@CMMadhyaPradesh@JansamparkMP @DIXITJI36288308 @OfficeofSSC@narendramodi@nstomar @Iamsisodia1 rgm पंचायत ग्रामीण विकास के इन जल योद्धाओ को 15 साल की प्रकृति सेवा का ये फल कॅरोना से न सही bjp के नोकरशाह ने जीते जी नोकरी से निकाल कर मार डाला। धन्य है मामा और उनके नोकरशाह।
गंदगी मुक्त भारत अभियान अंतर्गत तीसरे दिवस जिला पंचायत सागर की समस्त ग्राम पंचायतों में श्रमदान किया गया। जमुनिया, (बण्डा) एवं अमरमउ (शाहगढ़)में अभियान में सहभागी होने हेतु मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ इच्छित गढ़पाले पहुॅंचे।#गंदगी_मध्यप्रदेश_छोड़ो@minprdd
@PMOIndia.@ChouhanShivraj,@nstomarअल्प वर्षा की स्थिति में जलप्रबंधन और अतिवर्षा की स्थिति में मिट्टी का प्रबंधन बहुत ही आवश्यक होता है यह दोनों वाटरशेड योजनाओं के मुख्य घटक होते हैं अतः म.प्र में सरकार को वैज्ञानिक पद्धति आधारित वाटरशेड योजनाओं को बंद नहीं करना चाहिये।
@PMOIndia,@ChouhanShivraj,@nstomar म.प्र में अल्पवर्षा की स्थिति में वाटरशेड एक्सपर्ट टीम की भूमिका मनरेगा में बहुत आवश्यक थी परंतु आज 400 वाटरशेड एक्सपर्ट नौकरी की तलाश मे़ हैं और मनरेगा में जलसंरक्षण के नाम विना वैज्ञानिक पद्धति के काम हो रहे हैं इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं।
@ChouhanShivraj,@nstomarम.प्र सरकार यदि चाहती है कि प्रदेश में मनरेगा के बजट का लाभ मजदूरों के साथ साथ किसानों को भी मिले तो जलसंरक्षण के कार्यो में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये वाटरशेड एक्सपर्ट टीम की जिला और जनपद पंचायत स्तर पर नियुक्त करना चाहिये इसमें नुकसान नहीं है।
@ChouhanShivraj,@nstomarवाटरशेड से निर्मित छोटी छोटी संरचनायें ही आसपास के भूमिगत जलस्रोतों को जिंदा रखने में सहायक होती है इन छोटी छोटी संरचनाओं में न किसी किसान की जमीन का अधिग्रहण किया जाता है न ही ज्यादा लागत होती हैं परंतु उपयोगी जरूर होती है वाटरशेड का महत्व समझना जरूरी है
@chouhanshivraj,@nstomar कृषि हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीड की हड्डी हैं और जल के बिना कृषि उत्पादन संभव नहीं है फिर भी वैज्ञानिक पद्धति(रिज टू वैली अवधारणा) आधारित योजनाओं को बंद करके सरकार क्या हासिल करना चाहती है...???
@0810Pankaj@nstomar@ChouhanShivraj आपका कहना बिल्कुल सही है इतने महत्वकांक्षी परियोजना को जितने सुचारू ढंग से क्रियान्वित करने का कार्य हमारे वाटर सेट के भाइयों द्वारा किया गया और उसका परिणाम यह है कि आज खरीफ की फसल बरसात की इतने कम होने के बावजूद भी किसान अपनी फसल बताने में सफल हो रहे हैं |
@0810Pankaj@nstomar@ChouhanShivraj Lekin Hamare watershed ke bhaiyon per Nirankar nirdeshan ki prakriya jaldi a rahi hai Pichhle 2 Sal se Sarkar dwara iska koi nirakaran nahin kiya Gaya यह बहुत ज्यादा शर्मनाक बात है
@nstomar,@ChouhanShivrajम.प्र में जिन क्षेत्रों में वाटरशेड परियोजनाओं का क्रियान्वयन हुआ है वहाँ आज अल्पवर्षा की स्थिति में भी किसान अपने भूमिगत जलस्रोतों से सिंचाई करके अपनी खरीफ की फसल बचा रहा है फिर भी वाटरशेड जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को प्रदेश में बंद किया जा रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री मंत्री @ChouhanShivraj सर मध्यप्रदेश में संविदा कर्मियों के लिये स्पष्ट दिशा निर्देश केसाथ नीति बनाई जाये आगामी चुनाव को देखते हुवे ये घोषणा आपको करदेना चाहिए कि10 या 15 साल बाद नियमित कर दिया जाएगा स्वास्थ्य विभाग में 22साल से नोकरी पर है उन का क्या भविष्य है
@JM_Scindia@ImartiDevi प्रदेश के महिला बाल विकास के ईसीसीई समन्वयकों का अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हुआ , आज दिनांक तक कार्य करने के आदेश प्रसारित नही हुए, जबकि इस संकटकाल में किसी को भी बेरोजगार नही किये जाने के निर्देश हैं। 453 पद निरंतर रखने का प्रस्ताव कैबिनेट हेतु लंबित है। कब तक इंतजार करें हम?
मान.मंत्री @Iamsisodia1 जी
क्या विभागीय समीक्षा बैठक मे वाटरशेड के400 निष्कासित संविदाकर्मी कि बहाली हेतु अधिकारियो को निर्देशित किया गया है इस महामारीकाल मे रोजगार का संकट आ खड़ा हुवा है संविदाकर्मियो के सामने कृपया इनकी बहाली कराये @JM_Scindia@ChouhanShivraj@DrMohanBhagwat