बिहार विधानसभा के चुनाव में साल भर का वक्त है। बावजूद इसके बिहार की राजनीति हिलोरे मार रही है। महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पहले चुनाव है फिर भी ख़बरों में बिहार है।
1. चिराग पासवान की पार्टी में कथित टूट की खबर
2. अशोक चौधरी का भूमिहार बयान कांड
3. पशुपति पारस की अमित शाह से मुलाकात
4. के सी त्यागी का इस्तीफा
5. श्याम रजक का पाला बदल
6. तेजस्वी का धरना
7. पीके का सम्मेलन और वादे पर वादा
ये कुछ हाल के डेवलपमेंट हैं।
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Russia’s ballistic missile system Iskander-M, air and missile defense system S-400 Triumph, and Yars ICBM complex will take part.
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बिहार चुनाव में परिवारवाद
हाजीपुर- चिराग पासवान- रामविलास पासवान के बेटे
जमुई- अरुण भारती- रामविलास पासवान के दामाद
समस्तीपुर- शांभवी चौधरी- मंत्री अशोक चौधरी की बेटी
वाल्मीकिनगर- सुनील कुमार- पूर्व मंत्री वैद्यनाथ महतो के बेटे
प. चंपारण- संजय जायसवाल- पूर्व सांसद मदन जायसवाल के बेटे
शिवहर- लवली आनंद- पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी
मधुबनी-- अशोक यादव- पूर्व मंत्री हुकुमदेव यादव के बेटे
वैशाली- वीणा देवी- जेडीयू एमएलसी दिनेश सिंह की पत्नी
सीवान- विजय लक्ष्मी कुशवाहा- पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा की पत्नी
औरंगाबाद- सुशील कुमार सिंह- पूर्व सांसद राम नरेश सिंह के बेटे
नवादा- विवेक ठाकुर- पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर के बेटे
मीसा भारती- पाटलिपुत्र- लालू यादव की बेटी
रोहिणी आचार्य- सारण- लालू यादव की बेटी
अर्चना रविदास- जमुई- पति मुकेश यादव (आरजेडी उम्मीदवार रहे)
19 मार्च की रात को पप्पू यादव पटना में लालू यादव से मिलने पहुंचे । तेजस्वी उनको लेकर रात को लालू के पास ले गए। तीनों साथ बैठे और अगली शाम को खबर आई कि पप्पू यादव कांग्रेस में शामिल हो गए हैं ।
ये तो हर कोई जान गया है। लेकिन पर्दे के पीछे क्या हुआ। आज वो जानिए। सूत्रों के मुताबिक पप्पू यादव के पास दो विकल्प थे। एक पहले से था कि पार्टी का कांग्रेस में विलय कीजिए और लोकसभा चुनाव लड़िए। ये बात तभी की है जब बिहार में नीतीश और लालू का रिश्ता टूट रहा था। प्रियंका गांधी ने इसमें भूमिका निभाई और साथ लाने को तैयार किया।
लेकिन ये जानकारी लालू यादव को नहीं मिली थी। किसी भी स्तर पर इसकी सूचना नहीं थी। क्योंकि तब लालू परिवार बहुमत को लेकर चल रहे जोड़ तोड़ के गणित में लगा था।
उसी दौरान जेडीयू के कई विधायक परिवार के संपर्क में आए। इनमें बीमा भारती भी थी। बीमा भारती को बहुमत परीक्षण के दिन पुलिस लेकर पटना आई थी। उस दिन उनके पति और बेटे को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया।
बताया जाता है कि लालू यादव इस दौरान लोकसभा चुनाव की गोटी बिछाने में लग गए थे। और बीमा भारती को लोकसभा लड़ाने का वचन दिया था। तब तक लालू यादव के दिमाग में पप्पू यादव को मधेपुरा से लड़ाने का विचार था।
19 मार्च की रात जब लालू और पप्पू की मीटिंग हुई तो लालू यादव ने उन्हें राजद में विलय करने और मधेपुरा लड़ने का प्रस्ताव दिया। पप्पू यादव एक इंटरव्यू में खुद इसको कबूल चुके हैं। तब विलय के प्रस्ताव को इग्नोर करते हुए पप्पू यादव ने मधेपुरा लड़ने में असमर्थता जाहिर की। लालू यादव से पूर्णिया की सहमति मांगी। लालू ने पूर्णिया छोड़कर मधेपुरा और सुपौल दोनों का विकल्प रखा । जिसको लेकर पप्पू यादव उधेड़बुन में फंस गए और विलय से लेकर कांग्रेस में जाने की बात पूरी नहीं हो पाई।
पप्पू यादव लालू को ये बोलकर निकले कि कांग्रेस नेताओं से मिलना है। इसलिए एक बार दिल्ली हो आते हैं। लालू ने खुशी खुशी भेज दिया।
इसके बाद सूत्रों ने ये जानकारी दी कि लालू पप्पू यादव को मधेपुरा लड़ाना चाहते हैं। पटना की मीडिया में ये बात चलनी शुरू ही हुई कि 20 मार्च की सुबह दस बजते बजते खबर आ गई कि पप्पू पार्टी का विलय कांग्रेस में कर रहे हैं। और पूर्णिया सीट से उम्मीदवार होंगे।
अब चंद घंटे में खेल बदल गया। कहां राजद में विलय का ऑफर और कहां कांग्रेस में जाने की बात आ गई। शाम को पप्पू दिल्ली पहुंचे। कांग्रेस में शामिल हो गए। इस दौरान अखिलेश सिंह की नाराजगी की खबर भी सामने आ गई। अखिलेश सिंह को शायद पहले से पता था कि पूर्णिया पर उनका दावा नहीं है। खबर ये भी निकली कि अखिलेश सिंह को भरोसे में नहीं लिया गया।
खैर,
लालू परिवार ने प्रतिष्ठा का विषय बना लिया। क्योंकि कहा जा रहा है कि कांग्रेस में पप्पू यादव को शामिल किया जाने की बात लालू यादव तक कांग्रेस लीडरशिप ने नहीं पहुंचाई। और लालू का प्लान इससे पंक्चर हो गया। जिसके बाद कांग्रेस से सीट बंटवारा फंस गया।
इधर 23 मार्च को बीमा भारती जेडीयू से इस्तीफा देकर राजद में गई। उसी रात लालू यादव ने सिंबल दे दिया। मतलब पूर्णिया पर बात खत्म हो गई। कांग्रेस नेतृत्व को इसकी जानकारी अखिलेश सिंह के जरिए भेज दी गई। जबकि कांग्रेस को लग रहा था कि पप्पू यादव, गांधी परिवार ये सब नाम जुड़े होने की वजह से लालू बैक मोड में आयेंगे। लेकिन ये हुआ नहीं। कल पप्पू यादव पूर्णिया लौट गए। दिल्ली में तेजस्वी की कांग्रेस नेताओं से मीटिंग हुई और कांग्रेस की मनचाही एक सीट कटिहार देने पर सहमति बनी। बाकी जो सीट राजद ने ऑफर की है वही सीट मिल रही है।
सूत्रों की मानें तो अखिलेश सिंह बेटे के लिए सेफ सीट चाहते हैं। मुजफ्फरपुर पहली चॉइस थी। लेकिन लालू वैशाली के लिए मुन्ना शुक्ला को बोल चुके हैं लिहाजा यहां अगल बगल भूमिहार बनता नहीं। बेतिया ब्राह्मण बहुल सीट है ये एक चर्चा हो रही है। मुजफ्फरपुर मिला भी तो वीणा सिंह, विजेंद्र चौधरी के खाते में जाएगी। महाराजगंज की उम्मीद कम है क्योंकि वहां रणधीर सिंह के साथ सारण में रोहिणी को लॉन्च किए हैं। शिवहर में कैंडिडेट होगा भी तो राजद ही देगा नहीं तो अमित कुमार टुन्ना की लॉटरी निकल आएगी।
दिलचस्प तस्वीर
नीतीश कुमार मंच पर सम्राट चौधरी के साथ पीएम को माला पहना रहे थे। प्रधानमंत्री ने हाथ पकड़कर नीतीश कुमार को माला के अंदर किया।अबकी बार माला के भीतर पीएम के साथ नीतीश कुमार ! तस्वीर इस बात का संकेत भी है कि नीतीश बिहार बीजेपी के सामने बहुत कमजोर स्थिति में नहीं हैं।
9 या 10 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान संभव।
जेडीयू ने बिहार में तीन चरण में चुनाव की मांग रखी।
ईद और होली की वजह से 7 से 9 या इससे भी ज्यादा चरण में हो सकता है इस बार चुनाव।
वे लड़के जो कम उम्र मे अपनी ज़िम्मेदारियो से प्रेम कर लेते है
किसी और चीज़ से चाह कर भी प्रेम नही कर पाते
कभी पूछने पर भी वो नही बता पाते
अपना प्रिय भोजन
अपना प्रिय रंग
अपने जीवन का प्रिय क्षण
एवं अपने बचपन की सबसे प्रिय याद भी
शायद वे भुला चुके होते हैं ख़ुद के अस्तित्व को भी
बीजेपी की राजनीतिक च्वाइस की मैसेजिंग देखिए।
सम्राट चौधरी के जरिए राम के वंशज को सत्ता पर बिठाने का संदेश । कुशवाहा बिरादरी की सालों की टीस को मंजिल मिली।
विजय सिन्हा के जरिए 1961 के बाद भारतीय राजनीति में किसी भूमिहार नेता के नाम के साथ सीएम (डिप्टी) लगाने का संदेश