श्रावण आने को है तो बाबा श्री महाकाल पर यह नई कविता-पंक्तियाँ भी आ गईं. पद्य-चित्त से किए जा रहे गद्य-कार्य के बीच, कविता का आ जाना किसी अनुपम भेंट सा होता है. अपने अग्रज श्री आशुतोष जी के लिए महाकाल की स्क्रिप्ट लिखते हुए, अपने आराध्य श्री आशुतोष जी के लिए मानस में आई यह पंक्तियाँ मानो उन्हीं का दिखाया आलोक हों. उस पर भैया @ranaashutosh10 जी का अद्भुत कंठ. अहा !! 😇🙏 आइए चलते हैं श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की दिव्य नगरी उज्जयिनी और एक अद्भुत वाणी में सुनते हैं महादेव की महिमा, कालों के काल महाकाल की अद्भुत कहानी, भक्ति, वैराग्य और भस्मारती का गहन रहस्य. उज्जयिनी का आध्यात्मिक व पौराणिक महत्व. जिसे लिखते हुए मन स्वयं शिवमय हो गया, उस @durlabhdarshanx VR तकनीक के माध्यम से आपके समक्ष सजीव होने वाली यह केवल कथा नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाली अनुभूति है. ✨ हर हर महादेव 🔱 🚩
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सहानुभूति और अनुभूति में अंतर है
सहानुभूति होने से व्यक्ति देवता बन सकता है
और अनुभूति होने से मित्र
इस दुनिया में हमेशा से
देवताओं से ज्यादा आवश्यकता रही है मित्रों की।
~ असीम वैभव
बुराई ढूँढना बहुत आसान है...
कोई भी इंसान, कोई भी परिस्थिति और कोई भी अवसर
अगर गलत नज़र से देखा जाए, तो उसमें कमियाँ ही कमियाँ नज़र आएँगी।
लेकिन जो लोग अवसर देखते हैं,
वही आगे बढ़ते हैं।
नज़र का फर्क है—
कुछ लोग काँटे गिनते रह जाते हैं,
और कुछ उसी रास्ते पर फूल ढूँढ लेते हैं।✨
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बाद बारिश के
मिट्टी से उठती हुई
सोंधी खुशबू
यहाँ नहीं मिलती।
सब्जियों में स्वाद, फ़ूलों में सुगन्ध
सम्बन्धों में आत्मीयता
नहीं मिलती।
सतह पर सब सुखद था
जब तक भीगे नहीं थे !
~ इला प्रसाद
#हरित 🟢 #लेखनी ✍️
बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥
बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥
भावार्थ:- मैं श्री रघुनाथजी के नाम 'राम' की वंदना करता हूँ, जो कृशानु (अग्नि), भानु (सूर्य) और हिमकर (चन्द्रमा) का हेतु अर्थात् 'र' 'आ' और 'म' रूप से बीज है। वह 'राम' नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप है। वह वेदों का प्राण है, निर्गुण, उपमारहित और गुणों का भंडार है॥
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