मेरे पूछने पर सब्जी वाले ने जवाब दिया," कुछ नहीं! बस मुझे याद रहेगा कि किसने मेरी मदद की थी"
और तो और उन्होंने डायरी के पहले पन्ने पर अपने लिए एक लाइन लिख रखी थी" जिसने मेरी मदद की उसकी मदद करने का मौका कभी मत छोड़ना"
उस दिन मुझे लगा अमीर होने के कई तरीके हो सकते हैं किसी के पास पैसे कम हो सकते हैं लेकिन याद रखने के लिए एक लंबी सूची हो सकती है
एहसान का मौका हमेशा पैसे से नहीं उतर जा सकता कभी-कभी अच्छे व्यवहार से भी उतर जा सकता है
एक दिन मेरी नजर सब्जी वाले की डायरी पर पड़ी
वह ग्राहक का हिसाब लिखने की बजाय उसमें कुछ और ही दिख रहाथा
मैंने उनसे मुस्कुरा कर पूछा, इसमें सब्जी का हिसाब है या कोई और राज?
वह मेरी तरफ मुस्कुराए और डायरी बंद कर दी
जब ग्राहकों की भीड़ थोड़ी कम हो गई तो उन्होंने मुझसे कहा," मैं रोज रात को इस डायरी में उन ग्राहकों के नाम लिखता हूं जिन्होंने कभी ना कभी जिंदगी में मेरी मदद की थी "
मैंने मन में सोचा अजीब आदमी है अपने काम का हिसाब रखने के बजाय यह मदद करने वाले इंसानों की नाम की सूचियां क्यों बना रहा है ?
मैंने अपने जिज्ञासा को शांत करने के लिए उनसे पूछा इसका क्या करोगे?
उन्होंने मुझे जो जवाब दिया उसको सुनकर उन्होंने मैंने सोचा क्या आज के जमाने में ऐसा भी होता है.....1/2