रविशंकर भारती चाहते तो अपनी बेटी को दुर्गा वाहिनी या संस्कार भारती जैसी महान संस्था में भेज सकते थे।
VHP के मुस्लिम विरोधी अभियान,चर्च जलाने जैसे कार्यों में लगा सकते थे।
पर उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ने के लिए बॉस्टन यूनिवर्सिटी भेज कर जो त्याग किया है, उसके लिये रविशंकर को युगों -युगों तक याद रखा जायेगा
👉 जंतर मंतर पर पुरानी पैंशन बहाली आंदोलन में पूर्व अर्धसैनिकों द्वारा 11 जनवरी 2023 को माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए ऐतिहासिक को लागू करने की जोरदार मांग।
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