“Brother, either I or a few people who know me understand that for the past one year, I’ve been fighting every single day—against myself and my circumstances. You know, in today’s time, if someone loses all their money, life turns into a daily battle. I don’t even understand where to start anymore. Every day comes with its own expenses.”
@dgpup@igrangeayodhya@myogioffice@adgzonelucknow@IpsSaravanan@RajeshwarS73@Raghuraj_Bhadri महोदय,
मैं अभिषेक सिंह, अमेठी का निवासी, आपके समक्ष यह निवेदन एक ऐसे व्यक्ति के रूप में रख रहा हूँ जिसने पिछले एक वर्ष में उम्मीद और हकीकत के बीच का फर्क बहुत करीब से देख लिया है। मेरे साथ ₹85,57,000 का साइबर फ्रॉड हुआ, जिसका मुकदमा (मु•अ•स• 02/2025) दर्ज है—कागज़ों में सब कुछ सही है, बस ज़मीन पर कुछ होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा।
पिछले एक साल से मैं लगभग हर दरवाज़ा खटखटा चुका हूँ। हर बार यही विश्वास दिलाया गया कि “कार्रवाई हो रही है”… शायद हो भी रही होगी—बस इतनी धीरे कि मेरे जैसे व्यक्ति की उम्मीदें उससे पहले ही दम तोड़ दें।
जो अभियुक्त पकड़े गए हैं, उनके भी कभी भी जमानत पर छूट जाने की पूरी संभावना है। सच कहूँ तो अब यह डर नहीं, बल्कि एक तरह की आदत बन चुकी है—उम्मीद करना और फिर टूट जाना।
मैं अब पूरी तरह थक चुका हूँ—सिर्फ शरीर से नहीं, बल्कि अंदर से। मेरी हिम्मत, मेरा धैर्य, सब धीरे-धीरे खत्म हो चुका है। कभी-कभी लगता है कि शायद इस पूरी प्रक्रिया का मकसद ही यही है कि पीड़ित खुद ही हार मान ले, ताकि मामला अपने आप “शांत” हो जाए।
फिर भी, एक आखिरी कोशिश के रूप में आपसे हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूँ। आप अधिकार की स्थिति में हैं—अगर आपकी इच्छा और समय अनुमति दे, तो कृपया इस मामले में थोड़ा-सा ध्यान दे दीजिए। बस कुछ ही गिरफ्तारियाँ बाकी हैं… शायद उनके हो जाने से मेरी पूरी मेहनत की कमाई वापस मिल सके—हालाँकि अब “शायद” शब्द ही सबसे सच्चा लगने लगा है ।
अगर कहीं से भी न्याय मिल सकता है, तो वह आप ही के माध्यम से संभव है।
कृपया, यदि संभव हो, तो इस मामले को सिर्फ एक फाइल नहीं, बल्कि एक टूटे हुए इंसान की पुकार समझकर देखें।
अभिषेक सिंह
8484018538
@dgpup@igrangeayodhya@myogioffice@adgzonelucknow@IpsSaravanan@RajeshwarS73@Raghuraj_Bhadri महोदय,
मैं अभिषेक सिंह, अमेठी का निवासी, आपके समक्ष यह निवेदन एक ऐसे व्यक्ति के रूप में रख रहा हूँ जिसने पिछले एक वर्ष में उम्मीद और हकीकत के बीच का फर्क बहुत करीब से देख लिया है। मेरे साथ ₹85,57,000 का साइबर फ्रॉड हुआ, जिसका मुकदमा (मु•अ•स• 02/2025) दर्ज है—कागज़ों में सब कुछ सही है, बस ज़मीन पर कुछ होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा।
पिछले एक साल से मैं लगभग हर दरवाज़ा खटखटा चुका हूँ। हर बार यही विश्वास दिलाया गया कि “कार्रवाई हो रही है”… शायद हो भी रही होगी—बस इतनी धीरे कि मेरे जैसे व्यक्ति की उम्मीदें उससे पहले ही दम तोड़ दें।
जो अभियुक्त पकड़े गए हैं, उनके भी कभी भी जमानत पर छूट जाने की पूरी संभावना है। सच कहूँ तो अब यह डर नहीं, बल्कि एक तरह की आदत बन चुकी है—उम्मीद करना और फिर टूट जाना।
मैं अब पूरी तरह थक चुका हूँ—सिर्फ शरीर से नहीं, बल्कि अंदर से। मेरी हिम्मत, मेरा धैर्य, सब धीरे-धीरे खत्म हो चुका है। कभी-कभी लगता है कि शायद इस पूरी प्रक्रिया का मकसद ही यही है कि पीड़ित खुद ही हार मान ले, ताकि मामला अपने आप “शांत” हो जाए।
फिर भी, एक आखिरी कोशिश के रूप में आपसे हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूँ। आप अधिकार की स्थिति में हैं—अगर आपकी इच्छा और समय अनुमति दे, तो कृपया इस मामले में थोड़ा-सा ध्यान दे दीजिए। बस कुछ ही गिरफ्तारियाँ बाकी हैं… शायद उनके हो जाने से मेरी पूरी मेहनत की कमाई वापस मिल सके—हालाँकि अब “शायद” शब्द ही सबसे सच्चा लगने लगा है ।
अगर कहीं से भी न्याय मिल सकता है, तो वह आप ही के माध्यम से संभव है।
कृपया, यदि संभव हो, तो इस मामले को सिर्फ एक फाइल नहीं, बल्कि एक टूटे हुए इंसान की पुकार समझकर देखें।
अभिषेक सिंह
8484018538
“Brother, either I or a few people who know me understand that for the past one year, I’ve been fighting every single day—against myself and my circumstances. You know, in today’s time, if someone loses all their money, life turns into a daily battle. I don’t even understand where to start anymore. Every day comes with its own expenses.”
माननीय,
मैं पिछले एक वर्ष से इस मामले के लिए हर दिन पूरी ताकत और उम्मीद के साथ लड़ रहा हूँ, लेकिन आज भी शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पहले से गिरफ्तार लोग भी कभी भी जमानत पर छूट सकते हैं, जिससे मेरी चिंता और बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। अब मैं मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट चुका हूँ—मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।
आपसे हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है कि कृपया इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और शेष अभियुक्तों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित कराएं, ताकि मुझे न्याय मिल सके और मेरी ठगी गई मेहनत की पूरी कमाई वापस मिल सके।
माननीय,
मैं पिछले एक वर्ष से इस मामले के लिए हर दिन पूरी ताकत और उम्मीद के साथ लड़ रहा हूँ, लेकिन आज भी शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पहले से गिरफ्तार लोग भी कभी भी जमानत पर छूट सकते हैं, जिससे मेरी चिंता और बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। अब मैं मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट चुका हूँ—मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।
आपसे हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है कि कृपया इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और शेष अभियुक्तों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित कराएं, ताकि मुझे न्याय मिल सके और मेरी ठगी गई मेहनत की पूरी कमाई वापस मिल सके।
*मुंबई–असम में जहाँ 7 दिनों में 7 आरोपियों की गिरफ्तारी हो जाती है, वही 55 दिनों मे 5 कदम की उम्मीद नहीं,मुझे शिकायत नहीं आप लोगो से ,बल्कि इस दौरान हुई मानसिक पीड़ा और निराशा की 😪अभिव्यक्ति है।*
माननीय Yogi Adityanath जी अब आप पर ही भरोसा हैँ..
आईपीएस Anupam Kumar Singh सर द्वारा इतनी त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर 7 आरोपियों की गिरफ्तारी कराना मेरे जैसे पीड़ित के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण है। आप यदि कुछ दिन और रहते तो मुझ सभी पीड़ित को न्याय मिल जाता । धन्यवाद सर 🙏🙏