और फिर एक दिन ऐसा आता है जब आप किसी को प्रेम कर ही नहीं पाते..मर जाती है सारी भावनाएं..मन शून्य अवस्था में चला जाता है..हम भागने लगते हैं लोगों से..सिर्फ अंधेरा ही होता है हमारे इर्दगिर्द..हम स्वयं को उसे समर्पित करके इंतज़ार करते रहते हैं स्वयं के अंत का।
शुरू शुरू में मैं बड़ी टेंशन में रहती थी कि मेरा बाबू बिल्कुल गुलाब के फूल जैसा है
कहीं कोई मधुमक्खी लेना उड़े
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फिर धीरे-धीरे समझ आ रहा है कि वो तो धतूरे का फूल है ले जाओ अगर झेल सको तो
🤣🤪🤪