कश्मीर की महान रहस्यवादी दार्शनिक लल डेड की कुछ पंक्तियाँ पढ़ते हुए अचानक पिता बहुत याद आए।
उन्हें खोने के बाद न जाने कितने समय तक मैं उन्हें बाहर ढूँढती रही—पुरानी स्मृतियों में, परिचित जगहों में, उनकी कही हुई बातों में ,दुनिया के हर उस ज़र्रे में ।
शायद विरह में हम यही करते हैं। जिसे खो देते हैं, उन्हें बाहर तलाशते रहते हैं।
फिर एक लंबी वेदना से गुज़रते हुए धीरे-धीरे यह एहसास हुआ कि मैं उन्हें इतनी दूर, इतनी जगहों पर खोज रही थी, वे मेरे भीतर हैं—मेरे सोचने के ढंग में, मेरी आदतों में, मेरी स्मृतियों में, मेरी आवाज़ में, और शायद मेरे होने के उन हिस्सों में भी, जिन्हें मैं स्वयं नहीं पहचान पाती।
शायद इसीलिए लल डेड की ये पंक्तियाँ मेरे भीतर के उस ज़ख़्म तक पहुँचती हैं, जिसके लिए शब्द हमेशा कम पड़ जाते हैं।
वे मेरे दुःख को कम नहीं करतीं।
लेकिन वे उस कमी को देखने का एक दूसरा रास्ता देती हैं—कि अनुपस्थिति हमेशा चले जाना नहीं होती।
कभी-कभी जिसे हम बाहर खो देते हैं, वह हमारे भीतर और गहराई से बस जाते है।
सिर पर हेलमेट नहीं-फौलादी हौसलों का ताज था।⛑️
अपने कार्यकर्ताओं के लिए मैं सिर्फ़ ढाल नहीं, अभेद्य चट्टान हूँ।
उन पर आँच भी आई, तो सबसे पहले सामने मैं मिलूँगी। 🚩
"तलवार जो चलाओगे हवा में खामखा,
बाजू थकेंगे और मरेगा कोई नहीं।"
भाजपा के शासन में हालत ऐसी हो गई है कि नाला और पाइपलाइन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लोग परेशान हैं। इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी?
इसलिए आपका एक-एक वोट बहुत महत्वपूर्ण है। कांग्रेस के चुनाव चिन्ह ‘हाथ’ पर वोट दीजिए और अपने पड़ोसियों से भी कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील कीजिए।
मथानिया में नगर निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान जो हुआ, उसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समय सीमा के बाद क्षेत्रीय विधायक और BJP के एक प्रत्याशी को RO कार्यालय में प्रवेश की अनुमति दी गई। क्षेत्रीय थानाधिकारी द्वारा स्थानीय विधायक को गेट से रिसीव कर कार्यालय के अंदर तक लाया गया, जबकि कार्यालय के अंदर मौजूद कांग्रेस प्रत्याशी के साथ बदतमीजीपूर्ण व्यवहार करते हुए उन्हें बाहर निकाल दिया गया। एक ही नियम दो लोगों के लिए अलग-अलग कैसे हो सकता है?
मैं इस भेदभाव के खिलाफ़ अभी RO कार्यालय, मथानिया के बाहर प्रशासन से जवाब मांगने के लिए बैठी हूँ। अगर चुनाव प्रक्रिया में ही पक्षपात होगा, तो निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र पर जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा? यह सिर्फ़ कांग्रेस प्रत्याशी के साथ भेदभाव नहीं, बल्कि संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।
RO को जवाब देना होगा कि आखिर यह भेदभाव किसके दबाव में और क्यों किया गया?
Seeds are more than an agricultural input. They are the foundation of India's food sovereignty.
As the Draft Seeds Bill redraws the rules of seed governance - the questions of farmer autonomy, corporate concentration, and food sovereignty, deserve far greater attention.
I write ✍️ @DeccanHerald
The battle over India's future won't begin in Parliament. It will begin with a seed.
As the Draft Seeds Bill reshapes India's seed governance - the fight over farmer autonomy, corporate concentration and food sovereignty becomes impossible to ignore.
I write ✍️
https://t.co/uptbpEqdr2
@Jairam_Ramesh@visually_kei@shemin_joy
Father’s Day पर मन बार-बार उन स्मृतियों में लौट जाता है, जहाँ पिताजी का स्नेह, उनका मार्गदर्शन और उनका विश्वास हर कदम पर साथ दिखाई देता है।
जीवन में कुछ रिक्त स्थान कभी नहीं भरते। पिता का साया भी ऐसा ही होता है। समय बीत जाता है, लेकिन कुछ यादें और कुछ सीखें जीवन भर साथ रहती हैं। आज भी जब पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो आपकी मुस्कुराहट, आपका स्नेह, आपका आत्मविश्वास और लोगों के प्रति आपका अपनापन स्मृतियों में उतना ही जीवंत है।
कई बार मन करता है कि एक बार फिर आपकी सलाह सुन सकूँ, आपका मार्गदर्शन पा सकूँ, लेकिन फिर लगता है कि आपने जो संस्कार दिए हैं, वही आज भी हर कदम पर मेरा हाथ थामे हुए हैं।🙏🏻❤️
#FathersDay
📍 AICC कार्यालय, नई दिल्ली
आज कांग्रेस मुख्यालय में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री @RahulGandhi जी से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ व बधाई दीं।
दिव्या जी ने किसानों की आवाज़ को मजबूती से उठाया है। प्रशासन को इस मामले में निष्पक्षता बरतते हुए जवाब देना चाहिए। किसानों के साथ अन्याय स्वीकार्य नहीं है।
ओसियां विधानसभा क्षेत्र में किसानों के घर पुलिस भेज कर जो व्यवहार कर रहा है यह प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता हैं।
आज ग्राम पंचायत गोपासरिया में राजनीतिक द्वेष की भावना से विद्युत विभाग के कर्मचारी पुलिस बल के साथ एक किसान के खेत से ट्रांसफार्मर (ढोलकी) हटाने पहुँचे। ओसियां में इस प्रकार की यह दूसरी घटना है, जो कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता से जुड़े मामलों में सौतेला व्यवहार, पक्षपातपूर्ण रवैया अथवा राजनीतिक द्वेष की भावना से किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। प्रशासन का दायित्व है कि वह निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करे, न कि आम नागरिकों और किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़े।
ओसियां क्षेत्र में किसानों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है, जिससे किसान और आमजन भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। खेती-किसानी का कार्य प्रभावित हो रहा है और लोगों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि समस्या का समाधान करने के बजाय किसानों को परेशान किया जा रहा है। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी किसानों की समस्याओं का निराकरण करना है, वही यदि किसानों पर अनावश्यक दबाव बनाएं, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
किसानों का अनावश्यक उत्पीड़न और उनके साथ अन्याय किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
ओसियां विधानसभा क्षेत्र में किसानों के घर पुलिस भेज कर जो व्यवहार कर रहा है यह प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता हैं।
आज ग्राम पंचायत गोपासरिया में राजनीतिक द्वेष की भावना से विद्युत विभाग के कर्मचारी पुलिस बल के साथ एक किसान के खेत से ट्रांसफार्मर (ढोलकी) हटाने पहुँचे। ओसियां में इस प्रकार की यह दूसरी घटना है, जो कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता से जुड़े मामलों में सौतेला व्यवहार, पक्षपातपूर्ण रवैया अथवा राजनीतिक द्वेष की भावना से किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। प्रशासन का दायित्व है कि वह निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करे, न कि आम नागरिकों और किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़े।
ओसियां क्षेत्र में किसानों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है, जिससे किसान और आमजन भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। खेती-किसानी का कार्य प्रभावित हो रहा है और लोगों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि समस्या का समाधान करने के बजाय किसानों को परेशान किया जा रहा है। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी किसानों की समस्याओं का निराकरण करना है, वही यदि किसानों पर अनावश्यक दबाव बनाएं, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
किसानों का अनावश्यक उत्पीड़न और उनके साथ अन्याय किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
अपने प्रशासनिक कार्यों और व्यस्तता के बीच भी साहित्य के लिए ऐसा गहरा समय निकालना और लिखना सिर्फ @DivyaMaderna जी जैसी ज्ञानवान नेता ही कर सकती हैं। उनका यह नया आर्टिकल अद्भुत है। @kcvenugopalmp@ajaymaken
"दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है, मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है।" इस गहरी सच्चाई को @DivyaMaderna जी ने अपने आर्टिकल में जिस तरह से रेखांकित किया है, वह उनकी वैचारिक परिपक्वता को दिखाता है। @BDUTT@Jairam_Ramesh
@DivyaMaderna जी के पास साहित्य और शब्दों की जो गहरी समझ है, वह उनके इस नए लेख में साफ झलकती है। बशीर बद्र जी के जीवन के उतार-चढ़ाव पर उनका यह दृष्टिकोण हर किसी को पढ़ना चाहिए। @omthanvi@ShekharGupta
"उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, ना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।" बशीर बद्र साहब के इन शेरों के ज़रिए @DivyaMaderna जी ने जीवन और काम की थकान के बीच के सुकून को अपने लेख में बेहद सरलता से समझाया है। @DeccanHerald@newslaundry