness
गुस्से पर काबू रखकर पढ़ना दोस्तों...!!
सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जब मृत्यु हुई तो एक घंटे बाद तत्कालीन-प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एक घोषणा की।
- घोषणा के तुरन्त बाद उसी दिन एक आदेश जारी किया गया, उस आदेश के दो बिन्दु थे। पहला यह था, की सरदार पटेल को दी गयी सरकारी-कार को उसी वक्त वापिस लिया जाय, और दूसरा.....
शेष कमेंट में पढ़िए.... 👇👇
पाकिस्तान के परमाणु आयुधों का भ्रमजाल — एक अमेरिकी रचना
🔍 भूमिका:
विश्व को यह विश्वास दिलाया गया है कि पाकिस्तान ने अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और रणनीतिक आत्मनिर्भरता से एक विशाल परमाणु शस्त्रागार विकसित किया है। किन्तु इस कथानक के पीछे छिपी वास्तविकता कुछ और ही है — एक ऐसा राजनीतिक और सामरिक छल, जिसकी रचना स्वयं अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने की थी।
☢️ मिथक: पाकिस्तान के पास १७५ परमाणु बम हैं ❌
सत्य: वास्तव में पाकिस्तान के पास लगभग २० कार्यशील परमाणु बम हैं।
इनका भण्डारण मुख्यतः तीन स्थानों पर है:
तोरी/खोरी (बलोचिस्तान) ~१० बम
नूर खान एयरबेस (चकलाला, रावलपिण्डी) — तैयार अवस्था के लिए।
सरगोधा एयरबेस — वायुसेना के माध्यम से उपयोग हेतु।
❗ उद्देश्य:
"१७५ बमों" की संख्या एक मानसिक हथियार है:
पाकिस्तानी कट्टरपंथियों को यह विश्वास दिलाना कि वे भारत को जीत सकते हैं।
भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना।
आंतरिक सैन्य शक्ति को वैध ठहराना।
🎭 अब्दुल कादिर खान: एक वैज्ञानिक नहीं, एक अमेरिकी मुखौटा
✅ प्रचार:
दावा: कादिर खान ने यूरोपीय यूरेन्को (URENCO) से सेण्ट्रीफ्यूज तकनीक चुराई और पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बना दिया।
❌ यथार्थ:
अब्दुल कादिर खान केवल धातुकर्म (metallurgy) में प्रशिक्षित थे।
उन्हें न परमाणु विस्फोट की प्रणाली आती थी, न warhead miniaturization, न missile delivery system का ज्ञान।
🔐 अमेरिका की भूमिका:
१९८० के दशक में अफगान युद्ध में सहायता के बदले, अमेरिका ने पाकिस्तान को परमाणु निर्माण की छूट दी।
कई जटिल उपकरण और ज्ञान पश्चिमी स्रोतों से छिपे रूप में प्राप्त हुआ: वैक्यूम पम्प, उच्च-दाब बेयरिंग, इम्प्लोजन टाइमर, डिटोनेटर सर्किट आदि।
अमेरिका ने चुपचाप पाकिस्तान को तैयार होने दिया और कादिर खान को विश्व के सामने ढाल की तरह प्रस्तुत किया।
🌍 उत्तर कोरिया, ईरान, लीबिया को तकनीक स्थानान्तरण का झूठ
❌ दुष्प्रचार:
कथित रूप से पाकिस्तान ने अब्दुल कादिर खान के माध्यम से इन देशों को परमाणु तकनीक दी।
✅ तथ्य:
पाकिस्तान कभी भी अमेरिका को अप्रसन्न नहीं कर सकता था।
यह झूठ CIA द्वारा गढ़ा गया, ताकि:
अब्दुल कादिर खान पर दोष डालकर पाकिस्तानी सेना को बचाया जा सके।
पाकिस्तान को "भटकते वैज्ञानिकों" की कहानी में फिट किया जा सके।
अमेरिका की असली भूमिका छिपी रह सके।
🔥 पाकिस्तान की सेना: पेशेवर रणनीतिक नहीं, हत्यारी
१९७१ में बांग्लादेश में लाखों की हत्या, बलात्कार, जनसंहार।
बलोचों, पश्तूनों और अफगानों पर सतत नरसंहार।
यह सेना किसी रणनीति से नहीं, केवल हिंसा और सत्ता की भूख से चलती है।
❗ निष्कर्ष:
अमेरिका कभी भी ऐसी अराजक सेना को १७५ अणमुब नहीं देगा।
उन्हें केवल कुछ सीमित बम दिए गए, जो नियन्त्रित दायरे में और अमेरिकी निगरानी में हैं।
🕵️♂️ अमेरिका का असली उद्देश्य:
भारत को सीमित रखना= पाकिस्तान को 'परमाणु शक्ति' बताकर भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव
दक्षिण एशिया में द्विपक्षीय तनाव बनाए रखना=दोनों पक्षों को हथियार बेचते रहना
ब्रिक्स जैसी स्वतंत्र शक्तियों को रोकना= एशियाई रक्षा सहयोग को सीमित रखना
पाकिस्तान को 'आतंकी नियन्त्रण' के नाम पर समर्थन देना= जबकि असली नियन्त्रण अमेरिका के पास हो
📌 निष्कर्ष:
पाकिस्तान के पास १७५ अणुबमों का कोई प्रमाण नहीं है।
कादिर खान का योगदान केवल एक 'नायक की कथा' के रूप में था।
असली निर्माण और नियन्त्रण पश्चिमी शक्तियों, विशेषकर अमेरिका, के पास रहा।
#तोरी_खोरी जैसी सुरंगें इस बात का प्रमाण हैं कि पाकिस्तान की स्वतन्त्र परमाणु शक्ति एक भ्रम है।
यह भ्रम केवल इसलिए जीवित है ताकि अमेरिका अपने हित साध सके और क्षेत्रीय सन्तुलन अपने अनुसार बनाए रखे।
यह लेख भारत, एशिया और वैश्विक पाठकों को उस पर्दे के पीछे ले जाता है जिसे जानबूझकर धुंधला रखा गया है। सत्य सामने लाना ही राष्ट्रधर्म है।
(संलग्न चित्र=बलूचिस्तान में पाकिस्तान का सबसे बड़ा अण्डरग्राउण्ड अणुबम भण्डार, १८ फरवरी २०१८ को इसके चार वीडियो मैंने पोस्ट किये थे। इसकी आन्तरिक संरचना अगले लेख में। १२ मई २०२५ का भूकम्प इससे १७५ किमी दूर था।)
पाकिस्तानी सेना राहुल गांधी और सत्यपाल मलिक के वीडियो दिखाकर भारत सरकार पर चुनावी लाभ के लिए पुलवामा हमले की साजिश रचने का आरोप लगा रही है।
कांग्रेस राष्ट्रीय कलंक है।
ये धर्मयुद्ध है 🖐️
श्रीनगर में मुस्लिम आबादी है तो वहां कोई हमला नहीं सब शांत है जबकि वो सीमा से सटा हुआ है
जम्मू में बमबारी... ड्रोन हमले... और गोलीबारी लगातार चल रही है क्यूंकि वो हिन्दू बहुल छेत्र है
समझ रहे हो ना.. आतंकियों का धर्म ✍️
#IndiaPakistanWar#IndianArmy
भारत ने सिर्फ़ पहलगाम का ही बदला नहीं लिया है, बदला 2001 के संसद भवन हमले और 2019 के पुलवामा हमले का भी लिया गया है।
बहावलपुर में जिस मस्जिद को समतल कर दिया गया है वहीं से जैश-ए-मुहम्मद की शुरुआत हुई थी, वहीं से मौलाना मसूद अज़हर ऑपरेट करता था और तीनों बड़े आतंकी हमलों की साज़िश वहीं रची गई थी। 'जामिया मस्जिद सुब्हान अल्लाह' को 2011 में बनाया गया था, उससे पहले यहाँ 'पुरानी मस्जिद' हुआ करती थी। इस तरह, हमने एक तीर से न केवल तीन-तीन हमलों का बदला ले लिया बल्कि भविष्य में संभावित कई आतंकी हमलों के मंसूबों को भी ध्वस्त कर दिया।
अल-रहमत ट्रस्ट के नाम पर मुखौटा बनाकर यहीं से आतंक का सारा कारोबार चल रहा था। आतंकियों की भर्ती से लेकर ट्रेनिंग तक का गढ़ बन गया था ये। 18 एकड़ में फैले इस परिसर की सुरक्षा व्यवस्था ऐसी थी जैसी पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों की भी नहीं है। फिर भी भारत ने भेद दिया।
पाकिस्तान ने FATF की ग्रे लिस्ट में जाने के बाद इस मस्जिद को सरकारी कब्जे में लेकर कार्रवाई का बहाना बनाया था, ताकि उसे मिल रही विदेशी फंडिंग बंद न हो। लेकिन, चीन के दबाव में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से निकाल दिया गया।
भारत ने वो मस्जिद ही मिटा दी, बात ख़तम!
भारत ने पाकिस्तान का F-16 लड़ाकू विमान मार गिराया है। इसे साधारण मत समझिए। पूरी योजना के साथ 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया गया है।
ये पाकिस्तान का सबसे उत्कृष्ट फाइटर जेट है, जो उसे अमेरिका द्वारा दिया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत ने अपना एयर डिफेंस सिस्टम पहले ही दुरुस्त कर लिया था। पाकिस्तान ने भारत में हमले की कोशिश की और उसे अपने बड़े में से एक बड़ा एयरक्राफ्ट गँवाना पड़ा।
F-16 पर पाकिस्तान बहुत पहले से इतराता रहा है।
पाकिस्तान के अस्पतालों में जगह नहीं है, पिछली बार उन्होंने ये कहकर इज्जत बचाई थी कि खंडहरों और पेड़-पौधों को निशाना बनाया गया है।
इस्लामी मुल्क में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। इनके पास न एम्बुलेंस हैं और न डॉक्टर।
ये सिंदूर का बदला है, असर दूरगामी होगा।