मेरठ में कांवड़ियों ने
पुलिसकर्मियों को पीटा
मेरठ में कांवड़ियों ने पुलिस जीप से दो पुलिसकर्मियों को बाहर खींचकर उनकी पिटाई कर दी और कपड़े भी फाड़ दिए. दरअसल, एक बाइक सवार ने कांवड़ियों को टक्कर मार दी थी. सूचना मिलने पर थाने के दो पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में जीप से मौके पर पहुंचे. इसी दौरान आरोपी बाइक सवार तो फरार हो गया, लेकिन गुस्साए कांवड़ियों ने पुलिसकर्मियों को ही पकड़ लिया और उन पर हमला कर दिया.
सरकार इनकी सुविधा के लिए रास्ता बनाती है, गुलाब के फूल बरसाती है फिर भी इनकी हिंसा को रोकने का इक़बाल नहीं रखती। समाजसेवी संगठन भी इंतज़ाम करते हैं। कैंप लगाते हैं। तब भी ये लोग हिंसा करने से बाज़ नहीं आते। कहने का मतलब है कि ये लोग राज्य और समाज दोनों से शिकायत नहीं कर सकते कि किसी ने परवाह नहीं की, फिर इनके भीतर इतनी हिंसा क्यों भरी है।
हर साल का यही हाल है। इन लोगों का फेस रिकॉग्निशन से रिकॉर्ड नहीं निकाला जाता है? पुलिस क्यों नहीं इनके घर चली जाती है? कम से कम इन सभी को एक गाइड लाइन पकड़ा देती कि कोई दिक्कत हो तो रास्ते भर पुलिस खड़ी है। आप पुलिस को बुलाइये। ख़ुद से मारपीट और तोड़ फोड़ मत कीजिए। कुछ तो काउंसलिंग करनी चाहिए और फिर कार्रवाई भी। कब तक स्टेट एक्शन नहीं लेगा और ये लोग हिंसा करते रहेंगे। इन्हें ये सब करने के लिए आप जेन ज़ी को दोष नहीं दे सकते। कई जेनरेशन से हो रहा है।
हमार मन की बात
Gen Z ने को शिक्षा लेकर जो आंदोलन और सर्जिकल स्ट्राइक किया उसका फायदा हम सबने देख लिया और हर लोगो ने महसूस भी किया।
मेरा दिल से गुज़ारिश की अब सब को Gen Z के साथ मिलकर हेल्थ सिस्टम पर सुधार के लिए इक्कठा आवाज उठाना चाहिए।
आज के तारीख़ के अगर आपका हेल्थ इन्शुरन्स नहीं हैं तो आप प्राइवेट हॉस्पिटल में कदम नहीं रख सकते और छोटे शहर के सरकारी हॉस्पिटल का हाल हम सबको पता हैं। हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी और हॉस्पिटल का नेक्सस इतना मजबूत हैं की आप उनके चक्रव्यूह से वापिस नहीं निकल सकते हैं।
परिवार के एक सदस्य का बीमारी पूरे परिवार को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ देता हैं। और ऊपर से इन प्राइवेट हॉस्पिटल , इन्शुरन्स कंपनी और मेडिसिन कंपनी का मार आपको जिंदगी भर के लिए पीछे धकेल देता हैं।
शायद मेरा ये मन की बात आपको तब तक अच्छा नहीं लगेगा जब तक आपके किसी नजदीक के साथ ऐसा नहीं हुआ हो लेकिन मेरी मानिए , ये कहानी हर घर की हैं।
सब मिलकर अगला आवाज इसपर उठाइए। मैंने पहले भी उठाया हैं और आगे भी साथ दूँगा इस मुद्दे पर 🙏🏻
देशभर के आंदोलनकारियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके संगी-साथियों के दुर्व्यवहार, दुर्वचनों और हिंसा को सब देख लें। इनका दुस्साहस देखिए कि अभी युवाओं को वचन दिए हुए चंद घंटे भी नहीं हुए हैं और ये भाजपाई अपने इतिहास को दोहराते हुए फिर से धोखा दे रहे हैं। भाजपा के ये संस्कारी नेताजी अपने शीर्ष नेतृत्व के दिये गये आश्वासन की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और वीडियो भी बना रहे हैं। अब क्या ये भी डबल इंजन की टकराहट के कारण हो रहा है।
तुरंत गिरफ़्तारी हो!
भाजपाई तो अपने वचन के भी सगे नहीं हैं।
भरोसे का विलोम भाजपा!
📍 जंतर मंतर, नई दिल्ली
राष्ट्रीय वीर हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यम पंडित का एक वीडियो सामने आया है।
वीडियो में वह जंतर मंतर पर मौजूद कुछ युवकों को रोककर उनकी पहचान पूछते, धर्म के आधार पर सवाल करते, गाली-गलौज करते, धमकाते, माफ़ी मंगवाते और कथित तौर पर मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं।
घटना का वीडियो सत्यम पंडित ने खुद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा:
"जंतर मंतर पर जाकर कुछ कॉकरोचों का इलाज करा, जो कहते हैं करके दिखाते हैं।"
इसीलिए मेरा मानना है कि देश में फैली गंदगी के लिए सरकार नहीं बल्कि जनता जिम्मेदार है।
सरकार सिर्फ कूड़ेदान लगवा सकती है लेकिन उसमें कूड़ा आपको ही डालना होगा।
इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया।
ये उस भारत के लाचार युवा हैं - जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती।
चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है - भीड़, घुटन, और बेबसी।
इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूंज सुनना ही नहीं चाहती।
पर मैं वादा करता हूँ - हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।
17 जून, कोटा। यही गूंज, अब हुंकार बनेगी।
#ChhatronKiGoonj
The Embassy of the Islamic Republic of Iran in India categorically rejects the reports and claims circulated by certain media outlets regarding the economic situation in Iran and alleged difficulties in the supply of essential goods and public necessities.
It is emphasized that, despite the imposition of three wars and extensive pressures against the Iranian nation, no shortage of essential commodities or basic necessities has occurred to date. Owing to the effective measures and responsible management of the Government of the Islamic Republic of Iran under the leadership of President Dr. Masoud Pezeshkian, the procurement, supply, and distribution of the goods required by the country continue in a normal, stable, and uninterrupted manner.
The Embassy of the Islamic Republic of Iran also urges respected Indian media organizations to obtain and disseminate news and reports concerning Iran from credible, official, and verifiable sources. In this regard, it should be recalled that Iran International is a media outlet affiliated with opponents and adversaries of the Iranian people and has a long record of disseminating biased narratives aligned with anti-Iranian political agendas. Consequently, it cannot be regarded as a credible source for accurately reflecting the realities of Iran.
@aajtak
₹19,000 crore.
That is what Banks collected in last 3 years just for not maintaining ‘Minimum Account Balance.’
Not from the rich. Not from big borrowers.
From the poorest accounts in the system.
Their crime? They didn’t have enough money.
A farmer misses the minimum balance - Penalty.
A pensioner withdraws money for medicine - Penalty.
A daily wage worker falls short by a few hundred rupees - Penalty.
The poor keep money in banks for safety. Not to be quietly fined for being poor.
Financial inclusion should protect small savings, not punish small balances.
In Parliament today I proposed ending minimum balance penalties so the banking system stops charging people for their poverty.
कोई सुकून नहीं है गांव में। सब दारूबाज, चरसी, लंपट जिनको शहर के 9 से 5 वाली नौकरी ने दुत्कार कर भगा दिया अब गांव में अशांति फैलाए हुए हैं।
हर सुबह 4 बजे कोई लाउडस्पीकर चालू कर देता है।
लगन के समय डीजे पर बजते अश्लील गाने आपके कान में छेद कर रहे होते हैं।
रोज 2 इंच जमीन फ़रियाने के लिए कोई अपने पड़ोसी से लड़ रहा होता है।
रोज कहीं न कहीं मातम चल रहा होता है, कोई जहरीली शराब पीने से मर गया, किसी का रोड एक्सीडेंट हो गया तो कोई गुजरात की फैक्ट्री में जल कर मर गया।
गांव को रोमांटिसाइज नहीं करना चाहिए। गांव के जीवन में बहुत परिश्रम है, बहुत सारी त्रासदी है, जातिगत हिंसाए हैं, भोले भाले लोगों को ठगे जाने की कहानियां हैं, बीमारियों की इलाज न करवा पाने से धीरे धीरे मरते लोग हैं। भोज में जाति के आधार पर खाना खाने की पंक्ति है। वो सब कुछ है जिसे हमने प्रीमिटिव मान लिया है।
पर हां, सुकून है, अपने लोगों के पास रहने का, अपने मां बाप, भाई बहन, बा बाबा के साथ रहने का। साथ हीं अपने गाछी में अपने आम के पेड़ के नीचे सोने का भी अपना आनंद है।
दिल्ली की सुरक्षा गृह मंत्री अमित शाह के अंतर्गत है लेकिन स्थिति बदहाल है। इसी दिल्ली में थाने के अंदर, पुलिस के सामने दो लड़कियों को माँ की गाली दी जा रही और कपड़े उतारने की धमकी दी जा रही है।
यह सब देश की राजधानी दिल्ली में हो रहा है लेकिन इस बारे में कोई चर्चा तक नहीं हो रही है। अगर यही किसी विपक्षी पार्टी द्वारा शासित प्रदेश में होता तो हल्ला मचा दिया जाता।
- @SanjayAzadSln जी, राज्यसभा सांसद, AAP