Mr. Modi, our students are demanding Dharmendra Pradhan’s resignation.
Don’t insult their intelligence with this pathetic midnight video.
1. Sack Pradhan.
2. Punish those who beat students.
3. Apologise
20 जुलाई को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे 19 साल के साहिल के चेहरे पर दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन से हमला किया।
साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र है मगर परिवार को सहारा देने के लिए वो पार्ट-टाइम कार भी चलाता है। वो खुद 2025 के SSC दिल्ली कॉन्स्टेबल पेपर लीक का शिकार है। अब उसे डर है कि SSC ने फिर से उसी एजेंसी को ठेका दिया है और फिर से पेपर लीक हो जाएगा।
इंसाफ़ और बेहतर भविष्य की मांग के साथ वह प्रदर्शन में शामिल हुआ था। आज हालत ये है कि उसकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा है।
ये सज़ा मिलती है हमारे छात्रों को सवाल पूछने और जवाबदेही मांगने की।
हम साहिल के साथ हैं। हम जवाबदेही मांग रहे हर छात्र के साथ हैं।
मोदी जी, देश के बच्चों से अपने इस गुनाह की माफ़ी मांगिए, इसके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कीजिए और धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त कीजिए।
आज हर छात्र कह रहा है, पुलिसवाले कह रहे हैं, पूरा देश कह रहा है - मोदी सरकार को जाना पड़ेगा।
विपक्ष के नेता के रूप में मेरी ज़िम्मेदारी हर भारतीय की आवाज़ बनना है - और उसके लिए हर कीमत छोटी है।
नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान खोलने वाले, भारत की उम्मीद और जनता की मुखर आवाज़ श्री @RahulGandhi को जन्मदिन की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं!
युवाओं के आदर्श और संविधान की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले जननायक को उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की मंगलकामना।
मोदी जी चुनाव नामांकन में पत्नी के आय-व्यय का कॉलम खाली छोड़ दें, तो भी उनका पर्चा 'वैलिड' रहता है।
दूसरी तरफ, श्रीमती मीनाक्षी नटराजन जी के नामांकन को उस शिकायत का जिक्र न करने पर 'इनवैलिड' कर दिया जाता है जो न मुकदमा बनी, न कोई कानूनी दस्तावेज!
लोकतंत्र का हाल देखिए—"खाता न बही, ज्ञानेश कहें वही सही।" पक्षपात की भी एक सीमा होती है!
#SaveDemocracy #DoubleStandard #Election2026
लोकतंत्र के रक्षक ही, लोकतंत्र के हत्यारे बन गए हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका है कि वो हर नागरिक के वोट की रक्षा करे, लेकिन वो लोगों के मताधिकार को अगवा कर रहे हैं।
पहले ये वोट चोरी करते थे, अब ये सीधे सीटों पर डाका डाल रहे हैं।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए ये बहुत बड़ी लड़ाई है, जिसकी शुरुआत मध्य प्रदेश के भोपाल से हो गई है।
: मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष @jitupatwari जी
12 वर्षों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और compromised विदेश नीति ने आज देश को ऐसे हालात में ला खड़ा कर दिया है जहाँ लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को लकड़ी के ज़हरीले धुएं की तरफ धकेल दिया गया है।
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दिया गया। उसपर पिछले 3 महीनों में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम ₹89 बढ़ा दिया गया - मतलब, पहले दाम बढ़ाओ, फिर सब्सिडी घटाओ, गरीबों का चूल्हा बुझाओ।
प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा, 5 किलो का सिलेंडर भी ₹323 महंगा कर दिया - वो कमाएगा क्या, खाएगा क्या, और बचाएगा क्या?
अरबपति मित्रों को लाखों करोड़ों की कर्ज़माफ़ी दिलाना और गरीबों को अपनी नाकामियों का बिल थमाना - ये लूट का मोदी मॉडल है।
मोदी जी, क्या आपकी नाकामियों का बोझ सिर्फ गरीब उठाएंगे? क्या आपकी बनाई इस चरमराती अर्थव्यवस्था की कीमत मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?
यूपी के लखीमपुर खीरी में छात्र ऋतिक मिश्रा के खुदकुशी का समाचार अत्यंत दुखद है। ऋतिक के शोक संतप्त माता-पिता एवं परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, NEET परीक्षा रद्द होने की वजह से ऋतिक मानसिक तनाव में थे। परीक्षाओं में चल रहा भयानक भ्रष्टाचार युवाओं की जान ले रहा है। हर साल लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।
यह सिलसिला कब रुकेगा? जवाबदेही कब तय होगी?
Tamil Nadu has chosen.
A new generation. A new voice. A new imagination.
My good wishes to Thiru Vijay - may he fulfil the hopes of the people of Tamil Nadu.
“अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा।”
लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा के ये आख़िरी शब्द थे। तीसरी बार NEET देने वाला यह बच्चा, परीक्षा रद्द होते ही टूट गया।
गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी ने जान दे दी।
ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, इन्हें एक भ्रष्ट तंत्र ने मारा है।
यह आत्महत्या नहीं - यह सिस्टम द्वारा हत्या है।
आंकड़े देखिए:
2015 से 2026 तक - 148 परीक्षा घोटाले।
87 परीक्षाएँ रद्द, 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित।
148 घोटालों में सज़ा हुई - सिर्फ़ 1 को।
CBI ने 17 मामले लिए, ED ने 11 - किसी को सज़ा नहीं।
NEET, AIPMT और अन्य मेडिकल परीक्षाओं में अकेले 15 घोटाले।
और सबसे शर्मनाक बात:
इन घोटालों में जिम्मेदार किसी अधिकारी या मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं हुआ। हटाए जाते हैं - फिर चुपके से बड़े पद पर बैठा दिए जाते हैं। चोरी कराने वालों को इनाम मिलता है, और परीक्षा देने वाले बच्चे जान गँवाते हैं।
मोदी जी - कितने ऋतिक चाहिए आपकी जवाबदेही जगाने के लिए?
मेरे युवा साथियों, आपका दर्द मेरा दर्द है। आपकी मेहनत मेरी मेहनत है। आपका भविष्य चुराने वालों को जवाब देना ही होगा। चाहे जितना वक्त लगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा - ये मेरा वादा है।
यह लड़ाई हम साथ लड़ेंगे - और जीतेंगे भी।
लखनऊ पुलिस लाइन के कांस्टेबल सुनील शुक्ला चिल्ला-चिल्ला कर बता रहें हैं कि उनके विभाग को 'काले अंग्रेज' चला रहे हैं। हर सिपाही से ड्यूटी के नाम पर ₹2000 की वसूली हो रही है।
यानी एक सेक्शन से ₹8 लाख महीना वसूला जा रहा है!
वैसे सरकार बताए कि वसूली का यह पैसा किस 'साहब' की तिजोरी में जा रहा है?
मुख्यमंत्री जी, आपके नाक के नीचे लखनऊ कमिश्नरेट में वसूली का मेगा शो चल रहा है और आप चुप हैं?
क्या इन भ्रष्ट अधिकारियों पर आपका बुलडोजर चलेगा या सिपाही को ही चुप करा दिया जाएगा?
वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार।
लोकसभा के 240 BJP सांसदों में से, मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है। पहचानना मुश्किल नहीं - क्या उन्हें BJP की भाषा में “घुसपैठिए” कहें?
और हरियाणा? वहाँ तो पूरी सरकार ही “घुसपैठिया” है।
जो संस्थाएँ अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं - वो ख़ुद “remote controlled” हैं।
उन्हें असली डर सच्चाई का है। क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएँ, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।
क्या निर्लज्जता है!
देश की छवि धूमिल हुई, चीन तक ने मखौल बनाया - लेकिन उससे ज़्यादा चिंता
‘कांग्रेस को मसाला दिया’ की है
ग़ज़ब बेहयाई. यह सोचिए कि पूरे देश में इस तरह का झूठ, फ़रेब क्यों पनप रहा है?
क्योंकि शीर्ष पर बैठे हुए मोदी जी लगातार लफ़्फ़ाज़ी करते हैं, झूठ बोलते हैं
US trade deal के नाम पर हम भारत के किसानों के साथ विश्वासघात होते हुए देख रहे हैं।
मैं प्रधानमंत्री से कुछ आसान सवाल पूछना चाहता हूं:
1. DDG import करने का वास्तव में क्या मतलब है? क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय मवेशियों को GM अमेरिकी मक्का से बने distillers grain खिलाए जाएंगे? क्या इससे हमारे दूध उत्पाद प्रभावी रूप से अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएंगे?
2. अगर हम GM सोया तेल के आयात की अनुमति देते हैं, तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और देशभर के हमारे सोया किसानों का क्या होगा? वे एक और कीमतों का झटका कैसे झेल पाएंगे?
3. जब आप “additional products” कहते हैं, तो उसमें क्या-क्या शामिल है? क्या यह समय के साथ दाल और अन्य फसलों को अमेरिकी आयात के लिए खोलने के दबाव का संकेत है?
4. “Non-trade barriers” हटाने का क्या मतलब है? क्या भविष्य में भारत पर GM फसलों पर अपने रुख को ढीला करने, procurement को कमजोर करने या MSP और bonuses को कम करने का दबाव डाला जाएगा?
5. एक बार यह दरवाज़ा खुल गया, तो हर साल इसे और ज़्यादा खुलने से हम कैसे रोकेंगे? क्या इसकी रोकथाम होगी, या हर बार सौदे में धीरे-धीरे और भी फसलों को मेज़ पर रख दिया जाएगा?
किसानों को ये सफ़ाई तो मिलनी ही चाहिए।
यह सिर्फ आज की बात नहीं है। ये भविष्य की भी बात है - क्या हम किसी दूसरे देश को भारत की कृषि उद्योग पर लंबे समय की पकड़ बनाने दे रहे हैं।
#FarmersFirst 🇮🇳