राजनीति ऐसी है भारत की यहां पूरा खेल ही इसी पिच पर हो रहा है ।
अगर सामने वाला दलित वोट पाने के लिए ये बोल रहा है तो क्या गलत बोल रहा है ?
एक्टिव राजनीति में डेमक्रेसी में सच नहीं बोला जाता जो कड़वा हो झूठ बोला जाता है जो अच्छा लगे ।
महत्वपूर्ण कार्य होता है
आज से आपसे 12 पहले पूछता देश में कभी कोई ऐसी सरकार आएगी जो नक्सलवाद खत्म कर देगी
आपको विश्वास होता इस बात पर ?
आज देखो खत्म हो गई ?
हर महीने ये नक्सलवादी हमारे जवानों को मारते थे ,
आज से 12 साल पहले मैं बोलता के एक ऐसी सरकार आएगी जो दिल्ली मुंबई पटना बनारस में बम बलास्ट नहीं होने देगी अब हमारे अपने नहीं मरेंगे आप मा��ते? ये बदला है मोदी ने ।
वाह दिल जीत लिया आपने अनुपम मिश्राजी
आप जैसे पत्रकार यूट्यूबर जब तक हैं राष्ट्रवादी मुहिम कभी कमजोर नहीं होगी
और देशविरोधियों को मुंहतोड़ जवाब मिलता रहेगा
@scribe9104 आपक�� सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता को नमन🙏
धन्यवाद अजीत भाई मेरे ट्वीट को कोट करने के लिए
और हां अपनी उपलब्धियां सोशल मीडिया के बायो में नहीं लिखी जाती
दूसरी महत्वपूर्ण बात मैं जब से पैदा हुआ हूं मेरी विचारधारा सिर्फ एक है
मैं विचारधारा बदलने वाला व्यक्ति नहीं हूं
अगर मुझे लगा कि जिस भी व्यक्ति का या पार्टी का मैं समर्थक हूं उसका समर्थन करना नहीं चाहिए तो मैं अपना अकाउंट डीएक्टिवेट कर दूंगा और अपना समय अपने परिवार को दूंगा ना की कभी इस डाली या कभी उसे डाली विचरण करूंगा
हमारी माँग बस इतनी है - आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा हो
किसी का हक़ नहीं छीनना, बस सवर्ण गरीबों को भी न्याय- समान अवसर, समान अधिकार मिले
सहमत है��� तो आवाज़ उठाएँ।
#आरक्षण पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री @oprajbhar जी ने जो कहा है, उस पर कोई भी समझदार व्यक्ति विवाद कर ही नहीं सकता है। राजभर जी ने कहा-
"बाबासाहब ने ��रक्षण की व्यवस्था इसलिए दी थी कि, समाज के वंचितों, दबे-कुचले लोगों को मुख्य धारा में लाया जा सके, लेकिन आज DM, SP, CM, गवर्नर और यहां तक कि, राष्ट्रपति के बच्चे भी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर समाज की मुख्य धारा में आ चुके हैं, उन्हें इससे बाहर किया जाना चाहिए"
यही आरक्षण का सही रास्ता है। आरक्षण न्यूनतम और कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति/समाज के लिए ही होना चाहिए। #ReservationDebate
@ParamveerS36404 Kya baat kar rahe ho paramveer ji wo hamare barwa gaon me 5000 ki bheed ke sath puri police brigade ke sath raili ki https://t.co/cLJB2Q51v0 bhi pure rajpurohit samaj me puri takat ke sath virodh kiya tha.
प्लान A-
अविमुक्तेश्वरानंद, UGC के नाम पर ब्राह्मणो को उकसाकर सपा-कांग्रेस गठबंधन के पाले मे लाना
प्लान B-
आरक्षण विरोध का बिगुल बजाकर OBC/SC का सपा के पक्ष मे ध्रुवीकरण कराना
प्लान A तो फेल हो गया,अब प्लान B पर काम जारी है।
सारी कवायद का मूल मकसद UP से योगी की ��िदाई कराना है।
सर्वविदित है कि हिंदुओं को जाति में विभाजित करके ही भाजपा को हराया जा सकता है।
सब उसी में लगे हैं... हर चुनाव से पहले यही सब।
पर क्या करें, गंदा है पर धंधा है सब।।
Take it as a dare to the GC warriors and the Anuradha’s and Ajit Bharti’s of the world:
Yes, BJP won’t remove reservation. Fine. Punish them by voting against Yogi and vote for SP, but on two conditions.
SP should immediately:
A) Promise to initiate a discussion on reservation in Parliament.
B) Assure the public now, that if it comes to power in 2029, it will abolish reservation.
If your cause is genuine, I’m expecting you will convince me (GC) by demanding this atleast via tweet.
हालांकि UGC की गाइडलाइन अभी कोर्ट में विचाराधीन है और उसके लागू होने पर स्टे है, जो निश्चित अवधि के लिए है। लेकिन जनरल कैटेगरी का एक समूह ऐसा है, जो शुरू से ही UGC गाइडलाइंस का विरोध कर रहा है और इसके खिलाफ आंदोलन कर रहा है।
इस मुद्दे पर राजनीति कितनी हो रह�� है, इसका निर्णय मैं आप पर छोड़ता हूँ। लेकिन मैं केवल तथ्यों की बात करूँगा।
UGC का विरोध करते हुए, चूँकि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए न तो इसे कोई लागू कर सकता है और न ही इसे कोई वापस ले सकता है, जब तक कोर्ट की ओर से इस पर कोई निर्णय नहीं आता।
लेकिन इसका विरोध करने वालों के सुरों में कभी-कभी यह बात भी जुड़ जाती है कि अगर UGC को वापस नहीं लिया गया, तो हम मोदी को वोट नहीं देंगे।
ठीक है भाई, मत दो वोट।
लेकिन BJP को वोट न देने से BJP सत्ता ��े बाहर हो जाएगी। सवाल यह है कि BJP की जगह सत्ता में आएगा कौन?
तब जवाब मिलता है, “उससे हमें कोई मतलब नहीं है।”
भाई, मतलब कैसे नहीं है?
आपको इससे मतलब होना चाहिए, क्योंकि अगर BJP सत्ता से हटती है, तो उसकी जगह जो लोग आएँगे, वे आज आंदोलन कर रहे हैं कि UGC लागू किया जाए। सत्ता में आने के बाद वे कोर्ट से मामला वापस लेकर या किसी नए प्रारूप के साथ UGC को लागू करने की कोशिश कर सकते हैं।
तब आप क्या करोगे?
फिर आंदोलन करोगे?
बहुत बढ़िया!
मतलब, हर सरकार के खिलाफ आपको आंदोलन ही करना है।
पटना में कल हुए छात्रों के आंदोलन में RJD के तेजस्वी यादव ने सरकार से मांग की कि UGC को तुरंत लागू किया जाए और बिहार में डोमिसाइल नीति लागू की जाए।
यह वही RJD है, जो INDIA गठबंधन का हिस्सा है और जिसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस है।
SC, ST और OBC वोटों के लिए INDIA गठबंधन का लगभग हर दल UGC लागू करने की मांग करता दिखाई दे रहा है।
और आप कह रहे हैं कि “हम BJP को हटाएँगे, सत���ता में कौन आएगा, इससे हमें कोई मतलब नहीं है।”
यही लोग सत्ता में आएँगे, जो धारा 370 को भी वापस लागू करने की बात कर सकते हैं, डोमिसाइल नीति भी लागू कर सकते हैं और UGC को भी किसी नए रूप में लागू कर सकते हैं।
और जो आप आज जंतर-मंतर पर आरक्षण हटाने या उसमें सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, पता नहीं तब आप कहाँ दिखाई देंगे।
आरक्षण का नाम शायद केवल एक ही शर्त पर लिया जाएगा कि आरक्षण 90% तक कर दिया जाए।
इ��लिए BJP को वोट न देना भी एक राजनीतिक निर्णय है, और यह भी समझना जरूरी है कि उसके बाद सत्ता में कौन आएगा।
आप केवल मोहरे न बनें।
जो लोग निष्पक्ष और सच्चे मन से इन आंदोलनों में लगे हैं, मैं उनसे सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि भाई, अपना आगे-पीछे देख लो। क्योंकि किसी एक मुद्दे या किसी एक नीति को लागू करने अथवा न करने के पीछे कौन-सी राजनीतिक ताकत खड़ी है, इसे समझना भी उतना ही जरूरी है।
कहीं ऐसा न हो कि आप किसी नीति के समर्थन या विरोध में सड़कों पर उतरें और कोई राजनीतिक दल आपके मुद्दे के बजाय केवल सरकार-विरोध मे�� अपना राजनीतिक लाभ तलाश रहा हो।
जो लोग इन मुद्दों के पीछे राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं, उनका लक्ष्य कई बार केवल इतना होता है कि सरकार का विरोध करो, उसे वोट मत दो और उसे सत्ता से हटा दो।
लेकिन आपके आंदोलन, आपके मुद्दे और आपकी वास्तविक पीड़ा से हर राजनीतिक दल को उतना मतलब नहीं होता, जितना अपने वोट बैंक से होता है। विपक्ष इस समय सरकार के विरोध में उठने वाली हर आवाज में अपना राजनीतिक अवसर देख सकता है, इसलिए वह आपके साथ खड़ा दिखाई देता है।
मुझे समझ नहीं आता कि आप लोग इस पहलू को क्यों नहीं समझ रहे।
और हाँ, डोमिसाइल नीति ��्या होती है, यह जानना है तो मुझसे मत पूछना।
Google पर जाइए और खोजिए कि डोमिसाइल नीति क्या होती है।
आपको जानकारी भी मिल जाएगी और शायद जमीन भी पैरों के नीचे से खिसकती हुई महसूस होगी।
साभार
भाजपा सरकार ना बचाती तो गुजरात में मुसलमान कब का तुम्हारा सर तन से जुदा कर चुके होते। कुछ तो शर्म करो एजेंडा बाजों हिन्दुत्व के नाम पर पहचान मिला तो जातिवादी ज़हर घोलने लगे।
We will not Vote for BJP because BJP won't remove Caste based Reservations
Instead We will vote for Samajwadi Party... A party which ordered to shoot karsevaks and then proudly boasted to do so.
We will vote for Congress Party which can't even Sing full vande Mataram because it will hurt their vote bank .
Fine go ahead 🤧
One thing be clear Reservations will never be removed...but yes Reforms can be made...
अजीत भारती ने आरक्षण रिफॉर्म आंदोलन को लेकर आज ANI से बात क��ते हुए शानदार तर्कपूर्ण तरीके से अपनी माँग रखी
उन्होंने सरकार से जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार को लेकर हमारी 4 प्रमुख ��ांगें:-
1. आरक्षण पर White Paper आए: पिछले 80 सालों में आरक्षण का वास्तविक लाभ किन जातियों को मिला और कौन सी जातियां आज भी वंचित हैं, इसका पूरा डेटा सामने रखा जाए, उन्होंने बिहार के मुसहर जाती का जिक्र करके बताया गया आज भी वे आरक्षण से वंचित है, गरीबी में जिंदगी जी रहे है।
2. Quota within Quota व क्रीमी लेयर: आरक्षित वर्गों के भीतर उप-वर्गीकरण हो और क्रीमी लेयर लागू की जाए, ताकि लाभ केवल प्रभुत्वशाली जातियों तक सी��ित न रहे बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँचे।
3. मेरिट व Minimum Qualifying Marks: शिक्षा और दक्षता से समझौता बंद हो; उच्च संस्थानों के लिए एक अनिवार्य न्यूनतम कट-ऑफ तय किया जाए।
4.EWS को आर्थिक राहत: EWS वर्ग के छात्रों को भी फॉर्म फीस, हॉस्टल और कोर्स फीस में SC/ST के समान सुविधाएं दी जाएं।
बिना किसी का अहित किए, वास्तविक जरूरतमंद तक लाभ पहुँचाने के लिए इन सुधारों पर सरकार को तुरंत संवाद शुरू करना चाहिए।
यह बात Ajeet Bharti जी ने ANI के इंटरव्यू में दिया है जी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है
JANTAR MANTAR IS NO PLACE FOR PRO-MERIT, ANTI-QUOTA PROTESTORS!
That's the message as Delhi Police clears up Jantar Mantar where a large number of people had gathered to protest against caste-based reservation.
NO RIGHTS ACTIVIST WILL POST IN FAVOUR OF THEIR RIGHT TO PROTEST