जलालपुर विधानसभा पर बसपा प्रत्याशी घोषित होते ही विधायक राकेश पांडेय के समीकरण खराब हो चुके हैं।
इस सीट पर बसपा ने दलित-राजभर समीकरण को साधते हुए पार्टी कैडर के दयाराम राजभर को टिकट दिया है।
खबर है कि सपा के बागी विधायक राकेश पांडेय, जिन्होंने 2024 में अंतरात्मा की आवाज सुनकर राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, वह इस बार वापस राज्यसभा चुनाव में सपा के उम्मीदवार को वोट करेंगे।
2022 में बहुजन समाज पार्टी जलालपुर विधानसभा में 80 हजार से अधिक वोट पाकर दूसरे नंबर पर रही थी, जबकि प्रत्याशी ठाकुर था। जलालपुर में ठाकुरों के करीब 11 हजार वोट बताए जाते हैं, जबकि दलित करीब 1 लाख और राजभर करीब 30 हजार हैं।
राकेश पांडेय भाजपा के समीकरण से खुद या अपने बेटे रितेश पांडेय को चुनाव नहीं जिता पाएंगे, इसलिए 55 हजार यादव और 60 हजार मुस्लिम वोटरों के लिए वापस जा रहे हैं।
इस सीट पर करीब 29 हजार ब्राह्मण मतदाता भी बताए जाते हैं। लेकिन पिछली बार राज्यसभा चुनाव में अंतरात्मा की आवाज सुनकर भाजपा को वोट करने वाले राकेश पांडेय को क्या सपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट करने पर अखिलेश यादव जलालपुर से चुनाव लड़वाएंगे?
जलालपुर ही नहीं, इस बार खेल टांडा, अकबरपुर और कटहरी में भी होगा। टांडा या कटहरी से बसपा एक धुरंधर ब्राह्मण को मैदान में उतारने की तैयारी में है।
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मुझे गर्व है कि मैं BSP का कार्यकर्ता हूँ और आदरणीय बहनजी के निर्देशन में मिशन और मूवमेंट के सिपाही की तरह काम कर रहा हूँ.बहनजी ने हमेशा बहुजन समाज के हित के बारे में ही सोंचा है और यही कारण रहा है की जब भी मौका मिला राज्य सभा और एमएलसी चुनाव में भेजने का तब गरीब बहुजन समाज के लोगों को राज्य सभा में सांसद और विधानसभा में एमएलसी बनाने का काम किया कभी भी उद्योगपतियों के इशारे पर या उद्योगपतियों को राज्यसभा में सांसद बनाकर नहीं भेजा.ना ही कभी धन्ना सेठों से चंदा लिया.हमें आदरणीय बहनजी पर गर्व है.
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद भी चंद्रशेखर को कौन बचा रहा है किसकी सरकार है उत्तर प्रदेश और देश में?
गाजियाबाद की एम.पी./एम.एल.ए. कोर्ट द्वारा चंद्रशेखर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) और 82/83 धारा के तहत संपत्ति कुर्की की कार्रवाई के आदेश इसी बात का प्रमाण हैं कि सही मार्गदर्शन न मिलने पर युवाओं का भविष्य किस तरह दांव पर लग जाता है।
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।
1.जैसाकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी ख़ासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल ग़रीब, मध्यम वर्ग व कमज़ोर तबक़ों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बी.एस.पी. की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ’पीडीए’ (PDA) की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज़्यादा नज़र आती है।
2.इसका एक और ख़ास व ताज़ा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में श्री रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नज़दीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार श्री धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ’फेस सेविंग’ व चुनाव हारने के लिये होगा।
3.तो इस प्रकार का है सपा, उसका ’पीडीए’ (PDA) व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ’पीडीए’ का चाहिये, लेकिन सांसद व विधायक आदि ज़्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूँजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके ’पीडीए’ के बहकावे में ना आये तो यह सही।
4.वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिये ख़ासकर अपरकास्ट समाज के ग़रीबों तथा ’बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब ख़ासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही ज़रूर पूरी तरह से सचेत/सतर्क हो जाना चाहिये कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बी.एस.पी. में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।
@Mayawati बसपा के अलावा चार और राष्ट्रीय पार्टियों के अध्यक्ष क्या इतना तेज और तीखा हमला करने की हिम्मत कर सकेंगे?
नरेंद्र मोदी व अमित शाह पर?
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@bspindia
भारत का संकल्प
बसपा ही विकल्प
जय भीम जय बसपा।
यूपी सहित देश के जिन राज्यों में भी बीजेपी की सरकारें हैं वहां चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग चरम पर बना हुआ है। खासकर वोट वाले दिन तो हर सीमा लांघ दी जाती है। यूपी, महाराष्ट्र, त्रिपुरा आदि इसके खास उदाहरण हैं। फिर भी चुनाव आयोग इसका उचित संज्ञान क्यों नहीं ले रहा है?
माननीय गृहमंत्री जी आपने अपने व्यक्तव्य में कहा उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार में उत्तर प्रदेश अपराध की इंडस्ट्री,कट्टा और तमंचा की इंडस्ट्री लगती थी.वाहन चुराने का कुटीर उद्योग लगता था .चैन स्नेचिंग का उद्योग था. माननीय गृहमंत्री जी जिस पद को आप सुशोभित कर रहे हैं उसे पद पर बिना तथ्यों के बिना बात करना आपकी छवि को धूमिल करता है. आपकी जानकारी हेतु बताना चाहता हूँ .उत्तर प्रदेश में आदरणीय बहन जी की चार बार की सरकार में उत्तर प्रदेश में गुंडाराज माफिया राज और डाकुओं का राज खत्म किया. गुंडा टैक्स बंद कर कराया गया। कहीं कोई दंगा फसाद नहीं हुआ। हर वर्ग में अमन चैन स्थापित हुआ।गरीब और अमीर पूरी तरह खुश थे। गरीब परिवारों को जमीनों का मालिकाना हक दिया गया जहाँ पर वह रहते थे। भूमिहीनों को दो से तीन तीन एकड़ के जमीन के पट्टे दिये गये।लेकिन आपकी सरकार ने उनको बुलडोजर से बेघर कर दिया आज भी यूपी के गरीब लोग दर-दर भटकने के लिए मजबूर हो रहे हैं। और आपकी जानकारी में बताना चाहता हूँ 2017 से लेकर 2024 की यूपी में आपकी बीजेपी सरकार में पेपर लीक का उद्योग चरम पर पहुंच गया है ।जिसके तहत नए-नए कीर्तिमान स्थापित हुए 2017 में यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा रद्द 2018 में (uppcl) उत्तर प्रदेश में पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड परीक्षा रद्द, 2018 में यूपी पुलिस कांस्टेबल नलकूप चालक भर्ती परीक्षा रद्द ,2021 में UPTET परीक्षा पेपर वापस रद्द ,2022 में लेखपाल भर्ती परीक्षा पेपर लीक रद्द ,2024 में यूपी पुलिस कांस्टेबल पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक और रद्द जिसमें 48 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए, 2024 में यूपी में RO/ARO समीक्षा अधिकारी परीक्षा पेपर लीक की वजह से रद्द, 2022 में यूपी बोर्ड के इंग्लिश पेपर 12 जिलों में परीक्षा पेपर लीक हुआ जिसकी वजह से आपको पेपर रद्द करना पड़ा था ।आपकी बीजेपी सरकार में उत्तर प्रदेश में मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाला की तरह ही पेपर लीक उद्योग स्थापित हुआ ।जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश में करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं और तमाम छात्रों का भविष्य अंधकार मय हुआ है।उसकी पूरी की पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की है। साथ ही मैं कुछ आंकड़ों को आप को बताना चाहता हूँ 2017 से अब तक 26000 ज्यादा उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक और जूनियर स्कूल बंद किए गए शिक्षा का पूरा हाल हुआ। आज उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार की गलत नीतियों की वजह से सात लाख से अधिक बच्चे आउट ऑफ स्कूल हैं उनको पढ़ने के अवसर ही नहीं मिल रहा है।और वही 2007 से 2012 के बीच में आदरणीय बहन जी के शासनकाल में 5000 प्राथमिक और जूनियर स्कूल खोले गए। 2007 से 12 के बीच में आदरणीय बहन जी की सरकार में 572 राजकीय हाई स्कूल माध्यमिक विद्यालय खोले गए, साथी 100 से अधिक डिग्री कॉलेज और 6 विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय,5 इंजीनियरिंग कॉलेज, 7 मेडिकल कॉलेज भी खोले गए ,विशेष रूप से दलित और पिछड़े बहुल ग्रामीण क्षेत्र में माध्यमिक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए इन विद्यालयों का निर्माण कराया गया। और इस कार्य में आपकी बीजेपी सरकार ने 10 सालों में जीरो का कीर्तिमान स्थापित किया है। गरीब परिवारों के बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, बैंकर्स बनाने के लिए छह कोचिंग इंस्टीट्यूट खोलने का काम किया उदाहरण स्वरूप लखनऊ के गोमतीनगर स्थापित भागीदारी भवन है आप यहाँ जाकर विजिट कर सकते हैं।उसके साथ ही में आपको या भी बताना चाहता हूं 2007 से पहले उद्योग प्रदेश डाकुओं के नाम से जाना जाता था चारों तरफ दहशत का माहौल था उस माहौल को खत्म करके उत्तर प्रदेश को भय मुक्त प्रदेश बनाया। आज यूपी में जातिवाद ऊँच नीच की भावना चरम पर हेयर बहन जी के शासनकाल में इस तरह का कोई माहौल नहीं था। सभी लोग भाई चारे के साथ अमन और चैन से रहते थे। पिछले 10 सालों में हत्या बलात्कार जबरन कब्जा आदि घटनाएं चरम पर हैं। उत्तर प्रदेश में नकली दवाइयां का उद्योग भी चरम पर है जिसकी वजह से कई बच्चों की जान चली गई लेकिन दोषियों और नकली दवाई उद्योग को बुलडोजर चला कर ध्वस्त करने की बजाय उनको भी संरक्षण प्राप्त है।इसलिए आप इस तरह की बातें करना कहीं ना कहीं से आपका और आपके पद को शोभा नहीं देता है।धन्यवाद
जय भीम जय भारत
सेवामें,डीएम कानपुर नगर
महोदय,जनपद कानपुर नगर अंतर्गत ककवन ब्लॉक के दर्जनों गांव में पांडव नदी की बाढ़ का पानी लोगों के घरों तक भरचुका है,हजारों बीघा धान व मक्का की फसल चौपट हो चुकी है,ये तस्वीरें ग्रामपंचायत कुरेह के मजरा अड्डापुरवा की हैं;कृपया मदद करें
@DMKanpur@CMOfficeUP
अत्यधिक वर्षा एवं प्रतिकूल मौसम को दृष्टिगत रखते हुए 26 सितम्बर 2026 को जनपद के समस्त परिषदीय, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई एवं अन्य सभी बोर्डों के कक्षा प्री-प्राइमरी से 12 तक के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। @CMOfficeUP@CommissionerKnp@InfoDeptUP@MSTawarIAS
@vaibhavkr86 आदरणीय बहन जी का ट्वीट जैसे ही आता है वैसे ही चंद सेकेंड या मिनटों में हम 209 बिल्हौर विधानसभा कानपुर नगर के पदाधिकारी ह्वाट्सएप व फेसबुक पर तुरंत शेयर करते हैं व सेक्टर बूथ पदाधिकारियों को फोन कॉल से भी बताते हैं
1. यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले ख़ूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा उस लेनदेन पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लोगों की नज़र में प्रथमदृष्टया मुनाफाख़ोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली है, जिससे जनता में बेचैनी व आक्रोश स्वाभाविक है।
2. वैसे तो जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ’कर’ मानने को तैयार नहीं है, किन्तु दिनांक 15 अक्तूबर से लागू हाने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाये जेब तो अन्ततः आमजनता की ही कटेगी, उसका ही ख़र्च बढ़ेगा।
3. साथ ही, यह भी सर्वविदित है कि देश की बहुसंख्यक जनता अपार ग़रीबी व ज़बरदस्त महंगाई आदि की मार से त्रस्त है व उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोज़गारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक कम व कल्याणकारी ज़्यादा हो तो यह उचित होगा। जनता की तंगी, दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?
4. इसके साथ ही, यूपी सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के कीरब 14,500 स्कूलों को ’स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को कथित ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले उन्हें बुनियादी शिक्षा आदि की ज़रूरतें अर्थात स्कूली बच्चों के सर पर छत, उनके लिये बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था पूरी की जायें और यह सब प्रति स्कूल क़रीब दो लाख रुपये में क्या संभव हो पायेगा, इस पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर विचार करे।