@Namita62307261 Bina soche samjhe kuch dalna bhi nhi chahiye unka chehra accident ki vajah se hai..... Padho pahle unke bare me.. Mout ke muh se bahar aayi h....
UP Police SI भर्ती में क्या विवाद, मुकदमें क्यों? High Cutoff, Raw Marks पर Yogi सरकार क्या कर रही है?
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Full Video:
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@Saurabh_Pinch | #UPNews | #YogiAdityanath
#UPSI_GIVE_SCORECARD
लाखों युवाओं ने दिन-रात मेहनत की, कई लोगों ने उम्र, नौकरी और परिवार तक दांव पर लगाकर तैयारी की… क्योंकि उन्हें लगा था कि इस बार भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
लेकिन रिजल्ट आने के बाद जिस तरह Normalization को लेकर सवाल उठे हैं, उसने छात्रों का भरोसा हिला दिया है।
एक ही परीक्षा की अलग-अलग शिफ्ट में इतना बड़ा अंतर कैसे आ गया?
कई मेहनती छात्रों के नंबर अचानक नीचे कैसे चले गए, जबकि कुछ के असामान्य रूप से बढ़ गए?
अगर Normalization पूरी तरह वैज्ञानिक और निष्पक्ष था तो भर्ती बोर्ड और आयोग अब तक -
• Normalization का पूरा फार्मूला
• Shift wise raw score
• Difficulty level analysis
• Final calculation process
सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहे?
सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि 5 साल बाद भर्ती निकालने के बावजूद क्या आयोग एक समान स्तर का पेपर भी तैयार नहीं कर पाया?
अगर शिफ्टों के बीच इतना अंतर था कि normalization की जरूरत पड़ी, तो यह परीक्षा व्यवस्था और पेपर सेटिंग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
छात्र सिर्फ रिजल्ट नहीं मांग रहे, पारदर्शिता मांग रहे हैं।
क्योंकि जब भर्ती प्रक्रिया पर ही संदेह हो जाए, तो मेहनत करने वाले युवाओं का मनोबल टूटता है।
हमारी मांग साफ है -
• UPSI भर्ती की निष्पक्ष जांच हो
• पूरा normalization डेटा public किया जाए
• Shift wise marks और difficulty level जारी हो
• छात्रों की शंकाओं का आधिकारिक जवाब दिया जाए
युवाओं के भविष्य के साथ प्रयोग बंद होना चाहिए।
मेहनत हमारी, हक हमारा तो पारदर्शिता भी हमारी मांग नहीं, अधिकार है।
@uppbpb
#UPSI #Normalization #UPSI_4543_भर्ती #Score_Card_जारी_करो #UPSI_GIVE_SCORECARD
#Migration_Scam_In_UPPSC
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संविधान में प्रदत्त मूल अधिकारों हनन बंद करके अवसर की समानता लागू करनी होगी। यह आरक्षित वर्ग की सीटों पर डकैती नहीं चलेगी
#UPPSC_माइग्रेशन_घोटाला
लखीमपुर खीरी के होनहार छात्र रितिक मिश्रा की आत्महत्या सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि भ्रष्ट तंत्र द्वारा की गई 'संस्थागत हत्या' है!
पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबरों ने एक और इकलौते बेटे को मौत के मुहाने पर धकेल दिया। पिछले 4 साल से पेपर लीक का सिलसिला जारी है, लेकिन भाजपा सरकार सिर्फ खोखले वादे और लीपापोती में व्यस्त है।
सत्ता की नाकामी आज छात्रों के भविष्य और जान पर भारी पड़ रही है।
आखिर कब तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहेंगे युवाओं के सपने? मोदी सरकार जवाब दे!
आज अयोध्या प्रांत अध्यक्ष @VinayPatelAAP के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मुलाकात करेगा।
यूपी पुलिस की एक और नोटिस।
अब लखनऊ पुलिस ने मुझे X के जरिए नोटिस भेजी है।
नोटिस में मेरे X अकाउंट की डिटेल और तमाम जानकारियां मांगी गई हैं।
लिखा है कि मैं सरकार और पुलिस की इमेज ध्वस्त कर रहा हूं।
अब आप मुद्दा सुनिए कि किस बात पर नोटिस दी है और कब का ये मामला है?
मामला सितंबर 2025 का है।
गोरखपुर में दीपक गुप्ता नाम के NEET की तैयारी कर रहे 19 साल के
एक लड़के की पशु तस्करों ने हत्या कर दी थी।
घर वालों का आरोप था कि मुंह में गोली मारी गई है। घरवालों ने पुलिस पर आरोप लगाए।
घर वालों का ये बयान देश भर के तमाम चैनलों में चला। अखबारों में छपा। आज भी इंटरनेट पर मौजूद है।
इसी को पोस्ट करने पर मेरे खिलाफ एफआईआर कर दी गई।
एफआईआर में लिखा गया कि मैं दंगा भड़काने की साजिश कर रहा हूं, नवयुवकों को सरकार के विरुद्ध भड़का रहा हूं।
जबकि मृत छात्र के परिजनों का बयान देश भर के अखबारों-चैनलों में छपा-चला,
मगर योगी आदित्यनाथ के सिस्टम को दिक्कत सिर्फ मेरे ही ट्वीट से हुई और सितंबर 2025 में मेरे खिलाफ लखनऊ की हजरगंज कोतवाली में एक और एफआईआर करा दी गई।
अब 14 मई 2026 को मुझे लखनऊ पुलिस X के जरिए नोटिस भेज रही है।
इससे पहले इसी हज़रतगंज कोतवाली में मेरे खिलाफ विदेशी ताकतों के इशारे पर साजिश करने की एफआईआर दर्ज है।
विदेशी फंडिग की एफआईआर दर्ज है।
इसी हजरतगंज कोतवाली में मेरे खिलाफ योगी आदित्यनाथ को ईश्वर बताते हुए ईश्वर के खिलाफ लिखने की हिमाकत करने की एफआईआर दर्ज है।
योगी आदित्यनाथ के पास पुलिस है, अभियोजन है, एसटीएफ है, और न जाने क्या क्या है,
इसके बावजूद भी पूरा सिस्टम मिलकर भी आज तक मेरे खिलाफ एक पैसे का लेनदेन नहीं निकाल सका है।
आदि शंकराचार्य 8-9 शताब्दी के बीच ही अपने अद्वैत सिद्धांत के तहत समझा गए हैं कि जो है ही नहीं, उसे कहां से ढूंढोगे?
और जो हर तरफ दिख रहा है, उसे कब तक छिपाओगे?
योगी जी, जांच तो करनी चाहिए उस PWD महकमे की जहां नियमों को बदलकर रातों रात हजारों करोड़ के टेंडर दे दिए गए,
और जहां माइनस 75 परसेंट तक पर टेंडर दिए गए।
जांच तो करनी चाहिए उस खनन महकमे की जिसमें जारी अवैध खनन की कानपुर के जाजमऊ वाली गंगा का ब्योरा खुद CAG ने अपनी रिपोर्ट में भर भरकर दिया हुआ है।
जांच तो उस सूचना महकमे की करनी चाहिए, जिसके कदाचार की कहानी आपकी कैबिनेट के अपने ही मंत्रियों ने बयां की हुई है।
जांच तो उस गृह महकमे की करनी चाहिए जिसके तहत आने वाली पुलिस व्यवस्था के बारे में सुप्रीम कोर्ट खुद कह चुका है कि ये Complete breakdown of law है।
जांच तो उस औषधि प्रशासन महकमे की करनी चाहिए जिसकी नाक के नीचे कोडीन कफ सिरप का अवैध कारोबार फलता फूलता रहा,
और जिसके निश्चिंत खर्राटों से कफ सिरप पीने वाले नौनिहालों की नींदें टूटती रहीं।
जांच तो इन मंत्रालयों का जिम्मा संभालने वाले मुख्यमंत्री के 'ईश्वरीय' कामकाज की करनी चाहिए।
जांच तो कथित ईमानदारी, पारदर्शिता और ज़ीरो टॉलरेंस के दावों की असली हक़ीक़त की करनी चाहिए।
जांच तो एक मुख्यमंत्री के स्वजातीय प्रेम और उसकी आड़ में माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को मात दे रहे पक्षपात के गंभीर आरोपों की करनी चाहिए।
भले ही उस मुख्यमंत्री को समय की तात्कालिक सत्ता के आगे रीढ़ टेढ़ी करके लेटे चाटुकारों ने ईश्वर का दर्जा दे रखा हो।
योगी आदित्यनाथ, आपकी सत्ता कितने दिन की है?
अहंकार और निरंकुशता की हर रात की एक न एक रोज़ सुबह होती है।
कबीर दास इसी सत्ताजनित अहंकार के खिलाफ चेतावनी देते हुए अपनी रमैनी में लिख गए हैं-
"इक लख पूत सवा लख नाती, तिह रावन घर दिया न बाती"
आपने सब कराकर देख लिया है। आपको कुछ नहीं मिला है क्योंकि कुछ है ही नहीं।
ये 'कुछ न होना' ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
आपकी सरकार और समर्थक अब तक तीन अस्त्र चला चुके हैं।
सबसे पहले सरकार में छाए भ्रष्टाचार और जातिवाद को उजागर करने पर एफआईआर पे एफआईआर,
फिर इस सरकार में गले तक छाए ठाकुरवाद के आरोपों की रिपोर्टंग पर लीगल नोटिस पे लीगल नोटिस,
और अब X से नोटिस।
इसके आगे भी कुछ हो सकता हो, तो वो भी कर लीजिएगा।
न मैं ट्वीट डिलीट करूंगा और न ही मेरे कानूनी मामलों के पीछे टॉमहाक की गाइडेड मिसाइल की तरह लगाए गए,
मौजूदा समय के किसी 'राजेश्वर' या यूं कह लें कि राजाओं के ईश्वर के आगे कभी नमन करूंगा।
योगी जी,
ये धरती चल ही इसीलिए रही है क्योंकि यहां कभी भी अहंकार की राजसत्ता शत प्रतिशत पर नहीं जा सकी है।
एक दो प्रतिशत उसकी जड़ें हिलाने वाली आंधियां हमेशा रही हैं और हमेशा रहेंगी।
आप लाख कोशिश कर लें, उनका कुछ नहीं कर सकते।
आखिर में,
आपकी खातिर मशहूर शायर कैफ भोपाली का एक शेर जिसे खुद भी पढ़िएगा और 'संजय' की दिव्य दृष्टि के जरिए प्रदेश भर की सारी एजेंसियों को पढ़ा दीजिएगा,
"गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो
आँधियो तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा।"
सादर
अभिषेक उपाध्याय
@myogiadityanath@myogioffice@narendramodi@PMOIndia@AmitShah@AmitShahOffice@dgpup@Uppolice
छात्रों की एक ही मांग — UPSI Score Card और Normalisation Data जल्द जारी करे सरकार।
15 मई सुबह 9 बजे सभी छात्र Twitter पर एक साथ अपनी आवाज़ उठाएं और ये hashtags इस्तेमाल करें ✊
#UPSI_GIVE_SCORECARD#UPSI_GIVE_NORMALISATION_DATA
सूचना के अभाव में लाखों युवाओं में अनिश्चितता बढ़ रही है। अतः बोर्ड से सविनय आग्रह है कि अंक तालिका उपलब्ध कराई जाए, जिससे प्रत्येक प्रतिभागी अपनी वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष अवलोकन कर सके। आशा है कि बोर्ड छात्र हितों के संरक्षण हेतु त्वरित संज्ञान लेगा।
#UPSI_GIVE_SCORECARD #UPSI_GIVE_NORMALISATION_DATA